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छत्तीसगढ़ में मॉल में पार्किंग शुल्क वसूली को राज्य उपभोक्ता आयोग ने माना अनुचित व्यापार व्यवहार और सेवा में कमी

राज्य उपभोक्ता आयोग ने मॉल में उपभोक्ताओं से पार्किंग शुल्क वसूलने को अनुचित व्यापार व्यवहार और सेवा में कमी माना है।

By Digital DeskEdited By: manoj dubey
Publish Date: Tue, 29 Sep 2026 12:42:46 PM (IST)Updated Date: Tue, 29 Sep 2026 12:44:28 PM (IST)
छत्तीसगढ़ में मॉल में पार्किंग शुल्क वसूली को राज्य उपभोक्ता आयोग ने माना अनुचित व्यापार व्यवहार और सेवा में कमी

HighLights

  1. निश्शुल्क और सुरक्षित पार्किंग उपलब्ध कराना प्रबंधन का दायित्व
  2. अंबुजा मॉल को 45 दिन के भीतर 55 हजार का भुगतान करना होगा
  3. मॉल प्रबंधन ने निश्शुल्क ड्रॉप व्यवस्था होने से इनकार कर दिया था

नईदुनिया प्रतिनिधि, रायपुर। राज्य उपभोक्ता आयोग ने मॉल में उपभोक्ताओं से पार्किंग शुल्क वसूलने को अनुचित व्यापार व्यवहार और सेवा में कमी माना है। आयोग ने जिला उपभोक्ता फोरम के उस फैसले को बरकरार रखा है, जिसमें अंबुजा सिटी सेंटर मॉल (अंबुजा नियोटिया) प्रबंधन को उपभोक्ताओं से पार्किंग शुल्क न लेने और निश्शुल्क पार्किंग व्यवस्था सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया था।

इसके साथ ही मॉल को परिवादी को मानसिक क्षतिपूर्ति के रूप में 50 हजार रुपये और वाद व्यय के रूप में पांच हजार रुपये का भुगतान करने का भी आदेश दिया गया है।

प्रबंधन ने निश्शुल्क ड्रॉप व्यवस्था होने से इनकार कर दिया

परिवादी अंजिनेश शुक्ला 15 जून 2025 को अपनी कार से अंबुजा मॉल गए थे, जहां उनसे 30 रुपये का पार्किंग शुल्क लिया गया। परिवादी ने कहा कि वह केवल अपनी माता को ड्रॉप करने गए थे, लेकिन प्रबंधन ने निश्शुल्क ड्रॉप व्यवस्था होने से इनकार कर दिया।


इसके अलाव मॉल द्वारा वाहनों में लगे फास्टटैग से भी बिना अधिकार के स्वचालित रूप से पार्किंग शुल्क काटा जा रहा था, जबकि फास्टटैग से टोल राशि वसूलने का अधिकार केवल नेशनल हाईवे अथॉरिटी जैसी अधिकृत संस्थाओं को है।

मॉल प्रबंधन दुकानों से भी लेता है मेंटेनेंस शुल्क

अंबुजा मॉल ने अपनी अपील में तर्क दिया था कि मॉल एक व्यावसायिक स्थल है और सुरक्षा व रखरखाव के लिए 30 रुपये का न्यूनतम शुल्क लिया जाता है। प्रबंधन का यह भी दावा था कि 10 मिनट के भीतर निकलने पर शुल्क वापस कर दिया जाता है।

हालांकि आयोग ने पाया कि 10 मिनट निश्शुल्क पार्किंग का कोई बोर्ड या स्टिकर घटना के समय मौजूद नहीं था और इससे जुड़े साक्ष्य भी मॉल प्रबंधन साबित नहीं कर सका।

आयोग ने यह भी पाया कि मॉल प्रबंधन द्वारा दुकानों से पहले ही मेंटेनेंस शुल्क लिया जाता है, ऐसे में सुविधाओं के नाम पर उपभोक्ताओं से अतिरिक्त पार्किंग शुल्क वसूलना पूरी तरह से गलत है।

निश्शुल्क और सुरक्षित पार्किंग उपलब्ध कराना प्रबंधन का दायित्व

राज्य आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति गौतम चौरड़िया और सदस्य प्रमोद कुमार वर्मा की पीठ ने 24 सितंबर 2026 को सुनाए गए अपने फैसले में अंबुजा मॉल की अपील को आधारहीन मानते हुए खारिज कर दिया। आयोग ने स्पष्ट किया कि जब मॉल प्रबंधन दुकानों से बिजली, पानी, एस्केलेटर, लिफ्ट और सुरक्षा गार्ड आदि के लिए मेंटेनेंस चार्ज लेता है, तो उपभोक्ताओं को निश्शुल्क और सुरक्षित पार्किंग उपलब्ध कराना भी प्रबंधन का ही दायित्व है।

अंबुजा मॉल को 45 दिन के भीतर 55 हजार का भुगतान करना होगा

यह फैसला उन उपभोक्ताओं के लिए एक बड़ी राहत है, जिन्हें मॉल में जाने पर पार्किंग शुल्क देना पड़ता है। अब अंबुजा मॉल को आदेश का पालन करते हुए 45 दिनों के भीतर 55,000 रुपये (क्षतिपूर्ति और वाद व्यय) का भुगतान परिवादी को करना होगा; अन्यथा आदेश दिनांक से भुगतान की तिथि तक सात प्रतिशत वार्षिक की दर से ब्याज भी देय होगा।