रायपुर। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने गुरुवार को कनहर बांध के मुद्दे पर अंतिम निर्णय सुनाते हुए उत्तर प्रदेश सरकार को किसी भी प्रकार का नया निर्माण न करने के आदेश दिए हैं, हांलाकि पहले से चल रहे काम पर किसी किस्म की रोक नहीं लगाई गई है।

जस्टिस स्वतंत्र कुमार की बेंच ने सुनवाई करते हुए पहली बार छत्तीसगढ़ के प्रभावित क्षेत्रों को लेकर कठोर रुख इख्तियार किया है। कोर्ट ने कनहर को लेकर एक 10 सदस्यीय कमेटी का गठन कर दिया है कोर्ट ने कहा है कि कोई भी नया निर्माण कमेटी की मंजूरी के बाद ही किया जा सकेगा। यह कमेटी इस बात का पता लगाएगी कि बांध निर्माण में पर्यावरण नियमों का पालन किया जा रहा है कि नहीं।

साथ ही पुनर्वास और विस्थापन के मुद्दे की भी छानबीन करेगी। कमेटी में छत्तीसगढ़ और उत्तर प्रदेश के सिंचाई विभाग के मुख्य अभियंताओं के अलावा पर्यावरण मंत्रालय, केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, केन्द्रीय जल आयोग के अलावा आईआईटी कानपुर के वैज्ञानिकों को शामिल किया गया है।

कोर्ट ने उत्तर प्रदेश को कनहर के मुद्दे पर नए सिरे से पर्यावरण मंजूरी लेने की भी सलाह दी है। गौरतलब है कि कनहर के मुद्दे पर पीयूसीएल की ओर से ओमदत्त सिंह और देबादित्यो सिन्हा ने ग्रीन ट्रिब्यूनल में वाद दाखिल किया था ।