सप्तरंग के लिए
रायपुर। नईदुनिया प्रतिनिधि
छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में खारुन नदी के तट पर हजारों साल से भी अधिक पुराना महादेव घाट एक खूबसूरत पिकनिक स्पॉट बन चुका है। कुछ सालों पहले तक लोग यहां हटकेश्वर महादेव मंदिर का दर्शन करने ही आते थे। अब डेढ़ साल पहले नदी के उपर हरिद्वार की तर्ज पर लक्ष्मण झूला का निर्माण होने से इसकी खूबसूरती पर चार चांद लग गया है। रायपुर के लोग बाहर से आने वाले मेहमानों को महादेवघाट अवश्य लेकर जाते हैं। हर संडे को सैकड़ों युवक-युवतियां लक्ष्मण झूला देखने और खारुन नदी में नौकायन करने का आनंद लेने पहुंचते हैं।
जयस्तंभ चौक से 8 किलोमीटर दूर
शहर के हृदय स्थल जयस्तंभ चौक से महज आठ किलोमीटर की दूरी पर स्थित खारुन नदी के किनारे हटकेश्वर महादेव का ऐतिहासिक मंदिर लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। महादेव के मंदिर के कारण ही खारुन नदी का यह तट महादेवघाट के नाम से मशहूर है।
कार्तिक पूर्णिमा का मेला पुन्नी मेला के नाम से मशहूर
महादेवघाट के किनारे हिंदू पंचांग के कार्तिक महीने की पूर्णिमा पर विशाल मेले का आयोजन होता है। यह पूरे छत्तीसगढ़ में पुन्नी मेले के नाम से मशहूर है। पुन्नी पर नदी में स्नान करने की मान्यता के चलते डेढ़ महीने पहले पुन्नी मेला में मुख्यमंत्री ने नदी में आस्था की डुबकी लगाई थी।
ग्रामीणों की मान्यता लक्ष्मण ने की थी शिवलिंग की स्थापना
मंदिर के पुजारी पं.सुरेश गिरी गोस्वामी बताते हैं कि भगवान हटकेश्वर महादेव नागर ब्राह्मणों के संरक्षक देवता माने जाते हैं। ग्रामीणों में मान्यता है कि भगवान श्रीराम के वन गमन के दौरान शिवलिंग की स्थापना हुई थी। शिवलिंग की स्थापना लक्ष्मणजी के हाथों हुई थी। कहा जाता है कि स्थापना के लिए हनुमानजी अपने कंधे पर शिवजी को लेकर आए। बाद में ब्राह्मण देवता को आमंत्रण करने गए तब तक देर हो गई। इधर लक्ष्मणजी देरी होने से क्रोधित हो रहे थे, क्योंकि स्थापना के समय में देर हो गई थी। जहां स्थापना की योजना बनाई थी, वहां न करके स्थापना के समय को देखते हुए खारुन नदी के तट पर ही स्थापना की।
हरकी पौड़ी की तरह अस्थियों का विसर्जन
छत्तीसगढ़ के लोग अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए नदी किनारे पिंडदान करने आते हैं। यहां स्थित श्मशानघाट पर दाह संस्कार के बाद अस्थियों का विसर्जन उसी तरह किया जाता है जैसा हरिद्वार के हरकी पौड़ी में करने की मान्यता है।
कलचुरी राजा ने बनवाया मंदिर
कालांतर में कलचुरी राजाओं ने इस क्षेत्र को अपनी राजधानी बनाया। कलचुरी राजा रामचंद्र के बेटे ब्रह्मदेव राय के शासनकाल के दौरान महादेव मंदिर का निर्माण हजराज नाइक ने विक्रम संवत 1458 अर्थात 1402 ई. में हटकेश्वर महादेव मंदिर का निर्माण कराया था।
हनुमान मंदिर समेत 50 से अधिक मंदिर
वर्तमान में खारुन नदी के तट के आसपास 50 से अधिक छोटे-बड़े मंदिर बन गए हैं। सबसे खास आकर्षण संगमरमर से निर्मित हनुमान मंदिर है। इस मंदिर में मां दुर्गा का अवतार जीण माता, राधा-कृष्ण, सीता-राम दरबार भी है।
स्वामी आत्मानंद समाधि
महादेव घाट में ही विवेकानंद आश्रम के संस्थापक स्वामी आत्मानंद (1929-1981) की समाधि भी स्थित है।