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छत्तीसगढ़ के 50 गांवों की बदलेगी तस्वीर, विकास के लिए मिलेंगे ₹1-1 करोड़, नक्सल मुक्त गांवों के लिए सरकार का बड़ा एलान

उपमुख्यमंत्री ने बताया कि जिन गांवों ने स्वयं को माओवादी हिंसा प्रभाव से मुक्त होने का प्रस्ताव पारित किया है, वहां प्रति गांव एक करोड़ रुपये के विकास...और पढ़ें

By Sandeep TiwariEdited By: Dheeraj Belwal
Publish Date: Sat, 11 Jul 2026 07:56:27 PM (IST)Updated Date: Sat, 11 Jul 2026 07:56:27 PM (IST)
छत्तीसगढ़ के 50 गांवों की बदलेगी तस्वीर, विकास के लिए मिलेंगे ₹1-1 करोड़, नक्सल मुक्त गांवों के लिए सरकार का बड़ा एलान
माओवाद मुक्त छत्तीसगढ़ में सरकार का ऐतिहासिक फैसला। (AI Generated)

HighLights

  1. माओवाद मुक्त छत्तीसगढ़ में सरकार का ऐतिहासिक फैसला
  2. 'गैर-गंभीर' मामलों में बंद आदिवासियों की होगी रिहाई
  3. मुकदमों की समीक्षा के लिए बनेगी वकीलों की स्पेशल टीम

राज्य ब्यूरो, नईदुनिया, रायपुर। राज्य सरकार ने माओवादी हिंसा से प्रभावित क्षेत्रों में शांति और विकास को गति देने के लिए एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। प्रदेश के गृह मंत्री और उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने शुक्रवार को पुलिस विभाग के उच्चाधिकारियों के साथ बैठक में निर्देश दिए कि माओवादी हिंसा से जुड़े उन 'गैर-गंभीर' मामलों की कानूनी समीक्षा की जाए, जिनमें किसी की जान नहीं गई है। इन मामलों में बंद पात्र आरोपियों की रिहाई की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।

'गैर-गंभीर' मामलों में बंद लोगों को रिहा करने की तैयारी

उपमुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि इसके लिए कानून विभाग की मदद से अभियोजकों और वकीलों की एक विशेष टीम गठित की जाएगी, जो कानूनी प्रक्रियाओं का पालन करते हुए मामलों को वापस लेने की संभावनाओं की जांच करेगी। ज्ञात हो कि छत्तीसगढ़ को 31 मार्च, 2026 को आधिकारिक रूप से सशस्त्र माओवादियों से मुक्त घोषित किया जा चुका है।


इस उच्चस्तरीय बैठक में प्रमुख सचिव निहारिका सिंह बारिक, सचिव नेहा चंपावत और अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक विवेकानंद सिन्हा सहित विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

विकास और पुनर्वास पर जोर

सरकार ने माओवादी मुक्त हो चुके गांवों के विकास के लिए 'खजाना' खोल दिया है। उपमुख्यमंत्री ने बताया कि जिन गांवों ने स्वयं को माओवादी हिंसा प्रभाव से मुक्त होने का प्रस्ताव पारित किया है, वहां प्रति गांव एक करोड़ रुपये के विकास कार्य कराए जाएंगे। फिलहाल ऐसे 50 गांवों की पहचान की गई है, जिनमें सुकमा और बीजापुर के 20-20 और नारायणपुर के 10 गांव शामिल हैं।

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प्रमुख निर्देश और पहल

  • स्वतंत्रता दिवस का संकल्प: माओवादी हिंसा मुक्त सभी गांवों में इस वर्ष 15 अगस्त को ध्वजारोहण किया जाएगा, ताकि लोगों में राष्ट्रवाद और आत्मविश्वास की भावना प्रबल हो।
  • आवास और सहायता: नक्सल माओवादी हिंसा से प्रभावित परिवारों को प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत प्राथमिकता से पक्के घर उपलब्ध कराए जाएंगे।
  • स्मृति और सम्मान:माओवादी हिंसा में बलिदान हुए सुरक्षाकर्मियों और आम नागरिकों की याद में संबंधित स्थानों पर सामुदायिक स्मारक बनाए जाएंगे। साथ ही, पीड़ित परिवारों को मिलने वाली सरकारी सहायता बिना देरी के सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।

  • पुनर्वास में तेजी: आत्मसमर्पण करने वाले युवाओं को राज्य की पुनर्वास नीति के तहत मिलने वाली प्रोत्साहन राशि का भुगतान एक माह के भीतर करने को कहा गया है। इन लाभों की निगरानी के लिए एक समर्पित 'डैशबोर्ड' भी तैयार किया जाएगा।
  • हथियारों की रिकवरी: लूटे गए हथियारों की बरामदगी और अंतर-राज्यीय समन्वय के लिए एक विशेष समिति का गठन किया जाएगा।