रायपुर (ब्यूरो)। छत्तीसगढ़ में पहली बार नगर निगम चुनाव में रायगढ़ से एक थर्डजेंडर मधु किन्नर को विजय मिली है। मधु ने कांग्रेस और भाजपा को पटखनी देते हुए साढ़े 9 हजार मतों के भारी अंतर से जीत दर्ज की है। मधु किन्नर को जिताकर मतदाताओं ने राजनीतिक दलों के नेताओं को संदेश भी दिया है।

भाजपा के कब्जे वाली रायगढ़ निगम में मधु किन्नर का मुकाबला भाजपा के महावीर राठौर और कांग्रेस के जूठूराम मनहर से था। मतगणना के शुरुआती दौर से ही मधु को बढ़त मिलने लगी थी और तीसरे दौर तक उनकी विजय सुनिश्चत हो गई। जीत से उत्साहित मधु किन्नर ने संपूर्ण नगर का विकास करने का वादा किया है। छत्तीसगढ़ से प्रथम किन्नर मेयर की जीत के साथ ही किन्नरों की सामाजिक-राजनीतिक दशा भी एक बार फिर से चर्चा में आ गई है।

गौरतलब है कि किन्नरों को लगभग 18 साल पहले 1994 में ही मताधिकार मिला है। इससे पहले मध्यप्रदेश के कटनी में किन्नर कमला जॉन महापौर रहीं। सिहोर नगरपालिका में भी किन्नर मीनाबाई अध्यक्ष रह चुकी हैं। मध्यप्रदेश के शहडोल जिले के सोहागपुर से 1998 में विधानसभा का चुनाव जीतने वाली शबनम मौसी सबसे ज्यादा चर्चा में रहीं। उनपर शबनम मौसी नामक फिल्म भी बन चुकी है।

साल 2000 में उत्तर प्रदेश के गोरखपुर से आशादेवी मेयर चुनी गईं। उनका मामला कोर्ट में गया। गोरखपुर सीट महिला के लिए आरक्षित थी लिहाजा आशादेवी को पद छोड़ना पड़ा। 2009 में निर्वाचन आयोग ने किन्नरों के लिए मतदाता परिचय पत्र जारी किया। अप्रैल 2014 में सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में किन्नरों को थर्ड जेंडर के तौर पर मान्यता देते हुए पुरुष, महिला के साथ तीसरी केटेगरी में रखने के निर्देश दिए।

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