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छत्तीसगढ़ में सिस्टम 15 सालों तक नहीं हिला तो ग्रामीणों ने पांच घंटे में बना डाली नाले पर पुलिया

कबीरधाम जिले के खपरी गांव में पंद्रह वर्षों के आश्वासनों से निराश ग्रामीणों ने श्रमदान कर बैजागी नाले पर अस्थायी पुलिया बना ली। नवरात्रि से पहले पचास ...और पढ़ें

By Bhavesh MishraEdited By: Paritosh Dubey
Publish Date: Sun, 04 Oct 2026 06:58:03 PM (IST)Updated Date: Sun, 04 Oct 2026 06:59:47 PM (IST)
छत्तीसगढ़ में सिस्टम 15 सालों तक नहीं हिला तो ग्रामीणों ने पांच घंटे में बना डाली नाले पर पुलिया
पुलिया निर्माण में जुटे ग्रामीण। - ग्रामीण

HighLights

  1. 15 साल के इंतजार के बाद बनाया रास्ता
  2. 50 ग्रामीणों ने पांच घंटे तक किया श्रमदान
  3. बैजागी नाले पर पक्की पुलिया निर्माण की मांग

नईदुनिया प्रतिनिधि, कवर्धा। कबीरधाम जिले के अंतर्गत खपरी गांव के ग्रामीणों ने प्रशासनिक उपेक्षा और जनप्रतिनिधियों की बेरुखी से तंग आकर अपनी समस्या का समाधान खुद निकालने का निर्णय लिया। जिस पक्की पुलिया के निर्माण के लिए ग्रामीण पिछले पंद्रह वर्षों से लगातार जनपद व जिला प्रशासन के दफ्तरों के चक्कर काट रहे थे, वहां से केवल आश्वासन ही मिले। बार-बार की मांग के बावजूद जब जमीनी स्तर पर कोई काम नहीं हुआ, तो ग्रामीणों का धैर्य जवाब दे गया। आखिरकार खपरी के ग्रामीणों ने व्यवस्था पर निर्भर रहने का मोह छोड़कर खुद नाले में उतरने का साहसिक फैसला किया।

रविवार की सुबह गांव के पचास से अधिक ग्रामीण अपने-अपने घरों से खाली प्लास्टिक की बोरियां और फावड़े लेकर बैजागी नाले पर एकत्रित हुए। ग्रामीणों ने आपसी सहयोग से बोरियों में मिट्टी और रेत भरकर उन्हें नाले के बहाव के बीच कतारबद्ध तरीके से बिछाना शुरू किया। करीब पांच घंटे की अथक और सामूहिक मेहनत के बाद ग्रामीणों ने आवागमन के लिए एक सुगम अस्थायी रास्ता तैयार कर दिया। रास्ता पूरा होते ही ग्रामीणों के चेहरे खिल उठे और उन्होंने जयकारे लगाकर अपनी एकजुटता का परिचय दिया।


बरसात में आवागमन और मंदिर दर्शन में चुनौती

गांव से करीब डेढ़ किलोमीटर की दूरी पर स्थित बैजागी नाला खपरी से महामाया मंदिर और कृषि भूमि तक जाने का मुख्य संपर्क मार्ग है। बारिश के मौसम में इस नाले में तीन फीट से अधिक पानी भर जाने के कारण बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों के लिए इसे पार करना खतरनाक हो जाता था। किसानों को खेतों तक पहुंचने में भारी कठिनाई होती थी। इसके अलावा नवरात्रि के पावन पर्व के दौरान मंदिर में ज्योत प्रज्वलन और दर्शन के लिए जाने वाले श्रद्धालुओं को भी हर साल भारी परेशानी झेलनी पड़ती थी।

जुगाड़ नहीं पक्के स्थायी निर्माण की मांग

श्रमदान करने वाले ग्रामीणों का कहना है कि यह अस्थायी व्यवस्था केवल फौरी राहत के लिए है। ग्रामीणों ने सवाल उठाया कि जब पचास लोग महज पांच घंटे में रास्ता बना सकते हैं, तो जिम्मेदार तंत्र पंद्रह वर्षों में एक पक्की पुलिया क्यों नहीं तैयार कर सका। ग्रामीणों ने प्रशासन से पुरजोर मांग की है कि आगामी नवरात्रि से पहले बैजागी नाले पर पक्के पुल का निर्माण सुनिश्चित किया जाए ताकि हर साल ग्रामीणों को इस तरह मजबूर न होना पड़े।

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