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रायपुर के आंबेडकर अस्पताल की हेल्प डेस्क बनी हेल्पलेस, आधे घंटे पर्ची का इंतजार, थम गई महिला की सांसें

छत्तीसगढ़ के सबसे बड़े सरकारी आंबेडकर अस्पताल में इलाज से पहले पर्ची बनवाने की लंबी प्रक्रिया और स्ट्रेचर न मिलने के कारण सिकल सेल पीड़ित महिला की तड़...और पढ़ें

By Akhil Kumar SharmaEdited By: Paritosh Dubey
Publish Date: Wed, 16 Sep 2026 06:37:35 PM (IST)Updated Date: Wed, 16 Sep 2026 06:42:46 PM (IST)
रायपुर के आंबेडकर अस्पताल की हेल्प डेस्क बनी हेल्पलेस, आधे घंटे पर्ची का इंतजार, थम गई महिला की सांसें
आंबेडकर अस्पताल में मरीज की जांच करते चिकित्सक। - नईदुनिया

HighLights

  1. समय पर पर्ची और स्ट्रेचर न मिलने से महिला की गई जान
  2. अस्पताल में कमी के चलते स्ट्रेचर और व्हीलचेयर के लाले पड़े
  3. गंभीर मरीजों के लिए भी औपचारिकताएं पूरी करने का कड़ा नियम

अखिल शर्मा, नईदुनिया, रायपुर। प्रदेश के सबसे बड़े सरकारी आंबेडकर अस्पताल में इलाज से पहले पर्ची बनवाने की प्रक्रिया के दौरान एक महिला की मौत हो गई। उरला निवासी दुर्गेश साहू बुधवार को अपनी पत्नी अश्विनी बाई साहू को लेकर अस्पताल पहुंचे थे। परिजनों के अनुसार, अस्पताल पहुंचने के बाद पहले पर्ची बनवाने के लिए कहा गया। पर्ची बनवाने में करीब आधा घंटा लग गया।

इस दौरान अश्विनी को एक हेल्प डेस्क के पास टेबल पर बैठाकर उसका रिश्तेदार उसे संभालकर खड़ा रहा। उसके साथ उसकी दो साल की बच्ची भी रोते हुए खड़ी रही। परिजनों का कहना है कि अस्पताल पहुंचने के बाद उन्हें स्ट्रेचर तक नहीं मिला। जब अश्विनी अस्पताल पहुंची थी, तब उसकी सांसें चल रही थीं, लेकिन पर्ची बनने तक उसकी सांसें थम गईं।


सिकल सेल से पीड़ित थी, पीलिया भी हो गया था

पति दुर्गेश साहू ने बताया कि अश्विनी बचपन से ही सिकल सेल बीमारी से पीड़ित थी। दो-तीन दिनों से उसकी तबीयत बिगड़ रही थी। उसका शरीर पीला पड़ गया था और उल्टी भी हो रही थी। बुधवार सुबह उसे सिकल सेल अस्पताल लेकर गए थे। वहां कुछ देर देखने के बाद आंबेडकर अस्पताल भेज दिया गया। करीब 10:45 बजे आटो से आंबेडकर अस्पताल पहुंचे। काउंटर पर पूछने पर उन्हें मरीज को अंदर लाकर काउंटर के पास दिखाने और इसके बाद पर्ची बनवाने के लिए कहा गया। परिजनों के अनुसार, पर्ची बनने के बाद ही अंदर इलाज शुरू होने की बात कही गई।

स्ट्रेचर भी नहीं मिला

दुर्गेश ने बताया कि उन्होंने अश्विनी को आटो से उतारने के लिए स्ट्रेचर मांगा, लेकिन स्ट्रेचर नहीं मिला। इसके बाद उन्होंने खुद अश्विनी को उतारा और टेबल पर बैठाकर पर्ची बनवाने चले गए। उनके साथ आए रिश्तेदार ने अश्विनी को संभालकर रखा। दुर्गेश के अनुसार, इस दौरान न तो किसी डाक्टर ने उनकी पत्नी को देखा और न ही किसी स्टाफ ने उसकी हालत पूछी। 11:18 बजे पर्ची बनी। इसके बाद उन्हें स्ट्रेचर मिला और वह पत्नी को लेकर वार्ड पहुंचे, लेकिन तब तक उसकी मौत हो चुकी थी।

ना कोई बताने वाला, ना किसी की मिली मदद

आधे घंटे तक हेल्प डेस्क के पास महिला अपनी अंतिम सासें गिनती रही, लेकिन उसकी मदद के लिए कोई वहां नहीं आया। आधे घंटे बाद जब महिला का पति पर्ची लेकर आया, उसके बाद उसका इलाज शुरू हो सका। इतने देर तक ना तो उसे किसी डाक्टर ने देखा ना ही कोई स्टाफ उसकी मदद के लिए पहुंचा। इसके चलते महिला की मौत हो गई।

सिर्फ 110 व्हीलचेयर और स्ट्रेचर वे भी खराब, आधे दान के

अस्पताल से मिली जानकारी के अनुसार, आंबेडकर अस्पताल में रोजाना ढाई हजार से तीन हजार की ओपीडी रहती है। रोजाना मेजर ओटी, आईपीडी, इमरजेंसी वार्ड में आने वालों के अलावा ओपीडी में आने वालों को व्हीलचेयर और स्ट्रेचर की जरूरत पड़ती है। इसके बाद भी अस्पताल में सिर्फ 70 स्ट्रेचर और 40 व्हीलचेयर ही उपलब्ध है। इनमें आधे दान में मिले हैं, साथ ही कई खराब होकर अस्पताल के किसी कोने में पड़े हैं।

रोजाना इसी को लेकर होता है विवाद

रोजाना यहां व्हीलचेयर और स्ट्रेचर को लेकर लोगों और स्टाफ के बीच विवाद होता है। यहां आने वाले हर मरीज को इसकी जरूरत होती है, लेकिन यहां स्टाफ गंभीर मरीजों को देखकर ही व्हीलचेयर और स्ट्रेचर देते हैं। इसके चलते उन्हें रोजाना अन्य मरीजों के परिजनों से झगड़ा हो जाता है।

पर्ची बाद में पहले करें इलाज

महिला को सिकल सेल और पीलिया की बीमारी थी। परिजन उसे पहले सिकल सेल अस्पताल ले गए थे। यहां आने में उसे देरी हुई। आंबेडकर अस्पताल के आपातकाल में आने वाले मरीजों का तत्काल इलाज करने सीएमओ और पीजी छात्रों को निर्देशित किया गया है। उनकी पर्ची बाद में बनाई जाए, इलाज में देरी ना हो इसके सख्त निर्देश दिए गए हैं।

- डाॅ. संतोष सोनकर, अधीक्षक, आंबेडकर अस्पताल