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छत्तीसगढ़ में बागवानी: जशपुर, बलरामपुर, सूरजपुर में नाशपाती, काजू, सेव स्ट्राबेरी से किसान सशक्त

छत्तीसगढ़ के उत्तरी जिलों जशपुर, बलरामपुर और सूरजपुर में जनजातीय किसान पारंपरिक खेती छोड़कर बागवानी को आजीविका का सशक्त जरिया बना रहे हैं। नाबार्ड और ...और पढ़ें

By Digital DeskEdited By: Paritosh Dubey
Publish Date: Tue, 13 Oct 2026 12:46:20 PM (IST)Updated Date: Tue, 13 Oct 2026 12:49:04 PM (IST)
छत्तीसगढ़ में बागवानी: जशपुर, बलरामपुर, सूरजपुर में नाशपाती, काजू, सेव स्ट्राबेरी से किसान सशक्त
अपनी उपज के साथ किसान। - ग्रामीण

HighLights

  1. नाशपाती और सेब की खेती से बढ़ी आमदनी
  2. काजू और नाशपाती उत्पादन से हुआ मुनाफा
  3. छत्तीसगढ़ के फल पहुंचे देश के बड़े बाजार

नईदुनिया प्रतिनिधि, रायपुर। छत्तीसगढ़ के उत्तरी वनांचल क्षेत्रों में कृषि का परिदृश्य तेजी से बदल रहा है। कभी सिर्फ धान और पारंपरिक फसलों तक सीमित रहने वाले जनजातीय किसान अब उच्च मूल्य वाली बागवानी फसलों के जरिए आर्थिक समृद्धि की नई इबारत लिख रहे हैं। राज्य के जशपुर, बलरामपुर और सूरजपुर जिलों में नाशपाती, काजू, सेब, स्ट्रॉबेरी, आम और लीची की व्यावसायिक खेती किसानों के लिए आय का मजबूत जरिया बन चुकी है।

नाबार्ड, रीड्स (ग्रामीण शिक्षा और विकास समिति) और राज्य उद्यानिकी विभाग के तकनीकी व वित्तीय सहयोग से उत्पादित ये ताजे फल अब स्थानीय बाजारों के अलावा दिल्ली, उत्तर प्रदेश, ओडिशा, झारखंड और पश्चिम बंगाल के बड़े फल बाजारों में धमक बना रहे हैं।


जशपुर बना केंद्र: नाशपाती और काजू का दबदबा

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के गृह जिले जशपुर में यह बदलाव सबसे अधिक दिखाई दे रहा है। अकेले जशपुर जिले में करीब 7,800 किसान काजू और 3,500 किसान नाशपाती की खेती से जुड़े हैं। जिले के मनोरा और बगीचा विकासखंडों में लगभग 3,500 एकड़ में नाशपाती के बाग फैले हैं, जिनसे सालाना 1.75 लाख क्विंटल उत्पादन हो रहा है। इससे किसानों को प्रति एकड़ एक से डेढ़ लाख रुपये तक की शुद्ध आय हो रही है। काजू की बात करें तो कुनकुरी में 3,000 एकड़, दुलदुला में 2,000 एकड़, कांसाबेल व फरसाबहार में एक-एक हजार एकड़ तथा पत्थलगांव में करीब 800 एकड़ में इसके बाग लहलहा रहे हैं।

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सेब और स्ट्रॉबेरी से खुली आमदनी की नई राह

जशपुर के ठंडे इलाकों में सेब की खेती भी उम्मीद की नई किरण बनकर उभरी है। वर्ष 2023 से शुरू हुए इस प्रयोग के तहत अब तक 410 किसान करीब 410 एकड़ में सेब के बाग तैयार कर चुके हैं। इसके अलावा जिले में 4,500 लीची उत्पादक और 50 से अधिक स्ट्रॉबेरी उत्पादक भी बेहतर मुनाफा कमा रहे हैं।

नाशपाती से कमाए 1.20 लाख

मनोरा ब्लॉक की महिला किसान अंजू लकड़ा ने पिछले सीजन में नाशपाती से 1.20 लाख रुपये कमाए और इस वर्ष ढाई लाख रुपये की कमाई की उम्मीद कर रही हैं। वहीं केराकोना के अनिल एक्का नाबार्ड से मिले कुएं और मोटर पंप की मदद से पांच एकड़ में नाशपाती उगा रहे हैं। पतराटोली के अनरथ साय शेडनेट हाउस में कलमी टमाटर के साथ आम और लीची के बीच स्ट्रॉबेरी व सब्जियां उगाकर सफल बहुफसली मॉडल पेश कर रहे हैं।

बलरामपुर और सूरजपुर में 'वाड़ी' से बदल रही जिंदगी

बलरामपुर के शंकरगढ़ ब्लॉक में करीब एक हजार किसान नाबार्ड और रीड्स की मदद से यूरोपीय किस्म की नाशपाती पैदा कर रहे हैं, जबकि राजपुर में एक हजार एकड़ में आम-अमरूद के बाग विकसित किए गए हैं। वहीं सूरजपुर के प्रतापपुर और प्रेमनगर विकासखंडों में नाबार्ड की वाड़ी विकास योजना के तहत लगभग एक हजार जनजातीय परिवारों को फलदार पौधों से जोड़कर आत्मनिर्भर बनाया जा रहा है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने भी कहा है कि नकदी फसलों की ओर किसानों का बढ़ता रुझान जनजातीय क्षेत्रों में टिकाऊ विकास और समृद्धि के नए द्वार खोल रहा है।