रायपुर । कबीरधाम जिले से 18 किमी व रायपुर से 125 किमी दूर चौरागांव में 1000 वर्ष पुराना भोरमदेव मंदिर है। इसके चारों ओर मैकल पर्वत समूह है। मंदिर की बनावट खजुराहो व कोणार्क के मंदिर समान है, जिसके कारण इसे 'छत्तीसगढ़ का खजुराहो' कहते हैं। 11वीं शताब्दी में नागवंशी राजा गोपालदेव ने बनवाया था।

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गंधेश्वर महादेव, सिरपुर

विशेषज्ञों के मुताबिक पहली शताब्दी के शुरू में सरभपुरिया राजाओं ने मंदिर का निर्माण कराया था। 12वीं सदी में आए भूकंप और चित्रोत्पला महानदी की बाढ़ में यह मंदिर तबाह हो गया, हालांकि शिवलिंग बच गया था। सिरपुर में खुदाई में यह मिला। इसमें तुलसी के पत्तों जैसी खुशबू आने के कारण गंधेश्वर महादेव कहते हैं।

देवबालोदा शिव मंदिर

रायपुर से करीब 15 किमी दूर देवबलोदा का शिवमंदिर 12वीं से 13वीं शताब्दी का माना जाता है। कलचुरी राजवंश के दौरान बलुआ प्रस्तर से बने इस मंदिर में की सबसे खास बात यह कि इसका शिखर नहीं है। खजुराहो की तर्ज पर शिव के कामांतर रूप और कई देवी-देवताओं की नक्काशीदार प्रतिमाएं आकर्षण का केंद्र हैं।

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