रायपुर। प्रदेश में राजकीय पशु वनभैंसा का कुनबा बढ़ाने के लिए असम स्थित मानस नेशनल पार्क से एक नर और एक मादा वनभैंसा लाया गया है। ये बुबैलस बुबालिस प्रजाति के हैं। छत्तीसगढ़ में इसे अर्ना के नाम से भी जाना जाता है। यह प्रजाति उत्तर-पूर्वी राज्यों में पाई जाती है, पूरे भारत में यह प्रजाति सिर्फ पांच फीसद ही है। छत्तीसगढ़ में लगातार वनभैंसे की घटती संख्या को देखते हुए इनके सरंक्षण के लिए वर्ष 2001 में इसे राजकीय पशु घोषित किया गया। उस समय प्रदेश में वनभैंसों की संख्या करीब 80 थी, लेकिन अधिकारियों की उदासीनता के चलते दिन-ब-दिन संख्या घटती गई। वर्तमान में इनकी संख्या सिर्फ 10 है।

प्रदेश में वनभैंसा की संख्या बढ़ाने के लिए असम से वन भैंसा लाने की कवायद पिछले दस साल से चल रही थी, लेकिन एनटीसीए से अनुमति नहीं मिल रही थी। अनुमति मिलने के बाद वन विभाग की टीम वनभैंसा लाने के लिए फरवरी में असम के लिए रवाना हुई थी।

असम से लौटी टीम ने बताया कि मानस नेशनल पार्क के कर्मचारियों ने मदद की तब जाकर हाथियों की सहायता से एक मादा और एक नर वनभैंसा को पकड़ा जा सका। इन्हें पकड़ने के लिए 12 से 14 हाथियों की मदद से वनभैंसों को घेरा जाता था, उसके बाद भी वे हमारे हाथ नहीं आ रहे थे। हालात ऐसे थे कि टीम का सुबह का नाश्ता और दोपहर खाना जंगल में ही होता था। एक वनभैंसा को पकड़ने में करीब दस दिन लगे।

राजकीय पशु को रखने में आएगी दिक्कत

वन विभाग के सूत्रों की मानें तो असम में गर्मी के दिनों में अधिकतम तापमान 37 डिग्री सेल्सियस रहता है, जबकि छत्तीसगढ़ का तापमान 45 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है। आठ डिग्री ज्यादा तापमान में वनभैंसों को पालने में दिक्कत होगी। असम की घास गीली मिट्टी युक्त रहती है, लेकिन छत्तीसगढ़ में गर्मी के दिनों में घास सूख जाती है। ऐसे में इन वनभैंसों के लिए भोजन की व्यवस्था करना बड़ी चुनौती होगी।

बारनवापारा में रखा गया है वनभैंसे को

वन विभाग के अधिकारी ने बताया कि असम से लाए गए वनभैंसों के लिए बारनवापारा अभयारण्य में 10 एकड़ में बाड़ा बनाया गया है। इसी बाड़े में दोनों को रखा गया है। इनकी संख्या बढ़ने पर धीरे-धीरे प्रदेश के जंगलों में छोड़ा जाएगा।

- असम से लाए गए वनभैंसे की प्रजाति बुबैलस बुबलिस है। यह प्रजाति उत्तर-पूर्व के राज्यों में अधिक पाई जाती है। असम से लाए गए वनभैंसों को बारनवापारा में रखा गया है।- अरुण कुमार पाण्डेय, एपीसीसीएफ वाइल्ड लाइफ छत्तीसगढ़

Posted By: Nai Dunia News Network

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