
नईदुनिया प्रतिनिधि, रायपुर। मुस्लिम राष्ट्रीय मंच छत्तीसगढ़ द्वारा रविवार को समान नागरिक संहिता (यूसीसी) विषय पर एक दिवसीय परिचर्चा का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के राष्ट्रीय अधिकारी एवं मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के संस्थापक इंद्रेश कुमार मुख्य वक्ता के रूप में शामिल हुए। उन्होंने यूसीसी को लेकर समाज में फैली भ्रांतियों को दूर करने का प्रयास करते हुए कहा कि समान नागरिक संहिता का उद्देश्य सुधार व्यवस्था को मजबूत करना है। इससे किसी भी समाज के धार्मिक और मौलिक अधिकार प्रभावित नहीं होंगे।
उन्होंने कहा कि यूसीसी को समझने के लिए इसका अध्ययन जरूरी है। उन्होंने कहा कि इसका अर्थ धार्मिक परंपराओं को छोड़ना नहीं है। पूजा पद्धति, रोजा, नमाज, हज, विवाह की धार्मिक रस्में और अन्य मान्यताएं इससे प्रभावित नहीं होंगी। उन्होंने कहा कि समाज को भ्रम फैलाने वाली बातों से बचना चाहिए और सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ना चाहिए।
उन्होंने कुरान के पहले शब्द ‘इकरा’ का उल्लेख करते हुए शिक्षा को प्राथमिकता देने की बात कही। साथ ही पैगंबर साहब के संदेश का हवाला देते हुए कहा कि जिस देश में रहें, उससे प्रेम करें और उसके कानूनों का सम्मान करें। कार्यक्रम की अध्यक्षता रायपुर शहर जामा मस्जिद के मुतवल्ली हाजी मोहम्मद इकबाल (मुन्ना) ने की। कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ राज्य वक्फ बोर्ड अध्यक्ष डा. सलीम राज, महामंडलेश्वर अजय राम, स्वदेशी जागरण मंच के जगदीश पटेल सहित समाज के कई प्रतिनिधि उपस्थित रहे। संचालन मुस्लिम राष्ट्रीय मंच छत्तीसगढ़ के प्रांत संयोजक यूनुस कुरैशी ने किया।
इंद्रेश कुमार ने प्रश्नोत्तरी सत्र में कहा कि समान नागरिक संहिता सभी नागरिकों के लिए समान अधिकार और व्यवस्था की दिशा में एक पहल है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यूसीसी किसी धर्म की पूजा-पद्धति या आस्था में हस्तक्षेप नहीं करता। कार्यक्रम में उपस्थित समाजजनों ने सामाजिक सुधार और जागरूकता की दिशा में संवाद को महत्वपूर्ण बताया। वक्ताओं ने शिक्षा, सामाजिक एकता और देशहित में मिलकर कार्य करने का आह्वान किया।
प्रश्नोत्तरी सत्र में इंद्रेश कुमार ने उपस्थित जनसमूह से संवाद भी किया। उन्होंने पूछा कि इस्लाम के अलग-अलग फिरकों की इबादतगाहों में कितने लोग हैं जो जा चुके हैं। उन्होंने लोगों से हाथ उठाने को कहा। इसके बाद उन्होंने बताया कि वे देश में तमाम फिरकों की इबादतगाहों में गए हैं। शरीयत पर हस्तक्षेप के प्रश्न पर उन्होंने कहा कि यदि कोई शरीयत को गलत तरीके से परिभाषित कर रहा हो तो क्या करना चाहिए। संवाद से ही हल निकलेगा। वे इसी अभियान में लगे हुए हैं।