
सतीश पांडेय, नईदुनिया, रायपुर। अमेरिका ने सूडान में गृहयुद्ध को बढ़ावा देने के आरोप में आठ लोगों और संस्थाओं पर प्रतिबंध लगाए हैं। इनमें एक भारतीय नागरिक भी शामिल है, जो विस्फोटक बनाने वाली कंपनी से जुड़ा है। अमेरिकी ट्रेजरी विभाग के आफिस आफ फारेन एसेट्स कंट्रोल ने शुक्रवार को कहा कि जिन नेटवर्क को निशाना बनाया गया, उन्होंने सूडानी सशस्त्र बलों (एसएएफ) और रैपिड सपोर्ट फोर्सेज (आरएसएफ) को इस अफ्रीकी देश में गृहयुद्ध को बढ़ाने और तेज करने में मदद की।
प्रतिबंधों का सामना करने वाले लोगों में छत्तीसगढ़ के आलोक चौधरी भी शामिल हैं। वे एसबीएल एनर्जी लिमिटेड (जिसे अमीन एक्सप्लोसिव प्राइवेट लिमिटेड के नाम से भी जाना जाता है) के सीईओ हैं।
आरोप है कि इस कंपनी ने एसएएफ के हथियारों के जखीरे का रखरखाव करने वाली एक कंपनी को विस्फोटक और उससे जुड़ी सामग्री की 200 से अधिक खेप सप्लाई की थीं। ट्रेजरी विभाग ने एसबीएल एनर्जी लिमिटेड और सूडान और मिस्र में स्थित अन्य कंपनियों पर भी प्रतिबंध लगाए हैं। अमेरिकी विदेश विभाग के प्रवक्ता टामी पिगाट ने कहा, "ये नेटवर्क सूडानी सशस्त्र बलों और रैपिड सपोर्ट फोर्सेज, दोनों को हथियार, विस्फोटक और विदेशी लड़ाके मुहैया कराते हैं। इनके समर्थन ने उस संघर्ष को लंबा खींच दिया है, जिसने दुनिया का सबसे बुरा मानवीय संकट पैदा किया है और आतंकवादी समूहों को काम करने का मौका दिया है।"
रायपुर के फाफाडीह चौक स्थित वालफोर्ट ओजोन के कार्पोरेट मुख्यालय में नईदुनिया से चर्चा करते हुए कंपनी के मैनेजर पंकज अग्रवाल ने कहा कि एसबीएल एनर्जी नागपुर मुख्यालय से पिछले 22 वर्षों से पूरे भारत में कोल इंडिया समेत विभिन्न संस्थानों तथा 20 देशों की खदानों में उपयोग होने वाले विस्फोटकों की आपूर्ति कर रही है। अग्रवाल ने कहा कि बिना किसी पूर्व सूचना के कंपनी पर प्रतिबंध लगा दिया गया, जिसके खिलाफ अपील की जा रही है। यदि आपूर्ति के बाद विस्फोटक कहीं और पहुंचते हैं तो इसके लिए कंपनी को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता।