
राज्य ब्यूरो, नईदुनिया.रायपुर। प्रदेश में बारिश का सकारात्मक असर जलाशयों पर दिखाई देने लगा है। बड़े और मध्यम स्तर के बांधों के जलस्तर में विगत चार दिनों में करीब तीन प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है, जिससे किसानों को राहत मिली है। छह जुलाई की स्थिति में प्रदेश के 12 बड़े और 34 मध्यम जलाशयों में औसतन 54.34 प्रतिशत जलभराव दर्ज किया गया, जबकि तीन जुलाई को यह 51.42 प्रतिशत था। विगत वर्ष इसी अवधि में जलाशयों में केवल 32.77 प्रतिशत पानी उपलब्ध था।
प्रदेश के प्रमुख जलाशयों में धमतरी जिले का रविशंकर (गंगरेल) जलाशय 47.66 प्रतिशत क्षमता तक भर चुका है। इस वर्ष भीषण गर्मी और कमजोर मानसून के बावजूद बांधों में औसत जल भंडारण जून में 50 प्रतिशत तक पहुंचा था। मानसून की देरी से खरीफ के लिए पानी छोड़ने का दबाव भी बनने लगा था। दूसरी ओर अनुबंध के तहत उद्योगों को सप्लाई करना भी अनिवार्य था।
जल संसाधन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि लगातार हो रही वर्षा से खरीफ फसलों की बुआई और धान की रोपाई का कार्य तेज हो गया है। पर्याप्त पानी मिलने से किसानों में उत्साह है और सिंचाई की चिंता भी काफी हद तक कम हुई है। नदी-नालों और जलाशयों के जलस्तर पर निगरानी रखी जा रही है, ताकि किसी भी संभावित स्थिति से समय रहते निपटा जा सके। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि वर्तमान जल भंडारण न केवल खरीफ फसलों के लिए बल्कि आगामी रबी सीजन की सिंचाई आवश्यकताओं को पूरा करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। साथ ही पेयजल आपूर्ति की स्थिति भी मजबूत रहेगी।
बांध- वर्तमान- वर्ष-2025 - वर्ष-2024
बड़े- 56.63 - 33.08 - 32.89
छोटे - 42.13 - 29.90 - 32.11
बांध का नाम - 2026 - 2025
मिनीमाता बांगो- 59.42 - 37.47
गंगरेल जलाशय- 47.66 - 28.49
तांदुला जलाशय- 43.93 - 17.11
दुधावा- 72.74 - 19.01
सिकासार - 41.10 - 60.69
खारंग जलाशय- 67.10 - 38.37
सोंदूर- 65.89 - 21.00
मुरूमसिल्ली- 45.82 - 0.91
कोडार बांध- 36.77 - 15.04
मनियारी जलाशय- 76.97 - 49.26
केलो बांध - 40.45 - 35.53
अरपा भैंसाझार- 51.71 - 12.68
(छह जुलाई की स्थिति में बांधों में उपलब्ध जल का प्रतिशत)
मानसून के देरी से आने के बाद भी विगत एक जुलाई से छह जुलाई तक छत्तीसगढ़ का मैदानी भाग एवं बस्तर का पठार में अधिक वर्षा होने के कारण मानसून का अब तक का कोटा लगभग पूरा हो चुका है। वर्तमान जल भंडारण न केवल खरीफ फसलों के लिए बल्कि आगामी रबी सीजन की सिंचाई आवश्यकताओं को पूरा करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
डा. जीके दास, मौसम विज्ञानी, इंदरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय