रायपुर। World Heart Day 2022: डा. भीमराव आंबेडकर अस्पताल के एडवांस कार्डियक इंस्टिट्यूट हृदय रोगियों के लिए संजीवनी बन चुका है। 2017 में शुरू विभाग में अब तक हजारों हृदय रोगियों की जान बचाकर भरोसा बनाने में कामयाब रहा है। गरीबों को शासकीय योजनाओं के तहत निश्शुल्क सेवाएं देने वाला यह विभाग हर वर्ग को बेहतर सेवाएं उपलब्ध करा रहा है।

एसीआइ में सर्जरी विभाग के एचओडी डा. केके साहू ने बताया कि हृदय रोग के कई आपरेशन ऐसे हुए जो राज्य में अपनी तरह के पहले केस थे। वहीं देश में भी चुनिंदा ही हुए। इसमें हृदय के पीछे ट्यूमर, ट्रामेटिक काइलोथोरेक्स, छाती के अंदर टूटे हुए थोरेसिक डक्ट जैसी जटिल हृदय रोग के इलाज से मरीजों को जीवन मिला। इंफेंटियर पेना केना कैंसर की सर्जरी राज्य में पहली और देश में 13वां केस था, जिसका सफल इलाज किया गया। कार्डियोलाजी विभागाध्यक्ष डा. स्मित श्रीवास्तव ने बताया कि अब तक 10,000 से अधिक कार्डियक सर्जिकल प्रोसस कर मरीजों की जान बचाई गई है। विभाग में हृदय रोग के औसत 150 मरीज हर रोज आते हैं।

इस वर्ष 1022 हृदय रोगी बच्चों के मामले

आंबेडकर अस्पताल स्थित एडवांस कार्डियक इंस्टिट्यूट में ही देखें तो 2021 में कुल 1172 मामले अगस्त 2022 तक कुल 1022 मामले में बच्चों में हृदय संबंधी समस्या के 21 मामले भी शामिल हैं। हृदय संबंधी समस्याओं के आए हैं, जिन्हें एसीआइ के डाक्टरों की टीम ने उनका उपचार कर नया जीवन प्रदान किया है। साथ ही साथ समय-समय पर यहां आने वाले लोगों को अनियमित दिनचर्या को सुधारने और खान-पान व्यवस्थित करने के जागरूक भी किया जाता है।

दिल की दर्द दूर कर दे रहे जिंदगी

1. विश्वसनीयता से बढ़ा लोगों का भरोसा : डा. कृष्णकांत

आंबेडकर अस्पताल के एसीआइ में कार्डियक सर्जन डा. कृष्णकांत साहू ने बताया कि 15 वर्षों के अनुभव में हृदय, फेफड़ों की समस्या को लेकर पांच हजार से अधिक सर्जरी कर लोगों की जिंदगी बचाई है, लेकिन राह आसान नहीं रही। 24 घंटे अलर्ट रहना पड़ता है। क्योंकि जरा सी चूक से मरीजों की जान पर आफत भी आ जाता है। एसीआइ विभाग में हमारी मेहनत अब साकार हो रही है। लोगों का भरोसा हृदय रोग विभाग पर बढ़ा है। नतीजा यह हो रहा है कि राज्य के 90 प्रतिशत हृदय रोगियों का इलाज आंबेडकर अस्पताल में हो रहा है।

2. जिम्मेदारियों कभी नहीं हट पाया पीछे

एसीआइ विभाग में कार्डियोलाजिस्ट डा. स्मित श्रीवास्तव ने बताया कि उनके द्वारा हृदय रोग से जुड़े 10,000 से अधिक सर्जिकल प्रोसेस किए गए हैं। वर्ष 2013 से 2020 तक अकेले ही विशेषज्ञ के रूप में कार्डियोलाजी विभाग की जिम्मेदारी संभाली। सेवा के लिए दिन-रात कभी नहीं देखा। हर समय मरीजों के लिए उपलब्ध रहने के लिए पारिवारिक जिम्मेदारियों को भी पीछे रखना पड़ा। भावुक प्रसंग साझा करते हुए उन्होंने बताया कि मां ने स्वर्गवास से पहले कहा था कि मेरे अंतिम संस्कार करने के बाद जल्दी अस्पताल चले जाना। और तीसरे दिन ही अस्पताल ज्वाइन कर मरीजों की सेवा में जुट गया।

3. हृदय रोगियों की सेवा देता है सुकून

श्री सत्य साईं संजीवनी अस्पताल में कार्डियोलाजी विभाग के अध्यक्ष डा. अतुल प्रभु ने बताया कि 10 वर्षों से अधिक के अनुभव में अब तक 4000 हृदयरोगी बच्चों की सर्जरी कर चुके हैं। हर समय मरीजों की सेवा के लिए मौजूद रहना पड़ता है। 12 घंटे की ड्यूटी कर घर जाने के बाद रात में भर्ती हुए हृदय रोगी बच्चों के पास ही रहने का मन करता है। अधिकांश समय स्थिति यह बनती है कि रात में भी इमरजेंसी के समय आना पड़ता है। कठोर परिश्रम के बाद स्वस्थ होने के बाद बच्चों के चेहरे की मुस्कान शांति देती है।

एडवांस कार्डियक इंस्टिट्यूट में सुविधा व इलाज पर एक नजर

44 कुल बिस्तरों की संख्या

22 आइसीयू बिस्तर के

15 बिस्तरों का सामान्य वार्ड की सुविधा जल्द

150 से अधिक की ओपीडी हर रोज

Posted By: Ashish Kumar Gupta

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