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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Feb 13, 2023 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

World Radio Day 2023: लोग आज भी रेडियो के दीवाने, लेते हैं ज्ञान, सुनते हैं गाने

World Radio Day 2023: रेडियो की दीवानगी आज भी लोगों के सिर चढ़कर बोलती है। अपने पसंदीदा कार्यक्रम के लिए घंटों इंतजार करते हैं।

By Ashish Kumar GuptaEdited By: Ashish Kumar Gupta
Publish Date: Mon, 13 Feb 2023 09:05:53 AM (IST)Updated Date: Mon, 13 Feb 2023 09:05:53 AM (IST)
World Radio Day 2023: लोग आज भी रेडियो के दीवाने, लेते हैं ज्ञान, सुनते हैं गाने

रायपुर। World Radio Day 2023: आधुनिकता के दौर में भी आज रेडियो ज्ञान, मनोरंजन और संचार का प्रमुख केंद्र है। रेडियो की दीवानगी आज भी लोगों के सिर चढ़कर बोलती है। खासकर ग्रामीण अंचलों में जहां बिजली की समस्या होती है, वहां लोग रेडियो से मनोरंजन और ज्ञानार्जन करते हैं। अपने पसंदीदा कार्यक्रम के लिए घंटों इंतजार करना, अगला गाना क्या होगा, मेरे पत्र का जवाब मिलेगा कि नहीं और देश-दुनिया में क्या चल रहा है, इसके लिए रेडियो श्रोता काफी उत्साहित रहते हैं। कुछ ऐसे श्रोताओं ने रेडियो के प्रति अपनी यादें बताईं।

छबि लाल सोनी ने बताया कि जब रेडियो पर भारत-चीन युद्ध की खबर सुनी तो पूरे गांव में सन्नाटा फैल गया था। ओडिशा से एक कार्यक्रम में शामिल होने रायपुर पहुंचे गोविंद चंद्र श्राफ की रेडियो के प्रति दीवानगी ऐसी है कि जब उनका रेडियो खराब हो गया था तो वे टेलीविजन से आकाशवाणी का प्रसारण सुनते थे।


बारह साल की उम्र में पहली बार

रेडियो श्रोता छबि लाल सोनी ने बताया कि जब वे बारह साल के थे, तब उन्होंने पहली बार रेडियो सुना था। बात वर्ष 1972 की है। उस समय रेडियों पर चौपाल, विविध भारती, खेती-किसानी और उपवन नाम के कार्यक्रम आकाशवाणी पर प्रसारित होते थे। वे बताते हैं कि गांव में मुश्किल से चार-पांच लोगों के पास रेडियो होते थे। गांव के लोग उसी से प्रसारण सुना करते थे। मोहम्मद रफी और किशोर कुमार के गाने सुनने के लिए लोग बेताब रहते थे। जैसे ही गाना रेडियो पर बजता था, सभी झूम उठते थे। छबि लाल ने बताया कि वे वर्तमान में दो तीन घंटे रेडियो पर कार्यक्रम सुनते हैं।

ओडिशा से रेडियो कार्यक्रम में पहुंचे गोविंद

विश्व रेडियो दिवस पर रविवार को रायपुर के वृंदावन हाल में रेडियो श्रोताओं के लिए विशेष आयोजन किया गया, जिसमें प्रदेशभर से रेडियो श्रोता पहुंचे। आयोजन में ओडिशा के संबलपुर से गोविद चंद श्राफ पहुंचे। उन्होंने बताया कि वे किसी काम से रायपुर आए थे। उन्हें इंटरनेट मीडिया के माध्यम से पता चला कि यहां पर रेडियो श्रोताओं के लिए कार्यकम हो रहा है। वे तुरंत वहां पहुंच गए और अपना अनुभव साझा किया।

रेडियो से जुड़ी यादें को ताजा करते हुए उन्होंने बताया कि भारत की तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की मौत की खबर उन्होंने रेडियो से सुनी और उनको काफी ठेस पहुंची। पहले वे काफी रेडियो सुना करते थे, लेकिन अभी काम ज्यादा होने के कारण एक से दो घंटे ही रेडियो सुन पाते हैं।

बच्चों से लेकर महिलाओं और किसानों के लिए प्रसारित होते हैं विविध कार्यक्रम

छत्तीसगढ़ में आकाशवाणी की स्थापना दो अक्टूबर वर्ष 1963 को हुई। वर्तमान में तीन प्राथमिक और दो स्थानीय आकाशवाणी मिलाकर कुल पांच रेडियो स्टेशन है। इसके साथ एक रिले सेंटर सरायपाली में स्थित है। इसके साथ प्रदेश के विभिन्ना शहरों में निजी एफएम चैनल स्थापित हैं।

आकाशवाणी केंद्र रायपुर के सहायक निर्देशक कार्यक्रम लखन लााल भौर्य ने बताया कि आकाशवाणी केंद्र से श्रोताओं की मांग को देखते हुुए विभिन्ना प्रकार के कार्यक्रम प्रसारित किए जाते हैं, जिसमें महिला, किसान, युवा और बच्चों के लिए अलग-अलग कार्यक्रम हैं। युवाओं के लिए युववाणी है, जिसका प्रसारण हिंदी के साथ आंचलिक भाषा छत्तीसगढ़ी में भी किया जाता है।

युववाणी की खास बात यह है कि इसमें सिर्फ युवा वक्ता ही अपने विचार प्रस्तुत करते हैं। बच्चों के लिए बालवाटिका और किसलय, किसानों के लिए किसानवाणी और चौपाल का प्रसारण किया जाता है। लखन लाल ने बताया कि बताया कि सबसे ज्यादा लोकप्रिय कार्यक्रम फोन-इन, ई-मेल और चिठ्ठी-पत्री है।

मनपसंदीदा गानों को सुनने के लिए लोग काफी उत्साहित रहते हैं। आकाशवाणी केंद्र रायपुर से सुबह छह बजे से कार्यक्रम का प्रसारण चालू हो जाता है, जो दोपहर तीन बजे तक चलता है। इसके बाद शाम पांच बजे से रात 11 बजे तक विभिन्ना कार्यक्रमों का प्रसारण किया जाता है।

कब से हुई शुरुआत

विश्व रेडियो दिवस की शुरुआत वर्ष 2011 में की गई थी। वर्ष 2010 में स्पेन रेडियो अकादमी ने 13 फरवरी को विश्व रेडियो दिवस मनाने के लिए पहली बार प्रस्ताव दिया था। इसके बाद वर्ष 2011 में यूनेस्को के सदस्य देशों ने इस प्रस्ताव को स्वीकारा और 13 फरवरी को विश्व रेडियो दिवस मनाने की घोषणा की गई। बाद में वर्ष 2012 में संयुक्त राष्ट्र महासभा ने फैसले का स्वागत किया। फिर उसी साल 13 फरवरी को पहली बार यूनेस्को ने विश्व रेडियो दिवस मनाया।