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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Nov 18, 2024 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

बड़े भाई और बहन के पैरों के तले खिसक गई जमीन जब सामने आई छोटे भाई की ये करतूत, अब पुलिस ने किया FIR

रायपुर के धरसींवा में एक छोटे भाई ने अपने बड़े भाई और बहन की हिस्से की जमीन फर्जी दस्तावेजों के आधार पर बेच दी। स्वर्गीय नान्हू राम अग्रवाल की 0.3640 ...और पढ़ें

By Ashish Kumar GuptaEdited By: Ashish Kumar Gupta
Publish Date: Mon, 18 Nov 2024 10:35:20 AM (IST)Updated Date: Mon, 18 Nov 2024 12:29:31 PM (IST)
बड़े भाई और बहन के पैरों के तले खिसक गई जमीन जब सामने आई छोटे भाई की ये करतूत, अब पुलिस ने किया FIR
फर्जीवाड़े से भाई-बहन को लगाया चूना

HighLights

  1. छोटे भाई ने फर्जी दस्तावेजों के जरिए बड़े भाई और बहन की जमीन बेची।
  2. आरोपी गोवर्धन ने खुद को एकमात्र वारिस बताकर जमीन अपने नाम कराई।
  3. जमीन खमतराई के महेन्द्र को बेच दी, पुलिस ने दर्ज की धोखाधड़ी का केस।

नईदुनिया प्रतिनिधि, रायपुर। राजधानी रायपुर जिले के धरसींवा में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसमें छोटे भाई ने अपने बड़े भाई और बहन के हिस्से की जमीन को फर्जी दस्तावेजों के आधार पर बेच दिया। इस मामले में धरसींवा पुलिस ने आरोपी छोटे भाई के खिलाफ दो साल बाद एफआईआर दर्ज की है।

ये है पूरा मामला

स्वर्गीय नान्हू राम अग्रवाल सूरजपुर जिले के भैयाथान गांव के निवासी थे और उनकी धरसींवा में 0.3640 हेक्टेयर (लगभग 0.9 एकड़) भूमि थी। नान्हू राम अग्रवाल के निधन के बाद उनका छोटा बेटा गोवर्धन दास अग्रवाल ने तहसील कार्यालय में खुद को उनके एकमात्र वारिस के रूप में पेश किया और यह दावा किया कि नान्हू राम अग्रवाल के अलावा उनका कोई और वारिस नहीं है। इसके बाद उसने अपनी इस जमीन को अपने नाम करवा लिया और उसे खमतराई निवासी महेन्द्र कुमार गुप्ता को बेच दिया।naidunia_image


तहसील में फर्जी दस्तावेज पेश

पुलिस जांच के दौरान यह सामने आया कि गोवर्धन दास अग्रवाल ने धरसींवा तहसील में अपने पिता के नाम पर फर्जी दस्तावेज पेश किए, जिनमें उसने यह साबित करने की कोशिश की कि वह नान्हू राम अग्रवाल का एकमात्र वारिस है। नान्हू राम अग्रवाल के निधन के बाद, गोवर्धन ने यह दावा किया कि उसके पिता का कोई और वारिस नहीं है और इसी आधार पर उसने सरकारी अभिलेखों में खुद को एकमात्र वारिस के रूप में दर्ज करवा लिया।

दस्तावेजों में खुलासा

पुलिस को जब शिकायत मिली तो तहसील रायपुर से दस्तावेजों का प्रतिवेदन लिया गया। इन दस्तावेजों में यह तथ्य सामने आया कि नान्हू राम अग्रवाल की संपत्ति धरसींवा के ग्राम देवरी में दो हिस्सों में बंटी हुई थी, जिसमें एक हिस्सा 0.3310 हेक्टेयर और दूसरा 0.0330 हेक्टेयर था। नान्हू राम के दो बेटे - अशोक कुमार अग्रवाल और गोवर्धन दास अग्रवाल, तथा एक बेटी रेखा अग्रवाल थी।

गोवर्धन दास ने धोखाधड़ी करते हुए फर्जी दस्‍तावेज पेश किया कि नान्हू राम अग्रवाल के अलावा अन्य कोई वारिस नहीं है, जबकि यह तथ्य पूरी तरह से गलत था। इस प्रक्रिया में उसने फर्जी दस्तावेज तैयार किए और सरकारी अभिलेखों में भी बदलाव किया, जिसके बाद 22 मार्च 2022 को तहसीलदार ने उक्त भूमि को उसके नाम पर दर्ज कर दिया।naidunia_image

धोखाधड़ी का खुलासा

जांच में यह भी पाया गया कि गोवर्धन दास अग्रवाल ने अपनी धोखाधड़ी को छुपाने के लिए कई गलत दस्तावेज प्रस्तुत किए और अन्य वारिसों को उनके हिस्से की भूमि से वंचित कर दिया। जब इस धोखाधड़ी की जानकारी पुलिस को मिली, तो पुलिस ने मामले की गहन जांच शुरू की और गोवर्धन दास अग्रवाल के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया।

पुलिस कार्रवाई

पुलिस ने आरोपी गोवर्धन दास अग्रवाल पर भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 420 (धोखाधड़ी) के तहत एफआईआर दर्ज की है। अब पुलिस आरोपी की गिरफ्तारी के लिए प्रयासरत है और मामले की आगे की जांच की जा रही है।