
रायपुर। Acharya Vidyasagar Maharaj: छत्तीसगढ़ के डोंगरगढ़ स्थित चंद्रगिरी तीर्थ स्थल में दिगंबर मुनि परंपरा के आचार्य विद्यासागर महाराज ने शनिवार रात 2:35 बजे देह त्याग दी। रविवार दोपहर दो बजे उन्हें समाधि दे दी गई। इसमें मध्यप्रदेश, ओडिशा, महाराष्ट्र सहित कई राज्यों के जैन संत व अनुयायी शामिल हुए। महाराज ने तीर्थ में छह फरवरी को आचार्य पद त्यागने के साथ समय सागर महाराज को आचार्य पद देने की घोषणा कर दी थी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पिछले वर्ष पांच नवंबर को विद्यासागर महाराज का आशीर्वाद लिया था। छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश में आधे दिन का राजकीय शोक घोषित किया गया। साथ ही सभी सांस्कृतिक कार्यक्रम रद्द कर दिए गए।
विद्यासागर महाराज का जन्म 10 अक्टूबर, 1946 में कर्नाटक के बेलगांव जिले के सलगा ग्राम में हुआ था। वह लंबे समय से डोंगरगढ़ स्थित चंद्रगिरी तीर्थ में विराजमान थे। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के साथ छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, मध्यप्रदेश के सीएम डा मोहन यादव सहित कई राजनेताओं ने उन्हें श्रद्धांजलि दी है। जनवरी के पहले सप्ताह से ही उनके स्वास्थ्य में लगातार गिरावट आ रही थी। इसके बाद उनके अनुयायी लगातार दर्शन के लिए पहुंच रहे थे, लेकिन भीड़ अधिक होने के कारण दर्शन नहीं करने दे रहे थे। स्वास्थ्य खराब होने के बाद भी वह दवाई नहीं ले रहे थे। उन्होंने आजीवन अंग्रेजी दवाई, चीनी, नमक, दही, हरी सब्जी आदि का त्याग किया था। आचार्य विद्यासागर ने देशभर के 505 मुनियों को दीक्षा दी थी।
आचार्य विद्यासागर को 30 जून, 1968 में अजमेर में 22 वर्ष की आयु में आचार्य ज्ञानसागर ने दीक्षा दी। उन्हें 22 नवंबर 1972 में ज्ञानसागर जी द्वारा आचार्य पद दिया गया था। आचार्य विद्यासागर के बड़े भाई को छोड़कर घर के सभी लोग संन्यास ले चुके है। उनके भाई योगसागर और समयसागर ने भी दीक्षा ले ली है। आचार्य विद्यासागर के शिष्य मुनि क्षमासागर ने उन पर आत्मान्वेषी नामक जीवनी लिखी है। इस पुस्तक का अंग्रेजी अनुवाद भारतीय ज्ञानपीठ द्वारा प्रकाशित हो चुका है। मुनि प्रणम्यसागर ने उनके जीवन पर अनासक्त महायोगी नामक काव्य की रचना की है।
प्रधानमंत्री मोदी ने दी श्रद्धांजलि
मोदी ने आचार्य विद्यासागर को नमन किया। उन्होंने एक्स पर लिखा कि वह जीवनपर्यंत गरीबी उन्मूलन के साथ-साथ समाज में स्वास्थ्य और शिक्षा को बढ़ावा देने में जुटे रहे। यह मेरा सौभाग्य है कि मुझे निरंतर उनका आशीर्वाद मिलता रहा। पिछले वर्ष चंद्रगिरी में उनसे हुई भेंट मेरे लिए अविस्मरणीय रहेगी।
आचार्य श्री 108 विद्यासागर जी महाराज जी का ब्रह्मलीन होना देश के लिए एक अपूरणीय क्षति है। लोगों में आध्यात्मिक जागृति के लिए उनके बहुमूल्य प्रयास सदैव स्मरण किए जाएंगे। वे जीवनपर्यंत गरीबी उन्मूलन के साथ-साथ समाज में स्वास्थ्य और शिक्षा को बढ़ावा देने में जुटे रहे। यह मेरा… pic.twitter.com/mvJJPbiiwM
— Narendra Modi (@narendramodi) February 18, 2024
#WATCH | Chhattisgarh: Last rites of Acharya Shri 108 Vidhyasagar Ji Maharaj performed in Rajnandgaon pic.twitter.com/aYCLJt01TY
— ANI MP/CG/Rajasthan (@ANI_MP_CG_RJ) February 18, 2024