
नईदुनिया प्रतिनिधि, राजनांदगांव। छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले में आगामी गणेशोत्सव को पूरी तरह पर्यावरण अनुकूल और सुरक्षित बनाने के लिए नगर निगम प्रशासन ने कमर कस ली है। शहर में मूर्तियों के निर्माण कार्यों की निगरानी और गुणवत्ता की जांच के लिए औचक निरीक्षण तेज कर दिए गए हैं।
नगर निगम आयुक्त जीआर मरकाम ने विभिन्न प्रतिमा निर्माण स्थलों का व्यक्तिगत रूप से दौरा किया और वहां चल रहे कार्यों का जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने सभी मूर्तिकारों को कड़े शब्दों में हिदायत दी कि भगवान गणेश की प्रतिमाओं के निर्माण में केवल प्राकृतिक और काली या कछारी मिट्टी का ही उपयोग किया जाए।
निरीक्षण के दौरान आयुक्त ने स्पष्ट किया कि प्लास्टर ऑफ पेरिस (POP) से बनी किसी भी प्रकार की मूर्ति का निर्माण, भंडारण या विक्रय करना पूरी तरह से प्रतिबंधित है। निगम के स्वास्थ्य और नजूल अमले को निर्देशित किया गया है कि वे शहर के हर कोने में मूर्ति निर्माण स्थलों पर लगातार कड़ी नजर रखें। यदि कोई भी मूर्तिकार नियमों का उल्लंघन करते हुए पीओपी की मूर्तियां बनाता या बेचता पाया जाता है, तो उसकी तुरंत जब्ती कर ली जाएगी और भारी दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
हालांकि, राहत की बात यह रही कि अधिकांश मूर्तिकारों ने अधिकारियों को भरोसा दिलाया है कि वे तालाबों की उपजाऊ मिट्टी और पैरा का उपयोग कर पूरी तरह से इको-फ्रेंडली प्रतिमाएं तैयार कर रहे हैं।