.webp)
नईदुनिया प्रतिनिधि, राजनांदगांव। आजादी के 75 वर्ष बाद जब ग्राम संबलपुर में पहली बार बिजली पहुंची, तो पूरा गांव उत्सव में डूब गया। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक की आंखों में खुशी साफ झलक रही थी। दशकों से अंधेरे में जीवन गुजार रहे ग्रामीणों के लिए यह पल किसी सपने के साकार होने जैसा था। गांव के 45 परिवार अब तक लालटेन और चिमनी के सहारे अपनी दिनचर्या चला रहे थे। घने जंगलों और पहाड़ियों के बीच बसे इस गांव के लोग वर्षों से शासन-प्रशासन की ओर टकटकी लगाए बैठे थे कि कब उनके घरों में भी बिजली की रोशनी पहुंचेगी। अंततः छत्तीसगढ़ शासन और जिला प्रशासन की पहल से यह सपना साकार हुआ।
जब गांवों में बिजली की आपूर्ति शुरू हुई, तो ग्रामीणों ने खुशी में पटाखे फोड़े और मिठाइयां बांटी। गांव में पहली बार घरों में पंखे, बल्ब और अन्य विद्युत उपकरण चलते देख लोगों की आंखें भर आईं। वर्षों से अंधेरे में जीवन बिताने वाले ग्रामीणों के लिए यह दिन ऐतिहासिक बन गया। मुख्यमंत्री मजराटोला विद्युतीकरण योजना ने संबलपुर ही नहीं, बल्कि मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी जिले के 16 सुदूर वनग्रामों की तस्वीर बदल दी। कातुलझोरा, कट्टापार, बोदरा, बुकमरका, संबलपुर, मुंदेली, गट्टेगहन, पुगदा, आमापायली, पीटेमेटा, टाटेकसा, कुंडकाल, रायमन्होरा, नैनगुड़ा, मेटातोड़के, घोटियाकन्हार, एडसमेटा और कुंजकन्हार जैसे गांव, जहां आजादी के बाद से अब तक बिजली नहीं पहुंच पाई थी, अब रोशनी से जगमगा उठे हैं।
इन गांवों के विद्युतीकरण के लिए छह करोड़ 80 लाख रुपये की राशि स्वीकृत की गई। कार्य के तहत 89 किलोमीटर 11 केवी लाइन, 22 किलोमीटर निम्नदाब लाइन, 95 विद्युत पोल और 25 वितरण ट्रांसफार्मर स्थापित किए गए। विषम भौगोलिक परिस्थितियों और सघन वनों के बीच विद्युत कर्मियों ने चुनौतीपूर्ण हालात में काम पूरा किया।
बिजली से रोशन हुए आदिवासी बहुल ग्राम संबलपुर में तीसरी कक्षा के छात्र तमेश्वर की खुशी देखते ही बनती थी। उसने बताया कि अब वह रात में भी पढ़ाई कर सकेगा और बड़ा अफसर बनने का सपना पूरा करना चाहता है। बिजली आने से गांव के बच्चों को पढ़ाई, मनोरंजन और दुनिया से जुड़ने के नए अवसर मिल रहे हैं। गांव के मेहरूराम हिड़ामी ने बताया कि दूसरे गांवों में बिजली देखकर हमेशा मन में टीस रहती थी कि उनका गांव कब रोशन होगा। जिस दिन बिजली आई, उस दिन पूरे गांव में दीवाली जैसा माहौल रहा।