
नईदुनिया प्रतिनिधि, राजनांदगांव : समर्थन मूल्य पर धान खरीदी शुरू होने से पहले प्रशासन ने तैयारियां तेज कर दी हैं। कलेक्टर जितेंद्र यादव ने अधिकारियों को अगले सात दिन में सभी आवश्यक व्यवस्थाएं पूरी करने के निर्देश दिए हैं। खरीदी प्रक्रिया में बिचौलियों की दखलंदाजी और अवैध धान की आवक रोकने के लिए महाराष्ट्र सीमा से लगे क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाई जाएगी। यहां एआइ आधारित कैमरे लगाए जाएंगे। वहीं, कोचियों और बिचौलियों के विरुद्ध कार्रवाई के लिए उड़नदस्ता दल सक्रिय रहेंगे।
धान खरीदी की प्रक्रिया पारदर्शी और व्यवस्थित बनाने के लिए मंगलवार को जिला स्तरीय प्रशिक्षण भी आयोजित किया गया। इसमें खरीदी कार्य से जुड़े अधिकारियों और कर्मचारियों को शासन की उपार्जन नीति, किसान पंजीयन, रकबे का सत्यापन, आधार प्रमाणीकरण, टोकन व्यवस्था, धान की गुणवत्ता, तौल, बारदाना, भंडारण और भुगतान प्रक्रिया की जानकारी दी गई। निगरानी के लिए व्हीकल ट्रैकिंग सिस्टम (वीटीएस), कमांड एंड कंट्रोल सेंटर और उड़नदस्ता दल की भूमिका भी समझाई गई।
कलेक्टर ने सभी एसडीएम, तहसीलदार और जनपद पंचायत सीईओ को आपसी समन्वय से तैयारियों की नियमित निगरानी करने कहा है। विशेष ग्राम सभाओं में किसानों के दस्तावेजों और रकबे का सत्यापन किया जाएगा। पिछले वर्ष धान विक्रय के दौरान परेशानी झेल चुके किसानों से संपर्क कर उनकी समस्याओं का पहले ही निराकरण करने के निर्देश दिए गए हैं।
अवैध धान परिवहन रोकने के लिए सीमावर्ती क्षेत्रों में विशेष निगरानी के साथ राइस मिलों का सघन निरीक्षण किया जाएगा। धर्मकांटों में तौल की शुद्धता जांची जाएगी। दूसरे किसानों के पंजीयन पर धान बेचने और अवैध रूप से धान खपाने के प्रयासों पर कार्रवाई होगी। कलेक्टर ने डिजिटल क्राप सर्वे में लगे सर्वेयरों की लंबित राशि का शीघ्र भुगतान करने के निर्देश भी दिए हैं।
खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 में धान खरीदी 15 नवंबर से 15 जनवरी तक होगी। सामान्य धान का समर्थन मूल्य 2,441 रुपये और ग्रेड-ए का 2,461 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित है। खरीदी केन्द्रों में बारदाना, इलेक्ट्रानिक तौल उपकरण, कंप्यूटर, इंटरनेट और पेयजल, छाया व बैठने जैसी सुविधाएं सुनिश्चित करने कहा गया है। किसानों को भुगतान सीधे बैंक खातों में किया जाएगा। कलेक्टर ने किसानों से पंजीयन, रकबे और बैंक खाते की जानकारी जांचने तथा साफ और सूखा धान खरीदी केन्द्रों में लाने की अपील की है। साथ ही रबी मौसम में धान के बजाय कम पानी वाली वैकल्पिक फसलें अपनाने के लिए प्रोत्साहित करने कहा है।