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पद्मश्री फुलबासन यादव के अपहरण की कोशिश नाकाम, सीट बेल्ट के एक चालान ने बचाई जान

पद्मश्री फूलबासन बाई यादव का मंगलवार को अपहरण हो गया। हालांकि, पुलिस की सजगता से प्रयास पूरी तरह विफल रहा। पुलिस ने इस प्रकरण में दो महिलाओं सहित तीन लोगों को हिरासत में लिया है।

By Digital DeskEdited By: ADITYA KUMAR
Publish Date: Tue, 05 May 2026 03:13:22 PM (IST)Updated Date: Tue, 05 May 2026 10:41:01 PM (IST)
पद्मश्री फुलबासन यादव के अपहरण की कोशिश नाकाम, सीट बेल्ट के एक चालान ने बचाई जान
पद्मश्री फुलवासन बाई यादव का अपहरण

नईदुनिया प्रतिनिधि, राजनांदगांव। मंगलवार को पद्मश्री से सम्मानित प्रसिद्ध समाजसेवी फुलबासन यादव के अपहरण की कोशिश की गई। हालांकि पुलिस की सतर्कता ने इस बड़ी साजिश को विफल कर दिया। शहर की चिखली पुलिस चौकी के पास यातायात पुलिस द्वारा सीट बेल्ट न पहनने पर काटे गए एक मामूली चालान ने आरोपितों के चंगुल से फुलबासन यादव को बचा लिया है। पुलिस ने इस मामले में मुख्य आरोपित खुशबू साहू सहित चार लोगों को गिरफ्तार कर लिया है।

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सीट बेल्ट के चालान ने खोला राज

अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक कीर्तन राठौर के अनुसार मंगलवार सुबह 10:30 बजे खुशबू साहू अपने तीन साथियों के साथ राजनांदगांव विकासखंड के ग्राम सुकुलदैहान स्थित फुलबासन यादव के घर पहुंची। उसने उन्हें दिव्यांग महिला के साथ फोटो खिंचवाने का झांसा देकर अपनी स्कॉर्पियो वाहन में बिठाया और फुलबासन के हाथ-पैर बांध दिए। जब फुलबासन ने विरोध किया तो उन्हें धमकाया और उनका मुंह बंद कर गाड़ी से आगे बढ़ गए। जब वे खैरागढ़ के रास्ते से भागने की कोशिश कर रहे थे, तभी चिखली पुलिस चौकी के पास यातायात निरीक्षक नवरतन कश्यप अपने जवानों के साथ वाहनों की जांच कर रहे थे। उन्होंने स्कॉर्पियो चालक को रुकवाया और सीट बेल्ट न पहनने पर चालान बनाया। चालक ने पैसे देने के लिए जब स्कॉर्पियो का पिछला दरवाजा खोला, तब फुलबासन ने खुशबू के पैर में लात मारकर मदद के लिए चीखना शुरू कर दिया। पुलिस को भ्रमित करने के लिए खुशबू ने उन्हें मिर्गी का मरीज बताया, लेकिन पुलिस को संदेह हो गया। उन्हें नीचे उतारने पर पूरे मामले का पर्दाफाश हो गया। इसके बाद आरोपितों को चिखली पुलिस चौकी के सुपुर्द किया गया।


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अपहर्ताओं के चंगुल से छूटने के बाद पद्मश्री फुलबासन यादव से मिलने महापौर मधुसूदन यादव उनके गृह ग्राम सुकुल दैहान पहुंचे। इस दौरान फुलबासन के आंसू छलक पड़े। महापौर ने ढांढस बंधाते हुए उन्हें हिम्मत दी।

अपनी पहचान बनाने के लिए अपहरण की साजिश

पुलिस अधिकारियों ने बताया कि आरोपितों से लगातार पूछताछ जारी है। फुलबासन यादव ने यातायात पुलिस का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि समाजसेवा से मिले पुण्य के कारण ही वह आज सुरक्षित हैं। पूछताछ में यह भी सामने आया है कि खुशबू साहू, स्व-सहायता समूह की महिलाओं के बीच अपनी पहचान बनाने के लिए फुलबासन के माध्यम से स्वयं की ब्रांडिंग करना चाहती थी। फुलबासन के नाम पर रायपुर में कई महिलाओं से उगाही की गई थी, जिसकी भनक लगने पर फुलबासन ने उसे महत्व नहीं दिया था। मंगलवार को खुशबू ने बेमेतरा क्षेत्र में महिलाओं का एक कार्यक्रम रखा था, जिसमें वह फुलबासन को शामिल कराना चाह रही थी। हालांकि पुलिस अभी अंतिम निष्कर्ष पर नहीं पहुंची है।

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मुट्ठी भर अनाज से पद्मश्री तक का सफर

फुलबासन का जन्म 1969 में राजनांदगांव जिले के सुकुलदैहान गांव में हुआ। मात्र 10 साल की उम्र में उनका बाल विवाह कर दिया गया। ससुराल में भी संघर्ष कम नहीं था, घर चलाने के लिए उन्होंने मजदूरी की और गांव के मवेशी चराए। कई रातें ऐसी भी आईं जब परिवार को भूखे पेट सोना पड़ा। लेकिन इन अभावों ने उनके भीतर समाज को बदलने की एक चिंगारी पैदा कर दी। वर्ष 2001 में छोटे-छोटे स्व-सहायता समूह बनाकर महिलाओं को अल्प बचत से जोड़ा। हर घर से रोज एक मुट्ठी चावल और हफ्ते में दो रुपये बचाकर उन्होंने कोष जमा करना शुरू किया। वर्तमान में इनके पास लगभग दो लाख महिलाओं का समूह है जो नारी समाजसेवा और सशक्तीकरण के साथ जल-पर्यावरण संरक्षण, जैविक खेती आदि कार्यों में जुटा हुआ है।

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सम्मान और सामाजिक योगदान

पद्मश्री के साथ फुलबासन को कई विशिष्ट सम्मान मिल चुके हैं। इनमें यूनियन बैंक ऑफ इंडिया-2013, सूर्यदाता पुरस्कार 2013 – सूर्यदाता संस्थान, पुणे, इंडियन प्राउड अवार्ड 2013, एसआर जिंदल पुरस्कार 2012, पद्म श्री पुरस्कार 2012, राष्ट्रीय एकता सम्मान 2012 सहित दर्जनों विशिष्ट पुरस्कार शामिल हैं। विगत कई वर्षों से इनके नेतृत्व में जल संरक्षण को लेकर वृहद अभियान चलाया जा रहा है। इसके तहत अविभाजित राजनांदगांव जिले के 1200 से अधिक गांवों में 20 हजार से अधिक सोख्ता गड्ढों का निर्माण जनसहयोग से कराया गया है। इन दिनों वे मिलेट मिशन और जिमीकंद जैसी पारंपरिक खेती से महिलाओं को जोड़कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के अभियान में जुटी हुईं हैं।

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