
नईदुनिया प्रतिनिधि, राजनांदगांव। देश के प्रमुख धार्मिक स्थलों में चढ़ावे की पारदर्शिता को लेकर बढ़ी चर्चा के बीच डोंगरगढ़ स्थित मां बम्लेश्वरी देवी मंदिर में दान राशि के प्रबंधन की व्यवस्था पूरी तरह निर्धारित प्रक्रिया के तहत संचालित की जाती है।
वर्ष 1964 से मंदिर का संचालन कर रहे मां बम्लेश्वरी देवी मंदिर ट्रस्ट के अनुसार मंदिर में हर वर्ष लगभग 17.50 करोड़ रुपये का चढ़ावा आता है। इसमें सबसे अधिक दान चैत्र और क्वांर नवरात्र के दौरान प्राप्त होता है। दोनों नवरात्र में औसतन ढाई-ढाई करोड़ रुपये की राशि श्रद्धालु चढ़ाते हैं।
दान पेटी से बैंक तक तय प्रक्रिया का पालन
पहाड़ स्थित मुख्य मंदिर के अलावा तलहटी में स्थित छोटी मां बम्लेश्वरी देवी, मां शीतला मंदिर और पहाड़ पर स्थित अन्य मंदिर भी ट्रस्ट के अधीन हैं। ट्रस्ट में 27 पुजारियों सहित लगभग 350 कर्मचारी कार्यरत हैं। मंदिर की आय का बड़ा स्रोत दुकानों का किराया, विज्ञापन और रोपवे भी है।
ट्रस्ट के अनुसार दान पेटियां निर्धारित अंतराल पर खोली जाती हैं। ट्रस्टियों की मौजूदगी में पेटियों से निकली राशि सीलबंद पेटियों में रखकर सीधे स्ट्रांग रूम पहुंचाई जाती है। दान पेटी खुलने के अधिकतम आठ दिनों के भीतर ट्रस्ट कर्मचारियों और चयनित सदस्यों की टीम ट्रस्टियों की उपस्थिति में राशि की गिनती करती है। पूरी प्रक्रिया स्ट्रांग रूम में सीसीटीवी कैमरों की निगरानी में होती है, जिससे हर चरण का रिकॉर्ड सुरक्षित रहता है।
गिनती पूरी होते ही बैंक में जमा होती है राशि
ट्रस्ट अध्यक्ष मनोज अग्रवाल ने बताया कि गणना पूरी होने के तुरंत बाद पूरी राशि बैंक में जमा करा दी जाती है। गिनती के लिए ट्रस्ट कर्मचारियों के साथ चयनित सदस्यों की टीम बनाई जाती है, जबकि ट्रस्टी पूरी प्रक्रिया की निगरानी करते हैं।
आभूषण सुरक्षित लॉकर में रखे जाते हैं
मंदिर में नकद दान के साथ बड़ी संख्या में श्रद्धालु सोने-चांदी के आभूषण भी अर्पित करते हैं। ट्रस्ट के अनुसार प्रत्येक आभूषण की पहले रसीद बनाई जाती है। इसके बाद उन्हें सुरक्षित लॉकर में रखा जाता है। प्रमुख पर्वों और विशेष अवसरों पर माता के श्रृंगार के लिए इन्हें बाहर निकाला जाता है और उपयोग के बाद दोबारा सुरक्षित रख दिया जाता है।
बयान
मां बम्लेश्वरी देवी मंदिर विश्वविख्यात है, जिससे लाखों श्रद्धालुओं की आस्था जुड़ी हुई है। हमारी जिम्मेदारी उनके विश्वास और पारदर्शिता दोनों को बनाए रखने की है। ट्रस्ट चढ़ावे और दान की पाई-पाई का हिसाब रखता है और उसका उपयोग मंदिर के पुनर्विकास एवं माता की सेवा में किया जाता है।
- मनोज अग्रवाल, अध्यक्ष, मां बम्लेश्वरी देवी मंदिर ट्रस्ट
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