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छत्तीसगढ़ में जमीन का नक्शा सुधारने का आवेदन पड़ा भारी, मोहला-मानपुर में परिवार का हुक्का-पानी बंद

मोहला मानपुर अंबागढ़ चौकी जिले के गोर्राटोला में जमीन का नक्शा दुरुस्त कराने का आवेदन देना एक परिवार के लिए भारी पड़ गया। गांव की कथित पंचायत ने परिवा...और पढ़ें

By Digital DeskEdited By: Paritosh Dubey
Publish Date: Sun, 27 Sep 2026 07:55:31 PM (IST)Updated Date: Sun, 27 Sep 2026 07:58:47 PM (IST)
छत्तीसगढ़ में जमीन का नक्शा सुधारने का आवेदन पड़ा भारी, मोहला-मानपुर में परिवार का हुक्का-पानी बंद

HighLights

  1. जमीन का नक्शा सुधरवाने पर सामाजिक बहिष्कार
  2. बातचीत करने पर ग्रामीणों पर पांच हजार जुर्माना
  3. पीड़ित परिवार ने पुलिस में नामजद शिकायत सौंपी

नईदुनिया प्रतिनिधि, मोहला। अंबागढ़ चौकी विकासखंड के अंतर्गत आने वाले ग्राम गोर्राटोला में राजस्व संबंधी विवाद को लेकर अमानवीय मामला सामने आया है। यहां अपनी पुश्तैनी निजी जमीन का नक्शा सुधारने और सीमांकन कराने के लिए राजस्व विभाग में गुहार लगाना एक परिवार के लिए सामाजिक प्रताड़ना का सबब बन गया। गांव की कथित पंचायत ने पूरे परिवार का सामाजिक बहिष्कार करते हुए उनका हुक्का-पानी बंद करने का तुगलकी फरमान जारी कर दिया। इतना ही नहीं, गांव के किसी भी व्यक्ति द्वारा पीड़ित परिवार से मेलजोल रखने पर पांच हजार रुपये का जुर्माना लगाने का ऐलान किया गया है।

पीड़ित चंद्रप्रकाश कौशिक के अनुसार उनके नाम पर खसरा नंबर 369 में 0.061 हेक्टेयर (लगभग 15 डिसमिल) भूमि राजस्व अभिलेख में दर्ज है। हालांकि, सरकारी नक्शे में त्रुटि होने के कारण मौके पर उन्हें केवल आठ डिसमिल जमीन ही मिल पा रही है। इस विसंगति को दूर कराने के लिए जब उन्होंने तहसीलदार कार्यालय में नक्शा सुधार और सीमांकन का आवेदन दिया, तो गांव के कुछ प्रभावशाली लोग उनके विरोध में उतर आए। कथित पंचायत बैठाकर परिवार को समाज से बहिष्कृत कर दिया गया।


आजीविका और बच्चों पर मानसिक आघात

इस सामाजिक बहिष्कार का सीधा असर परिवार की आजीविका और मासूम बच्चों पर पड़ रहा है। चंद्रप्रकाश अपने घर के सामने मनिहारी, फोटोकॉपी और स्टेशनरी की दुकान संचालित करते हैं, जहां ग्रामीणों का आना पूरी तरह बंद करा दिया गया है। परिवार के सदस्य जो पारंपरिक गंवई नाई का काम करते थे, उनका काम भी छीन लिया गया है। गांव के लोग बाल कटवाने और धार्मिक संस्कारों के लिए बाहरी गांवों से सेवाएं ले रहे हैं। स्कूल और खेलकूद में पीड़ित परिवार के बच्चों से अन्य बच्चे बात तक नहीं कर रहे हैं।

हाईकोर्ट की शरण और पुलिस जांच

पीड़ित ने मामले में उच्च न्यायालय बिलासपुर में भी याचिका लगाई थी, जहां से अदालत ने 90 दिनों के भीतर नक्शा सुधार प्रक्रिया पूरी करने का निर्देश दिया था। दूसरी ओर ग्राम पंचायत ने उल्टे पीड़ित को ही सरकारी जमीन से बेदखली का नोटिस थमा दिया है। मामले में पीड़ित ने थाना प्रभारी को पांच नामजद व्यक्तियों के खिलाफ लिखित शिकायत देकर सुरक्षा और कार्रवाई की मांग की है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि सामाजिक बहिष्कार की शिकायत की जांच की जा रही है और साक्ष्य मिलने पर वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।