कुष्ठ अस्पताल की आड़ में मिशनरी संस्था का फर्जीवाड़ा, 22 एकड़ जमीन पर अवैध कब्जा; कलेक्टर ने छीनी लीज
राजनांदगांव में कुष्ठ रोग अस्पताल के नाम पर आवंटित 22.90 एकड़ जमीन पर अवैध कब्जे और कमाई का मामला सामने आया है। कलेक्टर ने लीज निरस्त कर जमीन शासन के नाम की है।
Publish Date: Sun, 08 Nov 2026 03:52:07 PM (IST)Updated Date: Sun, 08 Nov 2026 03:52:07 PM (IST)
कुष्ठ अस्पताल की आड़ में मिशनरी संस्था का फर्जीवाड़ा। (एआई जनरेटेड)HighLights
- अस्पताल की 22.90 एकड़ जमीन पर वर्षों से कब्जा।
- भवनों को किराए पर देकर हो रही थी अवैध वसूली।
- जमीन पर अवैध कृषि, उत्खनन और मछली पालन का खुलासा।
नईदुनिया प्रतिनिधि, राजनांदगांव। बसंतपुर स्थित मिशनरी बैंड्स आफ द वर्ल्ड कुष्ठ रोग अस्पताल के नाम पर आबंटित राजनांदगांव की रियासत का अरबों रुपये के का भूखंड अवैध कमाई का जरिया बना हुआ था। यही नहीं संस्था के नाम पर 22.90 एकड़ जमीन आबंटित है। इसमें से 39 एकड़ में मिशनरी संस्था ने कह्जा जमा रखा है।
इतना ही नहीं इसके अतिरिक्त 16 एकड़ शासकीय जमीन भी इनके ही कब्जे में है। बाइपास से लगे इस भूखंड को भी किसानों को रेघ पर देकर लाखों रुपये बटोरे जा रहे थे। कुल 25 एकड़ में कृषि किए जाने की जानकारी सामने आई है। यहां वर्तमान में भी फसल खड़ी है।
ये है पूरा मामला
- कुष्ठ रोगियों की सेवा, पुनर्वास और अस्पताल के नाम पर बनाए गए भवनों को सालों से किराए पर देकर वसूली की जा रही थी। यहां दर्जनभर परिवार अब भी निवासरत हैं जिनसे आठ हजार रुपये तक का किराया वसूला जा रहा था। यही नहीं मैदान को शादी व समारोह के लिए भी रकम लेकर उपलब्ध कराया जा रहा था। सारी रकम कौन वसूल करता है.. इस सवाल के जवाब में किराएदार किसी तिहारु व राजीव कुरियाकोस का नाम बताते हैं। जिनकी भूमिका इस पूरे मामले में अब तक स्पष्ट नहीं हो सकी है। बसंतपुरवासी इस प्रकरण में एफआइआर की मांग भी कर रहे हैं। यहां एक चर्च भी है, जिसमें हर रविवार काफी लोगों की भीड़ जुटती है।
- हैरानी की बात यह है कि वर्तमान में जिस लेप्रोसी हास्पिटल एंड क्लिनिक का यहां कब्जा बताया जाता है उसका कोई अधिकृत व्यक्ति तक नहीं है। यह क्लिनिक भी काफी पहले बंद हो चुका है। बता दें कि, इन्हीं गड़बडि़यों को लेकर छह नवंबर को कलेक्टर जितेंदर यादव ने 82 वर्ष पूर्व आबंटित भूखंड की लीज निरस्त कर इसे शासन के पक्ष में दर्ज करने का आदेश पारित किया है। इस भूखंड में कमाई का जरिया सिर्फ इमारतों के किराए तक सीमित नहीं रहा। यहां अवैध उत्खनन कर मुरुम का परिवहन किया जाता रहा। भूखंड में कई जगहों पर उत्खनन से छोटे तालाब बन गए हैं। इन तालाबों को भी मछली पालन के लिया ठेके पर दिया जा रहा था।
कलेक्टर ने शुरू करवाई जांच
- जून 2026 में इस भूखंड को मुक्त करवाने बसंतपुर वासियों ने धरना दिया। यहां से शुरू हुए मामले पर कलेक्टर जितेंद्र यादव ने कड़ा रूख अपनाया। उन्होंने प्रशासनिक समिति का गठन कर भूखंड की उपयोगिता और वर्तमान में कब्जे की स्थिति की जांच करवाई। जांच में चौकाने वाले मामले सामने आये। यहां आबंटित संस्था की बजाए दूसरे का कब्जा, किराएदारी, मछली पालन, पेड़ों की अवैध कटाई सामने आई।
- पांच महीनों के दौरान पूरी हुई जांच पर निर्णय लेते हुए कलेक्टर ने लीज आवंटन निरस्त कर दिया। यह राजनांदगांव जिले में लीज निरस्त करने की अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई है। कलेक्टर यादव ने जिले में अतिक्रमण, अवैध प्लाटिंग के मामलों पर भी सख्ती की है। मनगटा क्षेत्र में लगभग 1755 एकड़ में अवैध प्लाटिंग पर भी पूर्व में कार्रवाई हो चुकी है।
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