
विक्रम बाजपेयी, नईदुनिया, राजनांदगांव। कॉमनवेल्थ गेम्स में रजत पदक जीतकर देश का नाम रोशन करने वाली अंतरराष्ट्रीय वेटलिफ्टर ज्ञानेश्वरी यादव अब अपनी पूरी ऊर्जा लॉस एंजिलिस ओलिंपिक : 2028 पर केंद्रित कर रही हैं। उनका कहना है कि कॉमनवेल्थ का रजत उनके करियर का महत्वपूर्ण पड़ाव है, लेकिन अंतिम मंजिल नहीं। उन्होंने कहा कि हां, मैं पीरियड्स में थी लेकिन स्वर्ण पदक इसलिए नहीं चूका, प्रतिद्वंद्वी नाइजीरिया की ओनोमे ओमोलोला डिडीह ने कड़ी टक्कर दी और मैंने रजत पदक जीता।
अब अगला लक्ष्य ओलिंपिक में पदक जीतना है और इसकी तैयारी का पहला बड़ा इम्तिहान सितंबर 2026 में होने वाली एशियन चैंपियनशिप होगी।

अंतरराष्ट्रीय वेटलिफ्टर ज्ञानेश्वरी यादव ने ग्लासगो में चल रहे कॉमनवेल्थ गेम्स में 27 जुलाई को वेटलिफ्टिंग के 53 किग्रा वर्ग में कुल 199 किलोग्राम वजन उठाकर कई व्यक्तिगत रिकॉर्ड बनाए। ज्ञानेश्वरी ने बताया कि एनआईएस पटियाला में कॉमनवेल्थ की तैयारियों के दौरान उन्होंने कुल 195-196 किलो तक का वजन उठाया था। इस तौर पर देखें तो मैच के दौरान उन्होंने ट्रेनिंग से तीन किलो अधिक वजन उठाया, वो भी तब की स्थिति में जब वे माहवारी में थीं।
उन्होंने कहा कि मैंने पूरा प्रयास किया था लेकिन प्रतिद्वंद्वी ने अच्छा प्रदर्शन किया। अगर मैं दो-तीन किलो वजन और भी उठाती तो इससे परिणाम में अंतर नहीं आता। इस मुकाबले में ज्ञानेश्वरी ने क्लीन एंड जर्क में दो बार व्यक्तिगत नए रिकॉर्ड बनाए। पहले 107 किलो और दूसरी बार 111 किलो का वजन उठाकर उन्होंने अपनी क्षमता से हैरान किया।
ज्ञानेश्वरी ने बताया कि उनका सबसे बड़ा लक्ष्य यूएसए में आयोजित होने वाला ओलंपिक-2028 है। इससे पहले सितंबर, 2026 में एशियन चैंपियनशिप वह पड़ाव होगा जहां इसकी तैयारियों को परखने का एक और मौका मिलेगा। उन्होंने कहा कि वह सात जुलाई को ही एनआईएस पटियाला वापस लौट रही हैं ताकि जल्द तैयारियां शुरू कर सकें। ज्ञानेश्वरी ने बताया, हम अब नए सिरे से तैयारियां करेंगे, इसके लिए हमने बड़ा लक्ष्य निर्धारित कर रखा है। मुझे इन महीनों में काफी मेहनत करनी है। उन्होंने बताया कि एनआईएस में वह हेड कोच अलाकेश बरुआ की देखरेख में तैयारियां कर रही हैं।
महिलाओं में पीरियड्स की समस्या पर ज्ञानेश्वरी खुलकर बात करती हैं। उन्होंने कहा कि मैं बचपन से खेल क्षेत्र में हूं। मुझे कभी पीसीओडी या माहवारी से जुड़ी दूसरी समस्याएं नहीं हुईं। मैं कुछ सहेलियों को जानती हूं जिन्हें इस दर्द से गुजरना पड़ता है। लेकिन खेल, व्यायाम और शारीरिक मेहनत वो जरिया है जिससे यह समस्या समाप्त हो जाती है। हार्मोनल बैलेंस ठीक होने से पीरियड्स आपके लिए बाधा नहीं बनता। जो इससे जूझ रहे हैं, उन्हें अपनी दिनचर्या पर काम करना चाहिए।