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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Nov 28, 2021 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

ईश्वर राम ने डेयरी व्यवसाय में लिखी सफलता की नई कहानी

अब ईश्वर राम डेयरी व्यवसाय के सफल उद्यमी के रूप में स्थापित हो चुके हैं। उन्होंने वैज्ञानिक तरीकों को अपनाकर दुग्ध उत्पादन में बढ़ोतरी की।

By Nai Dunia News NetworkEdited By: Nai Dunia News Network
Publish Date: Sun, 28 Nov 2021 12:54:58 AM (IST)Updated Date: Sun, 28 Nov 2021 12:54:58 AM (IST)
ईश्वर राम ने डेयरी व्यवसाय में लिखी सफलता की नई कहानी

राजनांदगांव। वैज्ञानिक तरीकों को अपनाकर धुन के पक्के ग्राम मोहला निवासी ईश्वर राम यादव ने डेयरी व्यवसाय के क्षेत्र में सफलता की नई ईबारत लिखी है। उन्हें शासन की योजना से भरपूर मदद मिली। अब ईश्वर राम डेयरी व्यवसाय के सफल उद्यमी के रूप में स्थापित हो चुके हैं। उन्होंने वैज्ञानिक तरीकों को अपनाकर दुग्ध उत्पादन में बढ़ोतरी की।

अपनी कोशिशों से जिन्दगी बदलने की जिद के कारण मोहला विकासखंड के सुदूर वनांचल ग्राम मोहला के ईश्वर राम यादव डेयरी व्यवसाय के सफल उद्यमी के रूप में स्थापित हुए हैं। शासन की योजना से उन्हें भरपूर मदद मिली और धुन के पक्के श्री ईश्वर राम ने डेयरी व्यवसाय के क्षेत्र में सफलता की नई ईबारत लिखी। उन्होंने अपनी आर्थिक स्थिति को मजबूत किया और आज डेयरी व्यवसाय से उन्हें प्रतिमाह लगभग 83 हजार रुपये की आमदनी हो रही है।


छह लाख रुपये का बैंक से ऋण

शासन के सहयोग से पशुधन विकास विभाग द्वारा उन्हें डेयरी व्यवसाय खोलने के लिए एवं उन्नात नस्ल के पशुओं, खानपान, पशुरोग निवारण, पशु प्रजनन एवं चारा उत्पादन के संबंध में जानकारी दी गई। राज्य डेयरी उद्यमिता विकास योजना के अंतर्गत उन्हें छह लाख रुपये का बैंक से ऋण मिला जिससे उन्होंने अपना व्यवसाय बढ़ाया। उन्होंने पांच उन्नात नस्ल की गाय खरीदी एवं विभाग के द्वारा कृत्रिम गर्भाधान द्वारा वर्तमान में 17 उन्नात नस्ल की गाय रखकर डेयरी व्यवसाय स्थापित किया है।

नेपियर घास लगाकर चारा उत्पादन किया

डेयरी चला रहे ईश्वर ने पशुदाना के खर्च को कम करने के लिए विभाग द्वारा प्राप्त हायब्रिड नेपियर घास लगाकर पर्याप्त मात्रा में चारा उत्पादन किया। उन्होंने विभाग के डॉक्टरों द्वारा स्थानीय स्तर पर मिलने वाले सहायता से आधुनिक उपायों को अपनाकर पशुपोषण के लिए कार्य किया तथा दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा दिया। श्री ईश्वर ने नेपियर के चारे की उपयोगिता बढ़ाने एवं चारे के वेस्टेज कम करने के लिए उन्हें विभाग द्वारा राष्ट्रीय लाईव स्टाक मिशन योजना अंतर्गत वितरित विद्युत चलित चॉफ कटर 60 हजार रुपये अनुदान राशि पर दिया गया, जिससे दूध उत्पादन में बढ़ोतरी हुई। दाने की लागत को कम करने के लिए एवं पैरा की पौष्टिकता बढ़ाने के लिए विभाग के सहयोग से उन्होंने पैरा यूरिया उपचार कर दूध उत्पादन का एक और वैज्ञानिक तकनीक अपनाया।

प्रतिदिन 80 लीटर दुग्ध उत्पादन कर रहे

बतााया गया कि ईश्वर राम पहले पारंपरिक तरीके से दुग्ध उत्पादन करते थे। इससे उनका परिवार नहीं पल पा रहा था। अब वे शान से जी रहे हैं। आज की स्थिति में ईश्वरराम यादव प्रतिदिन 80 लीटर दुग्ध उत्पादन कर 40 रुपये प्रति लीटर की दर से बाजारों में बिक्री कर रहे हैं। साथ ही साथ बचे हुए दूध का खोवा उत्पादन किया जा रहा है। जिसे बाजार में 400 रुपये प्रति किलो की दर से विक्रय रहे हैं।