
नईदुनिया प्रतिनिधि, खैरागढ़। छत्तीसगढ़ के खैरागढ़-छुईखदान-गंडई जिले में सरकारी शराब दुकानों के संचालन को लेकर आर्थिक अनियमितता का मामला सामने आया है। यहां आउटसोर्सिंग व्यवस्था के तहत काम कर रहे कर्मचारियों और विशेषकर सुपरवाइजरों से नौकरी जारी रखने के एवज में 50 हजार रुपये का डिमांड ड्राफ्ट (डीडी) जमा कराने के आरोप लगे हैं। इस खुलासे के बाद से प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मच गया है।
शिकायत के केंद्र में आउटसोर्स एजेंसी 'एसआईएस कैश सर्विसेज लिमिटेड' के स्टेट हेड का नाम सामने आ रहा है। जिला आबकारी कार्यालय ने इन शिकायतों का संज्ञान लेते हुए छत्तीसगढ़ स्टेट मार्केटिंग कॉर्पोरेशन लिमिटेड (सीएसएमसीएल) को पत्र लिखकर उच्चस्तरीय जांच का आग्रह किया है।
नियमों के मुताबिक, सीएसएमसीएल के टेंडर अनुबंध में स्पष्ट प्रावधान है कि कोई भी एजेंसी कर्मचारियों से भर्ती शुल्क, सिक्योरिटी डिपॉजिट या रिश्वत के रूप में राशि नहीं ले सकती। ऐसा करने पर एजेंसी का अनुबंध समाप्त करने और ब्लैकलिस्ट करने तक की कार्रवाई का प्रावधान है।
विवाद सिर्फ डिमांड ड्राफ्ट तक सीमित नहीं है, बल्कि कई कर्मचारियों को बिना किसी लिखित आदेश के कार्य से बाहर करने के आरोप भी लगे हैं। इसके विपरीत, जिन कर्मचारियों के खिलाफ पहले से शिकायतें थीं या कानूनी विवाद थे, वे अब भी पदों पर बने हुए हैं। पड़ोसी जिलों में ऐसी कोई मांग न किए जाने से इस कार्रवाई की पारदर्शिता पर भी बड़े सवाल खड़े हो रहे हैं। पैलिमेटा शराब दुकान के सुपरवाइजर रवि कुर्रे का मामला भी चर्चा में है, जिन पर भ्रष्टाचार के आरोप के बाद इस्तीफा देने के बावजूद दोबारा बहाली पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं।