
नईदुनिया प्रतिनिधि, राजनांदगांव। छत्तीसगढ़ के वनांचल जिला मोहला-मानपुर में बस्तर-महाराष्ट्र सीमावर्ती औंधी-नवागांव उपवनक्षेत्र में नौ दिनों बाद फिर बाघ की दहाड़ गूंजने से दहशत फैली हुई है। विभाग ने पुष्टि की है कि क्षेत्र में लगभग डेढ़ वर्ष आयु की मादा बाघ विचरण कर रही है। अगस्त में देखा गया बाघ तीन वर्ष का नर था जो कि वापस लौट चुका है।
विभाग की इस पुष्टि के बाद एक बार फिर औंधी-नवागांव उपवन क्षेत्र और महाराष्ट्र के गढ़चिरौली क्षेत्र बाघों का कारिडोर साबित हो रहा है। वनमंडलाधिकारी ने बताया कि बीते सात सितंबर को इस बाघिन को ट्रेप कैमरे में कैद किया गया है।
सोमवार को इसी मादा बाघ ने जंगल से लगे बैल का शिकार किया। जबकि मंगलवार को दो चरवाहे इसके हमले का शिकार होते-होते बचे। इसके बाद ग्रामीणों, विशेषकर चार किमी दूर बागडोंगरी तक माध्यमिक शाला जाने वाले बच्चों पर बड़ा खतरा मंडरा रहा है।
आवागमन में खतरा देखते हुए वन मंडल ने स्कूली बच्चों के लिए वाहन की व्यवस्था की है। बुधवार की सुबह इसकी शुरुआत हुई। पहले दिन की सुबह इसके लिए किराए पर लिया गया निजी वाहन पहुंचा। ग्राम घोटियाकन्हार के आठ बच्चों को इसी वाहन से स्कूल लाया और ले जाया जाएगा, जिनमें से पांच आज इससे ही शाला पहुंचे। शाम को विभाग का वाहन इन्हें लेने पहुंचा था। वन परिक्षेत्र अधिकारी प्रवीण देहारी ने कहा कि, सुरक्षित आवागमन के लिए विभाग ने यह सुविधा शुरु की है।
घने जंगल वाले महाराष्ट्र के सीमावर्ती औंधी-नवागांव उपवन परिक्षेत्र में बाघ जून-जुलाई से देखा जा रहा है। पांच अगस्त को बाघ ने कोहकाटोला में एक बैल का शिकार किया था। इसी दिन जंगल में वनअमले का बाघ से आमना-सामने होने के बाद जैसे-तैसे लोगों ने अपनी जान बचाई। कुछ दिन बाद घोटिया कन्हार इलाके में ये मादा बाघ आ गई। 27-28 अगस्त को घोटियाकन्हार, हालेपायली और गट्टेपायली के आसपास इसे देखा गया। पखवाड़े भर गायब रहने के बाद सात सितंबर को इसने दोबारा जंगल में बैल का शिकार किया। दो चरवाहों भी इसके हमले का शिकार होते हुए बचे।
सात सितंबर को मिली तस्वीर में मादा बाघ की शिनाख्त हुई है। यह करीब डेढ़ वर्ष आयु की है। इससे पूर्व कोहकाटोला में देखा गया बाघ महाराष्ट्र की ओर लौट चुका है। फिलहाल विचरण क्षेत्र में लगातार निगरानी रखी जा रही है और ग्रामीणों को सतर्क किया गया है।
- अभिनव कुमार, वनमंडलाधिकारी, मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी