
नईदुनिया प्रतिनिधि, राजनांदगांव। सोमनी क्षेत्र में किशोरी की गर्भधारण वाली गलत जांच रिपोर्ट ने प्रेग्नेंसी किट की खरीदी में अनियमितता और गुणवत्ता पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है। बताया जा रहा है कि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में किशोरी की तीन बार प्रेग्नेंसी जांच की गई। तीनों बार रिपोर्ट पॉजिटिव आई। स्वजनों की मांग और कांग्रेस की आपत्ति के बाद जब जिला अस्पताल में यही जांच कराई गई तो रिपोर्ट नेगेटिव आई।
इससे आशंका जताई जा रही है कि फर्म विशेष से खरीदी गई प्रेग्नेंसी किट ही खराब है। इसी संदेह के आधार पर औषधि प्रशासन विभाग ने किट का नमूना जांच के लिए लिया है। लैब टेस्ट से ही उसकी गुणवत्ता की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। बताया जा रहा है कि प्रकरण में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सोमनी की मेडिकल अफसर डॉ. मौन्या साहू के खिलाफ आगामी कार्रवाई लैब रिपोर्ट के बाद ही तय की जाएगी। उन्हें फिलहाल मातृ-शिशु अस्पताल में संलग्न रखा गया है।
यह घटना 25 मई की रात की है। 14 वर्षीय किशोरी को पेट दर्द की शिकायत के बाद सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र इलाज के लिए ले जाया गया था। वहां जांच के बाद उसे गर्भवती बता दिया गया। इससे उसका पूरा परिवार सदमे में आ गया। अस्पताल में एमएलसी (MLC) रिपोर्ट बना दी गई, इस कारण इसमें पुलिस की भूमिका आ गई। स्वजनों के साथ किशोरी को थाने बुलाया गया।
पूछताछ के दौरान पुलिस ने अमानवीयता की सारी सीमाएं लांघ दीं। किशोरी को देर रात तक थाने में बिठाए रखा गया। पूछताछ के नाम पर उससे मारपीट और अभद्रता किए जाने के आरोप स्वजनों ने लगाए हैं। इतना ही नहीं, गांव में झूठी बातें फैलाकर परिवार को अपमानित भी किया गया।
साथ ही किशोरी को उसके ननिहाल से बर्थडे पार्टी से उठाकर वापस थाने लाया गया। इससे पूरा परिवार मानसिक रूप से परेशान है। कांग्रेस की एंट्री के बाद प्रकरण ने नया मोड़ लिया और सारी सच्चाई सामने आने के बाद पुलिस और स्वास्थ्य विभाग हरकत में आया।
बताया जा रहा है कि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सोमनी में पिछले माह जीवनदीप समिति की अनुशंसा पर थोक में दवा, किट व अन्य सामग्रियों की खरीदी की गई थी। इसकी सप्लाई एक ही कंपनी से हुई है। जिस किट से किशोरी की प्रेग्नेंसी जांच की गई, वह उसी खरीदी में शामिल है। एक ही कंपनी की किट से तीन बार की गई जांच में तीनों बार रिपोर्ट पॉजिटिव आई, जबकि जिला अस्पताल में रिपोर्ट नेगेटिव आई।
सोनोग्राफी में भी गर्भ की रिपोर्ट झूठी निकली। यही कारण है कि स्थानीय स्तर पर की गई खरीदी में गुणवत्ता की अनदेखी के साथ आर्थिक अनियमितता का भी संदेह है। हालांकि, यह औषधि विभाग की लैब जांच से ही वास्तविकता सामने आ सकेगी। सीएमएचओ (CMHO) डॉ. एनआर नवरतन ने बताया कि प्रकरण की जांच कराई जा रही है। प्रतिवेदन के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
थाने में किशोरी को प्रताड़ना देने के मामले में एसपी अंकिता शर्मा ने निरीक्षक अरुण कुमार नामदेव और महिला प्रधान आरक्षक जयश्री सिंह को पहले दिन लाइन अटैच किया। शनिवार को दोनों को निलंबित कर दिया गया। दोनों को रक्षित आरक्षी केंद्र यानी पुलिस लाइन में पदस्थ किया गया है। निलंबन आदेश में कहा गया है कि बिना अनुमति के दोनों मुख्यालय नहीं छोड़ सकेंगे।
उधर, तुमड़ीबोड़ चौकी प्रभारी निरीक्षक दिलीप पटेल को सोमनी थाने का प्रभारी बनाया गया है। उनकी जगह कोतवाली थाने में पदस्थ उपनिरीक्षक धनीराम नारंगे को तुमड़ीबोड़ चौकी प्रभारी बनाकर भेजा गया है। एसपी अंकिता शर्मा ने बताया कि प्रारंभिक जांच के बाद थाना प्रभारी व महिला प्रधान आरक्षक को निलंबित कर दिया गया है। विभागीय जांच भी बैठा दी गई है।