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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Sep 21, 2025 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

बस्तर में 'विकास का रास्ता' 19 साल के बाद कोंटा-गोलापल्ली मार्ग का निर्माण शुरू, 140 से घटकर 45 किमी हुई दूरी

सुकमा जिले के कोंटा-गोलापल्ली मार्ग का निर्माण शुरू 19 साल बाद शुरू हुआ है। इलाके में पिछले 9 दिनों में सुरक्षाबलों के चार कैंप बनाए गए हैं। जिसके बाद...और पढ़ें

By Satish ChandakEdited By: Roman Tiwari
Publish Date: Sun, 21 Sep 2025 03:58:41 PM (IST)Updated Date: Sun, 21 Sep 2025 04:00:36 PM (IST)
बस्तर में 'विकास का रास्ता' 19 साल के बाद कोंटा-गोलापल्ली मार्ग का निर्माण शुरू, 140 से घटकर 45 किमी हुई दूरी
सुकमा जिले में निर्माणाधीन 45 किलोमीटर लंबा कोंटा–गोलापल्ली मार्ग

HighLights

  1. तुमालभट्टी में आठ सितंबर को नया कैंप खोला गया था
  2. 19 साल के बाद कोंटा-गोलापल्ली मार्ग का निर्माण शुरू
  3. करोड़ के इनामी रहे माओवादी रमन्ना का गढ़ था यह क्षेत्र

सतीश चांडक, नईदुनिया, सुकमा: मात्र नौ दिनों में चार सुरक्षा कैंपों के खुलने से सुकमा जिले के गोलापल्ली गांव के लोगों को कोंटा ब्लॉक मुख्यालय पहुंचने के लिए अब 45 किमी की ही यात्रा करनी पड़ रही है। इससे पहले गोलापल्ली जाने के लिए तेलंगाना होकर 140 किमी का चक्कर लगाना पड़ता था। तेलंगाना से सटा यह क्षेत्र माओवादी रमन्ना का गढ़ था।

19 वर्षों के बाद यह सड़क अब शुरू हो गई है। जिले के कोंटा में सुरक्षा बलों ने आठ से 16 सितंबर के बीच तुमालभट्टी -उसकावाया, वीरागंगरेल, मेहता और पालीगुड़ा में चार नए कैंप स्थापित किए हैं। इससे वर्षों से बंद कोंटा-गोलापल्ली मार्ग फिर से खुल गया है। निर्माण के बीच दोपहिया वाहनों का आवागमन शुरू हो चुका है। अब इस सड़क के बनने से दो दर्जन से ज्यादा गांव सीधे ब्लाक मुख्यालय से जुड़ सकेंगे।


सलवा जुडूम आंदोलन के बाद से रास्ता बंद

2006 में सलवा जुडूम आंदोलन के बाद माओवादियों ने क्षेत्र पर कब्जा कर लिया और मुख्य रास्ते को बंद करवा दिया और पूरे इलाके को विकास से काट दिया था। इसलिए ग्रामीणों को अपने जरूरी काम के लिए मरईगुडा और लक्ष्यपुरम से तेलंगाना होकर 140 किमी की दूरी तय कर कोंटा आना पड़ता था।

नए सुरक्षा कैंपों के चलते सड़क निर्माण का काम तेजी से चल रहा है। बीते दो सालों में सुरक्षा बलों की लगातार मौजूदगी ने माओवादियों की गतिविधियों को काफी हद तक सीमित कर दिया है। पुलिस अधीक्षक किरण चव्हाण ने कहा कि नए कैंपों से न केवल शांति स्थापित होगी, बल्कि कोंटा-गोलापल्ली सड़क का निर्माण भी तेजी से पूरा होगा। जहां कभी खौफ का साया था, अब वहां सड़क और उम्मीद की गूंज सुनाई दे रही है।

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बड़े हमलों का मास्टरमाइंड था रमन्ना

रावुलु श्रीनिवास उर्फ रमन्ना सीपीआई (माओवादी) की केंद्रीय समिति का सदस्य था। उस पर छत्तीसगढ़ में 40 लाख रुपये सहित कुल 2.40 करोड़ रुपये का इनाम घोषित था। वह दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी का सचिव भी था। वह बस्तर क्षेत्र में कई बड़े माओवादी हमलों का मास्टरमाइंड था। इनमें 2010 का ताड़मेटला हमला भी शामिल है, जिसमें 76 सुरक्षाकर्मी मारे गए थे। इसके साथ ही वह 2013 के झीरम घाटी हमला का भी योजनाकार था, जिसमें कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मारे गए थे। दिसंबर, 2019 में बीमारी के चलते बस्तर में उसकी मौत हो गई थी।