कोंटा/सुकमा/दोरनापाल। सुकमा जिले के बुरकापाल में सोमवार दोपहर हुए नक्सल हमले के दौरान नक्सलियों ने पेड़ पर चढ़कर 15 फीट की ऊचाई से जवानों पर गोलियां दागी थीं। 350 की संख्या में मौजूद नक्सलियों ने जवानों को तीन दिशाओं से घेरकर व्ही एम्बुश में फंसाया था। नक्सलियों की तुलना में महज 92 जवान थे इसलिए फोर्स को तगड़ा नुकसान उठाना पड़ा।

नईदुनिया की टीम ने मंगलवार को प्रभावित गांव का दौरा किया। घटना में मौजूद रहे सीआरपीएफ 74 वीं बटालियन के जवान मनोज कुमार ने बातचीत में बताया कि बुरकापाल कैम्प से जवानों की टीम जैसे ही निर्माणाधीन पुलिया की सुरक्षा के लिए सर्चिंग पर निकली थी। इस बीच रास्ते में लाल साड़ी पहनी कुछ ग्रामीण महिलाएं तेंदूपत्ता व आम तोड़ती हुई नजर आईं। वे महिलाएं फोर्स की रेकी कर रही थीं। उक्त महिलाएं गांव की नहीं थीं इसलिए सुरक्षा बल को उन पर संदेह भी हुआ। इसके बाद जब सभी जवान भोजन करने बैठे थे तभी नक्सलियों ने अचानक यूबीजीएल से फायर दागा। इसके बाद तीनों दिशाओं से गोलियां दागनी शुरू कर दीं। जवानों ने जवाबी कार्रवाई में एचई हाई एक्सप्लोजिव बम भी दागे। व्ही आकार के एम्बुश में फंसने के चलते जवान कमजोर पड़ गए। इस दौरान नक्सली जंगल में पेड़ों के ऊपर चढ़कर फायरिंग कर रहे थे। करीब तीन बजे तक फायरिंग चली। वही सपोर्टिंग पार्टी को रोकने लिए भी नक्सलियों की दूसरी पार्टी अपोजिट दिशा में फायरिंग कर रही थी। घटना स्थल पर पेड़ों में कई जगहों पर गोलियों के निशान पाए गए।

इस बार भी किया तीर बम का इस्तेमाल

मौके पर बिना फटे व फटे तीर बम समेत खाली कारतूस के खोखे चारों ओर नजर आए। वहीं घटना स्थल से कुछ दूरी पर तम्बाकू के पैकेट व गुडाखू का डिब्बा मिला। घात लगाए बैठे नक्सली जवानों के आमद से पूर्व गुड़ाखू घीसकर टाइम पास करते रहे। विदित हो बीते 12 मार्च को कोत्ताचेरू में हुए हमले के दौरान भी नक्सलियों ने तीर बम का इस्तेमाल किया था जिसके चलते कई जवानों को नुकसान हुआ था। बताया जाता है कि तीर के अग्रभाग में नक्सली आईईडी लगा देते हैं। इसके लगते ही विस्फोट हो जाता है। इस प्रकार के तीर बम का नक्सलियों ने पहले भी कई बार इस्तेमाल किया है।

तीन नक्सलियों के मारे जाने का दावा

आईजी विवेकानंद सिन्हा ने बताया कि ग्राम लिंपा के ग्रामीणों ने नक्सलियों द्वारा तीन शवों के जलाए जाने की पुष्टि की है। वहीं कई नक्सलियों के घायल होने की जानकारी मिली है। घअनास्थल पर खून के छींटे भी मिले हैं। श्री सिन्हा ने खुफियातंत्र की नाकामी की बात से इंकार करते हुए कहा कि नक्सलियो के मुकाबले जवानों की संख्या काफी कम थी। इसलिए नुकसान उठाना पड़ा।

संवाददाता बाल-बाल बचे

सोमवार शाम घटना स्थल से वापस लौट रहे दोरनापाल संवाददाता पवन शाह व उनके मित्र अमन भदौरिया नक्सल गोलीबारी में बाल-बाल बचे। ज्ञात हो कि बुरकापाल में हुए हमला के बाद घंटों तक नक्सलियों की सक्रियता इलाके में थी। दोरनापाल से बाइक में सवार होकर जा रहे पवन व अमन जब पुसावाड़ा कैम्प के पास पहुंचे। इस दौरान नक्सली कैम्प के सामने से गोलियां बरसा रहे थे। दोनों ओर से चल रही गोलीबारी के बीच दोनों बाल-बाल बचे। कैम्प में कुछ देर बिताने के बाद सुरक्षित वापस रवाना हुए।