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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे May 19, 2021 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

सिलगेर में पत्थरबाजी से हिंसा भड़की, गोलीबारी पर हुई खत्म

जिले से सटे सुकमा जिले के सिलगेर गांव के समीप हाल ही में बने फोर्स के कैंप के विरोध में नक्सलियों के बहकावे पर चार दिनों से जुटे आदिवासियों का आंदोलन ...और पढ़ें

By Nai Dunia News NetworkEdited By: Nai Dunia News Network
Publish Date: Wed, 19 May 2021 07:28:59 AM (IST)Updated Date: Wed, 19 May 2021 07:28:59 AM (IST)
सिलगेर में पत्थरबाजी से हिंसा भड़की, गोलीबारी पर हुई खत्म

मो. आदिल खान, बीजापुर (नईदुनिया)

जिले से सटे सुकमा जिले के सिलगेर गांव के समीप हाल ही में बने फोर्स के कैंप के विरोध में नक्सलियों के बहकावे पर चार दिनों से जुटे आदिवासियों का आंदोलन सोमवार दोपहर तब आक्रामक हो गया जब एक हजार से अधिक आदिवासियों ने कैंप पर पत्थरबाजी शुरू कर दी और तीर बरसाने लगे। पुलिस के मुताबिक ग्रामीण इतने आक्रामक हो गए थे कि उन्होंने कैंप के बेरिकेड को तोड़ने की कोशिश की। इसके बाद जंगल की ओर से संदिग्ध नक्सलियों ने फायरिंग शुरू कर दी। जवाबी कार्रवाई में फोर्स ने भी गोली चलाई। इसमें तीन लोगों की जान चली गई और 18 घायल हो गए।

पुलिस का कहना है कि हिंसा पर उतारू लोगों ने सोमवार दोपहर करीब 12 बजे पत्थरबाजी शुरू की और फिर सुरक्षा में तैनात जवानों पर तीर बरसाए। इस बीच जंगल की ओर से भी गोलीबारी हुई। फोर्स ने भी जवाबी कार्रवाई की। इसमें तीन लोग मारे गए। इनमें ग्राम चुटवाही थाना बासागुड़ा निवासी कवासी वेगा, सुकमा जिले के ग्राम तिप्पापुरम थाना चिंतलनार निवासी उइका मुरली और ग्राम गुंडम थाना बासागुड़ा निवासी उरसा भीमा शामिल हैं। इस घटना के बाद तीनों शवों को फोर्स ने अपने कब्जे में ले लिया। बताया गया है कि बीजापुर जिला अस्पताल में मंगलवार को पोस्टमार्टम किया गया। फोर्स मारे गए तीन लोगों को नक्सली जबकि ग्रामीण किसान बता रहे हैं। बताया गया है कि 18 लोग हिंसक झड़प में जख्मी हुए हैं। इनमें तीन गोली लगने से घायल हुए हैं। 18 में से सात लोगों को बासागुड़ा में दाखिल किया गया है जबकि जिला अस्पताल में 11 लोगों का इलाज चल रहा है।


इस हिंसा में बीजापुर और सुकमा जिले के करीब दो दर्जन से अधिक गांव के लोग शामिल थे। हालांकि गांव के लोगों ने घायलों की जो फेहरिस्त थमाई है, उनमें 31 लोगों के नाम हैं। इनमें वेटी अडमाल, कारम सांतू, चिंताम भीमा, कारम विजाल, कारम सन्नाू, लेकाम सन्नाू, पूनेम मंगू, मीडियम सुक्की, मड़वी दन्नाी, हेमला सन्नाू, हेमला बुदरी, अवलम सोमे, कारम जोगी, कोरसा बुदराम, मिडियम मंगली, हेमला बुज्जी, कुंजाम आयती, पूनेम गुंडाल, कारम रज्जू, माड़वी विजय, मड़काम रमेश, कारम नारायण, बोगाम लकमू, पूनेम नंदे, कारम जोगी, मिरगम सुकली, पूनेम मुरा, मिंगम बुज्जी, कड़ती लकमा, मड़कम प्रमिला एवं मड़कम हुुंगी शामिल हैं।

ये है मसला

गांव के लोगों का आरोप है कि कैंप खुलने से वे खुद को असुरक्षित महसूस करते हैं। गश्त और सर्चिंग में निकली फोर्स गांव के लोगों को प्रताड़ित करती है। जंगल में वनोपज लेने गए लोगों को नक्सली बताकर जेल भेज दिया जाता है जबकि गांव के लोगों का उनसे कोई लेना-देना नहीं है। बता दें कि सिलगेर कैंप 12 मई को स्थापित किया गया और तब से ग्रामीण इसका विरोध कर रहे हैं। माना जा रहा है कि इस विरोध के पीछे नक्सलियों का हाथ है। कैंप में सीआरपीएफ की 168, 153 बटालियन, एसटीएफ और डीआरजी तैनात हैं।