
0 मुनादी करा कर गांव में आने-जाने पर लगाई रोक
0 पीड़ित गांव में पैदल व खाली पैर चलने पर रोक
0 कथित बाबा के आदेश का पालन कर रहे ग्रामीण
रायगढ़। गांवों में जब भी महामारी फैलती है, लोग पहले झाड़ फूंक करवाते हैं इलाज कराने बाद में जाते हैं। ज्ञात हो डायरिया प्रभावित विकासखंड पुसौर के एक गांव में लोगों को जूता पहन कर आने-जाने की मनाही कर दी गई है। यही नहीं ग्रामीणों ने मुनादी करवाकर दी है कि डायरिया पीड़ित गांव में दूसरे गांव का कोई आदमी जाएगा या उस गांव का कोई आदमी दूसरे गांव जाएगा, तो उसे बतौर जुर्माना हजार रुपए देने होंगे। प्रशासन के पास इसकी खबर होने के बावजूद न तो गांव में कैंप लगाया गया और न ही मुनादी कराने वाले सरपंच पर कोई कार्रवाई की गई है।
पुसौर विकासखंड के रायपाली गांव में पिछले सप्ताह भर से डायरिया का प्रकोप चल रहा है। गांव के 8 वर्र्षीय मासूम की मौत के बाद 4 परिवारों ने न सिर्फ अपना घर छोड़ दिया है, बल्कि जूते-चप्पल और वाहनों के चलाने पर ग्रामीणों ने पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया है। महामारी से बचने के लिए अब लोग पूजा पाठ का सहारा ले रहे हैं। वहीं गंभीर पीड़ितों का उपचार अलग-अलग अस्पतालों में जारी है। प्राप्त जानकारी के अनुसार पुसौर विकासखंड के नवापारा ग्राम पंचायत के अंतर्गत आने वाले आश्रित ग्राम रायपाली में पिछले एक सप्ताह से डायरिया के कहर से लोग दहशत मे हैं। यहां रहने वाले 4 परिवारों ने बीमारी के डर से मकान में ताला लगाकर पलायन कर गए हैं। वहीं डायरिया से अभी तक दर्जनों लोग पीड़ित हो चुके हैं, जिनका इलाज स्थानीय स्वास्थ्य केन्द्र व पुसौर अस्पताल में जारी है। ग्रामवासी महामारी से बचने के लिये टोना-टोटका का सहारा ले रहे हैं। लोगों ने सामाजिक बैठक बुलाकर गांव में जूते-चप्पल पहनकर चलने एवं वाहनों को चालू ले जाने पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया है। इतना ही नहीं, महामारी से बचने बाबा का भी सहारा लिया जा रहा है। बाबा का दावा है कि गांव में नंगे पैर और वाहनों को धक्का देकर ले जाने व हर शाम पूजा पाठ करने से डायरिया से निजात मिलेगी। पूरे गांव में पिछले कुछ दिनों से सन्नाटे के बीच अजीबो-गरीब वातावरण बना हुआ है।
बाबा की अवज्ञा की तो सजा
ग्रामीणों ने बताया कि गांव की 8 वर्षीय बच्ची की मौत डायरिया से हो गई, लेकिन स्वास्थ्य महकमा मौत से इनकार कर रहा है। गांव के लोग एक बच्ची की मौत होने के बाद पूरी तरह से घरों मे ताला लगाकर कहीं और चले गए हैं। लोगों का विश्र्वास है कि बाबा के कहे अनुसार नहीं करने पर गांव में अनहोनी हो सकती है, वहीं बाबा की बात नहीं मानने वालों के लिए सजा का भी प्रावधान है।
पड़ोसी गांवों में भी कराई मुनादी
डायरिया से बचने अंधविश्वास का खेल किस कदर चल रहा है, यह गांव में जाने पर पता चलता है। रायपाली के पड़ोसी गांव नवापारा पंचायत ने बकायदा मुनादी करवाकर अपने गांव वालों को ताकीद की है कि वे रायपाली पंचायत न जाएं। यदि कोई वहां जाएगा तो उसे 1 हजार रुपए जुर्माना देना पड़ेगा। यही नहीं यह भी कहा गया है कि यदि रायपाली से कोई ग्रामीण गांव में आएगा तो उसे बतौर जुर्माना उतनी ही राशि देना होगी। यही हाल पड़ोसी गांव खपरा पाली और उमरिया का भी है। वहां की पंचायतों में भी इसी तरह की मुनादी करवाई गई है, जबकि पंचायत द्वारा इस तरह की मुनादी कराना अवैध है।
सिर्फ कागज में बन गए शौचालय
पंचायत में शत प्रतिशत अनुदान पर शौचालय बनाया गया है, पर इस रायपाली में आज तक एक भी शौचालय नहीं बना है। शौचालय की राशि कहां गई किसी क ो पता नहीं हैं। गांव वालों के नाम पर शौचालय के पैसे को निकाल कर डकार लिया गया। अब ऐसे में निस्तारी से संबंधित सारा काम गांव के तालाब से होता है। एक ही तालाब में जानवर भी निस्तारी करते हैं और आदमी भी है। ऐसे में इस तरह की बीमारियों का होना लाजिमी है।
बरसात शुरू होते ही बढ़ जाता है कहर
बरसात आते ही जिले के अलग-अलग गांव में डायरिया जैसी महामारी अपनी जड़ें जमाना शुरू कर देती हैं। कहने को स्वास्थ्य विभाग का अमला बरसात होते ही चुस्त हो जाता है, पर कहीं भी सावधानी नहीं बरती जाती। रायपाली में भी कैंप के नाम पर सिर्फ एक कंपाउंडर के भरोसे गांव को छोड़ दिया गया है। जबकि कई लोगों को पुसौर सामुदायिक भवन और जिला अस्पताल भेजा गया है। लेकिन इसकी आड़ में कही अज्ञानता तो कही अंधविश्र्वास लोगों के बीच जड़ें जमा लेता है। जबकि जिला प्रशासन को इस महामारी की कोई जानकारी उनके पास नहीं हैं।
कुछ दिन पहले तक की खबर है कि वहां डायरिया फैला था, अब वहां सब ठीक हैं। हमने वहां पर कैंप करने के लिए कहा है और उस गांव में कैंप कराया भी है।
डॉ. हबेल सिंह उरांव
जिला स्वास्थ्य एवं चिकित्साधिकारी
हमें इस बात की जानकारी नहीं है कि वहां पंचायतों द्वारा मुनादी कराई गई है। यदि ऐसा है तो हम इसकी जांच करवाएंगे।
केएस मंडावी
एसडीएम