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नईदुनिया न्यूज, बिश्रामपुर : सूरजपुर-बलरामपुर जिले की सीमा पर विचरण कर रहे कबरा कान हाथी ने रविवार शाम कल्याणपुर-अखोरा क्षेत्र में जमकर उत्पात मचाया। तीन दिन से कल्याणपुर जंगल में डेरा जमाए इस हाथी ने अलग-अलग घटनाओं में दो ग्रामीणों को कुचलकर मौत के घाट उतार दिया।
वहीं, बाइक सवार चाचा के साथ जा रहे भतीजे ने भागकर सड़क किनारे खड़े ट्रक के नीचे छिपकर किसी तरह अपनी जान बचाई। हाथी ने उसकी तलाश में ट्रक के दो चक्कर भी लगाए, लेकिन उसे सफलता नहीं मिली। एक ही शाम में दो लोगों की मौत से इलाके में भय का माहौल है। सूचना पर पहुंचे वन विभाग के एसडीओ ने मृतकों के परिजनों को 25-25 हजार रुपये की तत्काल आर्थिक सहायता प्रदान की।
जानकारी के अनुसार पहली घटना अखोरा कला गांव की है। अखोरा खुर्द निवासी मानदेव यादव (53) पिता हनुमान यादव रविवार शाम अपने खेत में पहुंचे थे। इसी दौरान अचानक वहां पहुंचे हाथी ने उन पर हमला कर दिया और कुचलकर उनकी जान ले ली। मानदेव एसडीओ फॉरेस्ट कार्यालय में दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी थे।
उनका घर बरियो चौकी क्षेत्र में है, जबकि खेत समीप स्थित लटोरी चौकी क्षेत्र के अखोरा कला में स्थित है। दूसरी घटना शाम करीब छह बजे कल्याणपुर-अखोरा से बरियो जाने वाले मार्ग पर फुलझर नाला के समीप हुई। बलरामपुर जिले के राजपुर थाना क्षेत्र अंतर्गत घटगांव निवासी विश्वनाथ (40) पिता राजनाथ राम पहाड़ी कोरवा अपने भतीजे बलदेव के साथ मोटरसाइकिल से घर लौट रहे थे।
दोनों अंबिकापुर में मोटरसाइकिल बनवाने के बाद अपनी बहन के घर घघरी कंचनपुर गए थे। वहां से लौटते समय अचानक सामने आए हाथी ने बाइक सवारों पर हमला कर दिया। जान बचाने के लिए बलदेव सड़क किनारे खड़े ट्रक के नीचे घुस गया। हाथी ने ट्रक के आसपास दो चक्कर लगाकर उसकी तलाश की, लेकिन वह बच निकला। वहीं, विश्वनाथ को हाथी ने कुचलकर मार डाला। वह बाटीडांड मिडिल स्कूल में भृत्य के पद पर पदस्थ थे।
क्षेत्र में अकेले विचरण कर रहा कबरा कान हाथी का भय लंबे समय से बना हुआ है। पिछले छह महीने में इस हाथी के कई लोगों की जान ली है। इसके बावजूद हाथी की आवाजाही रोकने और ग्रामीणों को सुरक्षित रखने की चुनौती वन विभाग के सामने बनी हुई है। हाथियों के दल के कल्याणपुर और घाघीटिकरा जंगल में लगातार विचरण करने से आसपास के गांवों में भय का माहौल है। किसानों की फसलें भी लगातार नुकसान की चपेट में आ रही हैं।
बताया जा रहा है कि दो लोगों की जान लेने के बाद कबरा कान हाथी बलरामपुर जिले के रेवतपुर जंगल की ओर निकल गया है। वन विभाग ने ग्रामीणों से जंगल की ओर नहीं जाने, हाथी दिखाई देने पर उसके नजदीक नहीं जाने तथा किसी भी तरह की गतिविधि की तत्काल सूचना वन अमले को देने की अपील की है।
क्षेत्रीय ग्रामीणों व वन अमले के रिकॉर्ड के अनुसार, दल से अलग होकर अकेला घूम रहा यह 'कबरा' हाथी न केवल फसलों और मकानों को नुकसान पहुंचा रहा है, बल्कि इंसानों को देखते ही आक्रामक हो जाता है।
कुल मौतें: इस अकेले हाथी के हमले में अब तक 9 निर्दोष ग्रामीणों की जान जा चुकी है।
हमले का तरीका: यह हाथी ग्रामीणों को देखते ही दौड़ाकर पटक देता है और शरीर को बुरी तरह दबाकर मार डालता है, जिससे शिकार को संभलने या भागने का कोई अवसर नहीं मिलता।