
नईदुनिया न्यूज, सूरजपुर: देश के 21 राज्यों में 150 लोगों को निशाना बनाकर 113 करोड़ 32 लाख रुपये से अधिक की ऑनलाइन ठगी करने वाले साइबर गिरोह के तार सूरजपुर से जुड़ने के मामले में पुलिस की जांच अब एक महत्वपूर्ण मोड़ पर पहुंच गई है। साइबर ठगी की इतनी बड़ी रकम के लेनदेन में इस्तेमाल किए गए बैंक खातों के मामले में फरार चल रहे डीएन चक्रधारी एजुकेशन डेवलपमेंट एसोसिएशन के डायरेक्टर देवनारायण चक्रधारी को भी पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। संस्था के को-डायरेक्टर महेश चक्रधारी की गिरफ्तारी के करीब सवा दो माह बाद हुई इस कार्रवाई को पुलिस की जांच में अहम कड़ी माना जा रहा है।
अब तक की जांच में देवनारायण चक्रधारी से जुड़ी दो संस्थाओं के तीन बैंक खातों से करीब 23 करोड़ रुपये के ट्रांजेक्शन की जानकारी सामने आई है। इनमें डीएन चक्रधारी एजुकेशन डेवलपमेंट एसोसिएशन के स्टेट बैंक सूरजपुर स्थित खाते से लगभग साढ़े 12 करोड़ रुपये तथा जनसेवा शिक्षा एवं सामाजिक उत्थान ट्रस्ट के आईडीएफसी बैंक सूरजपुर स्थित दो खातों से करीब साढ़े 10 करोड़ रुपये का लेनदेन होने की जानकारी मिली है।
पुलिस के मुताबिक, गिरफ्तार डायरेक्टर ने पूछताछ में कमीशन के लालच में पटना जाकर साइबर ठग गिरोह को बैंकिंग नेटवर्क और पासवर्ड उपलब्ध कराने की बात स्वीकार की है। खाते उपलब्ध कराने के एवज में आठ लाख रुपये मिलने की बात भी उसने बताई है।
मामले की शुरुआत भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र के समन्वय पोर्टल से मिले इनपुट के बाद हुई थी। पोर्टल से प्राप्त जानकारी में सामने आया था कि देश के अलग-अलग राज्यों में ऑनलाइन ठगी के शिकार हुए लोगों की रकम का ट्रांजेक्शन सूरजपुर स्थित स्टेट बैंक में संचालित डीएन चक्रधारी एजुकेशन डेवलपमेंट एसोसिएशन के संयुक्त बैंक खाते से हुआ है।
पुलिस ने जब बैंक खाते से जुड़े लेनदेन और शिकायतों की कड़ियां जोड़नी शुरू कीं तो चौंकाने वाली जानकारी सामने आई। जनवरी 2024 से जुलाई 2025 के बीच देश के 21 राज्यों में दर्ज 150 साइबर ठगी की शिकायतों में 113 करोड़ 32 लाख रुपये से अधिक की ठगी की रकम के ट्रांजेक्शन का संबंध उक्त बैंक खाते से मिला।
इतनी बड़ी रकम के लेनदेन में स्थानीय स्तर पर संचालित एक शैक्षणिक संस्था के बैंक खाते का इस्तेमाल होने से पुलिस भी जांच में जुट गई। प्रारंभिक जांच के बाद सूरजपुर कोतवाली में 22 फरवरी 2026 को संस्था के डायरेक्टर देवनारायण चक्रधारी और को-डायरेक्टर महेश चक्रधारी के विरुद्ध अपराध दर्ज किया गया था।
पुलिस ने मामले में पहले को-डायरेक्टर महेश चक्रधारी को 22 अगस्त को गिरफ्तार कर जेल भेजा था। वहीं, दूसरा आरोपित देवनारायण लगातार फरार चल रहा था। 22 अगस्त को हुई महेश चक्रधारी की गिरफ्तारी के दौरान पुलिस ने उससे पूछताछ की थी। इस दौरान उसने बताया था कि संबंधित संयुक्त बैंक खाता उसके चचेरे भाई देवनारायण चक्रधारी ने खुलवाया था। वह देवनारायण के यहां ऑपरेटर के रूप में काम करता था।
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लगातार फरार चल रहे संस्था के डायरेक्टर देवनारायण चक्रधारी पिता पवन चक्रधारी (32 वर्ष), निवासी गंगौटी, चौकी बसदेई, थाना सूरजपुर के संबंध में पुलिस को जानकारी मिलने के बाद उसे गिरफ्तार कर पूछताछ की गई। पुलिस के मुताबिक, पूछताछ में देवनारायण ने बताया कि वह व्हाट्सएप कॉल के माध्यम से साइबर ठग गिरोह के संपर्क में आया था।
गिरोह के सदस्यों ने उसे बैंक खातों के माध्यम से होने वाले ट्रांजेक्शन के बदले कमीशन देने का लालच दिया था। इसी लालच में वह पटना (बिहार) गया, जहां उसने साइबर ठग गिरोह को अपना बैंकिंग नेटवर्क और पासवर्ड उपलब्ध कराया था। देवनारायण ने पुलिस को बताया कि बैंक खातों के माध्यम से रकम का लेनदेन कराने के एवज में उसे कमीशन मिलने की बात कही गई थी।
उसने बैंक खाता उपलब्ध कराने के बदले आठ लाख रुपये मिलने की बात भी स्वीकार की है। पुलिस अब उसके इस बयान के आधार पर यह पता लगाने में जुटी है कि पटना में उसकी मुलाकात किन लोगों से हुई थी, गिरोह के सदस्यों ने बैंकिंग नेटवर्क तक पहुंच कैसे बनाई और खातों के माध्यम से हुए करोड़ों रुपये के लेनदेन में उसकी वास्तविक भूमिका क्या थी।
पुलिस की जांच में यह तथ्य भी सामने आया है कि देवनारायण चक्रधारी ने 25 मई 2023 को मिनिस्ट्री ऑफ कॉरपोरेट अफेयर्स, गुरुग्राम के माध्यम से डीएन चक्रधारी एजुकेशन डेवलपमेंट एसोसिएशन का पंजीयन कराया था। इसके बाद सूरजपुर स्थित स्टेट बैंक में संस्था के नाम से संयुक्त खाता खुलवाया गया।
इसी तरह आईडीएफसी बैंक में जनसेवा शिक्षा एवं सामाजिक उत्थान ट्रस्ट के नाम से भी दो संयुक्त खाते संचालित किए जा रहे थे। अब पुलिस संस्था के गठन से लेकर बैंक खाते खुलवाने तक की पूरी प्रक्रिया की जांच कर रही है। पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि दोनों संस्थाओं का वास्तविक उद्देश्य क्या था और क्या इनका इस्तेमाल शुरू से ही साइबर ठगी की रकम के लेनदेन के लिए किया जा रहा था अथवा बाद में ठग गिरोह ने इन्हें अपने नेटवर्क में शामिल किया।
सूरजपुर पुलिस की जांच में जिन 21 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में दर्ज साइबर ठगी की शिकायतों का संबंध संबंधित बैंक खाते से सामने आया है, उनमें छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, ओडिशा, पंजाब, राजस्थान, तमिलनाडु, उत्तरप्रदेश, पश्चिम बंगाल, झारखंड, उत्तराखंड, तेलंगाना, मेघालय, कर्नाटक, केरल, हरियाणा, गुजरात, दिल्ली, बिहार और जम्मू-कश्मीर शामिल हैं। इन राज्यों में जनवरी 2024 से जुलाई 2025 के बीच दर्ज 150 शिकायतों में 113 करोड़ 32 लाख रुपये से अधिक की ऑनलाइन ठगी की रकम का ट्रांजेक्शन संबंधित बैंक खाते से जुड़ा पाया गया था। इसी आधार पर सूरजपुर पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू की थी।
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि सामान्य किसान परिवार से जुड़े बताए जा रहे दोनों चचेरे भाइयों की संस्थाओं के बैंक खातों तक साइबर ठगी की इतनी बड़ी रकम कैसे पहुंची। महज दो वर्षों के भीतर पंजीकृत संस्थाओं के बैंक खातों का इस्तेमाल देश के 21 राज्यों में हुई साइबर ठगी की रकम के लेनदेन में होने की बात सामने आना कई गंभीर सवाल खड़े करता है।
क्या दोनों संस्थाओं के संचालक केवल कमीशन लेकर साइबर ठगों को बैंक खाते उपलब्ध कराने वाले म्यूल अकाउंट संचालक थे या फिर इस पूरे नेटवर्क में उनकी भूमिका इससे कहीं अधिक थी। पटना में संपर्क में आए साइबर ठग कौन थे। क्या इस नेटवर्क के तार दूसरे राज्यों में भी फैले हैं।
23 करोड़ रुपये के ट्रांजेक्शन के अलावा अन्य बैंक खातों में भी ठगी की रकम का लेनदेन हुआ है या नहीं। पुलिस के सामने अब इन सभी सवालों के जवाब तलाशने की चुनौती है। फिलहाल दोनों आरोपितों की गिरफ्तारी के बाद पुलिस बैंकिंग ट्रांजेक्शन, तकनीकी साक्ष्य और आरोपितों के बयानों के आधार पर पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में जुटी है। पुलिस अधीक्षक योगेश कुमार पटेल मामले की लगातार निगरानी कर रहे हैं। अब जांच का अगला महत्वपूर्ण पड़ाव साइबर ठगी के असली मास्टरमाइंड और इस अंतरराज्यीय गिरोह के अन्य सदस्यों तक पहुंचना है।