
नईदुनिया न्यूज, बिश्रामपुर : शिक्षा के मंदिर में अनुशासन और संस्कार की सीख देने वाले जिम्मेदार ही यदि मर्यादा की सीमाएं लांघने लगें तो आक्रोश स्वाभाविक है। शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय सिलफिली में मंगलवार को ऐसा ही नजारा देखने को मिला। प्राचार्य के कथित अभद्र एवं अमर्यादित व्यवहार से नाराज सैकड़ों छात्र-छात्राओं का गुस्सा फूट पड़ा।
दोपहर करीब एक बजे विद्यार्थियों ने विद्यालय के मुख्य गेट पर ताला जड़ दिया और प्राचार्य को तत्काल हटाने की मांग को लेकर धरने पर बैठ गए। करीब चार घंटे तक जमकर नारेबाजी और हंगामा चलता रहा। विद्यार्थियों के समर्थन में पहुंचे अभिभावकों ने भी प्राचार्य के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए नाराजगी जताई।
मामले की गंभीरता को देखते हुए लटोरी तहसीलदार चंद्रशिला जायसवाल, बीईओ हरेंद्र सिंह और जयनगर थाना प्रभारी अमित गुप्ता मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने आक्रोशित विद्यार्थियों को समझाने का प्रयास किया, लेकिन छात्र-छात्राएं प्राचार्य को हटाने की मांग पर अड़े रहे। उनका कहना था कि केवल आश्वासन से काम नहीं चलेगा, बल्कि प्राचार्य के खिलाफ जांच कर दोष सिद्ध होने पर कड़ी कार्रवाई की जाए।
विद्यार्थियों ने विद्यालय के प्राचार्य ईश्वर दत्त खलखो पर महिला भृत्य के साथ कथित दुर्व्यवहार करने, छात्राओं से अभद्र व्यवहार करने के गंभीर आरोप लगाए गए। विद्यार्थियों का आरोप है कि प्राचार्य कई बार शराब के नशे में विद्यालय पहुंचते हैं और अक्सर स्कूल से गायब रहते हैं। विद्यार्थियों ने अधिकारियों के समक्ष प्राचार्य के कथित व्यवहार से जुड़ी कई शिकायतें रखते हुए उन्हें तत्काल पद से हटाने की मांग की।
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लगातार चार घंटे चले हंगामे के बाद तहसीलदार ने विद्यार्थियों को लिखित आश्वासन दिया। इसमें जांच पूरी होने तक प्राचार्य को अवकाश पर भेजने तथा पूरे मामले की जांच 15 दिन की समयसीमा में पूरी करने की बात कही गई। साथ ही जांच प्रतिवेदन के आधार पर अग्रिम कार्रवाई का भरोसा दिलाया गया। इसके बाद छात्र-छात्राओं ने अपना धरना समाप्त किया।
शराबी शिक्षकों को लेकर पहले भी उठते रहे हैं सवाल
सिलफिली की घटना को शिक्षा विभाग के लिए महज एक विद्यालय का विवाद मानकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। जिले में इससे पहले भी शिक्षकों के शराब के नशे में स्कूल पहुंचने, विद्यार्थियों के साथ अभद्र व्यवहार करने और विद्यालयीन अनुशासन को ताक पर रखने के कई मामले सामने आ चुके हैं।
कई मामलों में शिकायतें अधिकारियों तक पहुंचीं और कार्रवाई भी हुई, लेकिन इसके बावजूद ऐसी घटनाओं का सामने आना शिक्षा व्यवस्था की निगरानी और विभागीय अनुशासन पर सवाल खड़े करता है।