नईदुनिया न्यूज, सूरजपुर : जिला मुख्यालय को झकझोर देने वाले प्रधान आरक्षक तालिब शेख की पत्नी और नाबालिग बेटी के निर्मम दोहरे हत्याकांड में करीब दो साल बाद न्यायालयीन कार्रवाई निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है। आनंद प्रकाश वारियाल, जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश फास्ट ट्रैक न्यायालय सूरजपुर ने सोमवार को दो आरोपितों को दोषमुक्त कर दिया, जबकि मुख्य आरोपित कुलदीप साहू समेत चार आरोपितों पर हत्या का आरोप सिद्ध माना है।
न्यायालय ने दोषी ठहराए गए चारों आरोपितों की सजा के लिए आठ अक्टूबर की तिथि निर्धारित की है। फैसले की सूचना के बाद न्यायालय परिसर और बाहर बड़ी संख्या में लोग जुटे रहे। सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए पुलिस बल भी तैनात रहा।
दोहरे हत्याकांड के साथ ही घटना से जुड़े दो अन्य गंभीर मामलों में भी न्यायालय ने फैसला सुनाया। पुलिस कर्मियों पर कार चढ़ाकर जान से मारने की कोशिश के मामले में छह आरोपितों में से पांच को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया गया, जबकि मुख्य आरोपित कुलदीप साहू को 10 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई गई। वहीं बिश्रामपुर थाना के तत्कालीन थाना प्रभारी अलरिक लकड़ा पर लटोरी क्षेत्र में की गई फायरिंग के मामले में कुलदीप साहू और सूरज साहू को हत्या के प्रयास का आरोप सिद्ध नहीं होने पर बरी कर दिया गया।
13 अक्टूबर 2024 की रात हुए दोहरे हत्याकांड में पुलिस ने कुलदीप साहू समेत छह लोगों को आरोपित बनाया था। इनमें रिंकू उर्फ फूल सिंह, चंद्रकांत चौधरी, आर्यन विश्वकर्मा, सूरज साहू और निलकेश्वर साहू शामिल थे। न्यायालय ने सुनवाई के दौरान सूरज साहू और निलकेश्वर साहू को दोषमुक्त कर दिया है। वहीं मुख्य आरोपित कुलदीप साहू, रिंकू उर्फ फूल सिंह, चंद्रकांत चौधरी और आर्यन विश्वकर्मा के विरुद्ध हत्या का आरोप सिद्ध माना गया है।
पुलिस कर्मियों को कुचलने की कोशिश में दस साल की सजा
घटना की रात दोहरे हत्याकांड से पहले और उसके बाद आरोपितों द्वारा की गई गंभीर वारदातों में पुलिस कर्मियों पर कार चढ़ाकर कुचलने की कोशिश का मामला भी शामिल था। प्रधान आरक्षक उदय सिंह की रिपोर्ट पर दर्ज इस मामले में छह आरोपितों के विरुद्ध प्रकरण दर्ज किया गया था। न्यायालय ने मुख्य आरोपित कुलदीप साहू को दोषी पाते हुए 10 वर्ष के सश्रम कारावास से दंडित किया है। वहीं रिंकू उर्फ फूल सिंह, चंद्रकांत, आर्यन विश्वकर्मा, अशोक साहू और राजू साहू को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया गया।
तत्कालीन टीआई पर फायरिंग के मामले में दोनों बरी
दोहरे हत्याकांड के आरोपितों की तलाश के दौरान बिश्रामपुर थाना के तत्कालीन थाना प्रभारी अलरिक लकड़ा पर लटोरी क्षेत्र में फायरिंग कर जानलेवा हमला करने का भी आरोप लगा था। इस मामले में कुलदीप साहू और सूरज साहू आरोपित बनाए गए थे। सुनवाई के बाद न्यायालय ने हत्या के प्रयास का आरोप सिद्ध नहीं होने पर दोनों को बाइज्जत बरी कर दिया।
पहले आरक्षक पर खौलता तेल उड़ेलकर किया था हमला
दोहरे हत्याकांड की रात आरोपितों ने पुलिस को भी खुली चुनौती दी थी। पुराना बस स्टैंड स्थित चौपाटी में आरक्षक घनश्याम सोनवानी पर खौलता तेल उड़ेलकर जानलेवा हमला करने का आरोप कुलदीप साहू पर लगा था। इसके बाद प्रधान आरक्षक तालिब शेख सहित अन्य पुलिस कर्मियों पर कार चढ़ाने की कोशिश की गई। घटनाओं की कड़ी इसके बाद दोहरे हत्याकांड तक पहुंची, जिसने पूरे जिले को झकझोर दिया था।
किराए के मकान में हुई थी मां-बेटी की नृशंस हत्या
13 अक्टूबर 2024 की रात जिला मुख्यालय में किराए के मकान में रह रहे प्रधान आरक्षक तालिब शेख की पत्नी और उनकी नाबालिग बेटी की चाकू से गोदकर निर्मम हत्या कर दी गई थी। घटना के बाद आरोपितों पर साक्ष्य छिपाने के उद्देश्य से दोनों शवों को पीढ़ा गांव के समीप ले जाकर फेंकने का आरोप लगा। मामले की जांच में पुलिस ने विभिन्न साक्ष्य जुटाए। पोस्टमार्टम और वैज्ञानिक जांच से भी घटना की गंभीरता सामने आने के बाद पुलिस ने आरोपितों के विरुद्ध हत्या सहित विभिन्न गंभीर धाराओं में चालान न्यायालय में पेश किया था।
घटना के बाद सड़कों पर उतर आया था आक्रोश
मां-बेटी की निर्मम हत्या की खबर सामने आने के बाद सूरजपुर में आक्रोश फैल गया था। बड़ी संख्या में नागरिक सड़क पर उतर आए थे और आरोपितों की तत्काल गिरफ्तारी के साथ कठोरतम सजा की मांग की थी। घटना की गंभीरता को देखते हुए तत्कालीन कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक को जिले से हटाया गया था। वहीं मुख्य आरोपित कुलदीप साहू से घटना के बाद भी कथित रूप से संपर्क और संबंध बनाए रखने के मामले में कोतवाली थाने के आरक्षक प्रदीप साहू को सेवा से बर्खास्त किया गया था।
राज्य शासन की अनुमति के बाद नियुक्त हुआ विशेष लोक अभियोजक
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस प्रशासन ने न्यायालय में प्रभावी पैरवी के लिए विशेष लोक अभियोजक की नियुक्ति का प्रस्ताव तैयार किया था। तत्कालीन आईजी और पुलिस अधीक्षक के प्रस्ताव को कलेक्टर के माध्यम से राज्य शासन को भेजा गया। शासन से अनुमति मिलने के बाद मामले में पुलिस विभाग की ओर से पैरवी के लिए सहायक संचालक अभियोजन सुरेश शर्मा को विशेष लोक अभियोजक नियुक्त किया गया। इसके बाद उन्होंने न्यायालय में शासन की ओर से मामले की पैरवी की। पुलिस प्रशासन के अनुसार, जिले के इस बहुचर्चित दोहरे हत्याकांड की गंभीरता को देखते हुए राज्य शासन से अनुमति लेकर विशेष लोक अभियोजक की नियुक्ति की गई थी।
फास्ट ट्रैक कोर्ट में चली सुनवाई
मामले की सुनवाई सूरजपुर के विशेष न्यायाधीश पोक्सो एवं जिला-अपर सत्र न्यायाधीश आनंद प्रकाश वारियाल की फास्ट ट्रैक अदालत में हुई। अप्रैल 2026 से मामले में गवाहों के बयान दर्ज होने शुरू हुए थे। लगातार सुनवाई के बाद अब न्यायालय ने दो आरोपितों को दोषमुक्त और चार को हत्या के आरोप में दोषी माना है। चार दोषी आरोपितों की सजा पर अब 8 अक्टूबर को न्यायालय का निर्णय सामने आएगा।
फैसले पर टिकीं जिलेवासियों की निगाहें
दोहरे हत्याकांड ने न केवल एक परिवार को उजाड़ा था, बल्कि घटना के बाद जिस तरह पुलिस और प्रशासन के खिलाफ भी लोगों में आक्रोश सामने आया था, उससे यह मामला पूरे जिले में चर्चा का केंद्र बन गया था। अब न्यायालय द्वारा चार आरोपितों पर हत्या का आरोप सिद्ध माने जाने के बाद आगामी 8 अक्टूबर को होने वाली सजा की घोषणा पर पीड़ित परिवार के साथ ही जिलेवासियों की निगाहें टिकी हुई हैं।