
नईदुनिया प्रतिनिधि। छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले में स्थित मैनपाट केवल अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए ही नहीं, बल्कि अपनी 'रहस्यमयी धरती' के लिए भी दुनिया भर में कौतूहल का विषय बना हुआ है। 'मिनी शिमला' के नाम से मशहूर यह हिल स्टेशन विज्ञान और रोमांच का एक ऐसा संगम है, जिसे देख कर पर्यटक दांतों तले उंगली दबा लेते हैं। आइए जानते हैं कहां यह रहस्यमयी जगह।
मैनपाट का सबसे बड़ा आकर्षण 'जलजली' पॉइंट है। यहां की जमीन आम पत्थरों या मिट्टी की तरह कठोर नहीं है। जैसे ही आप इस जमीन पर कदम रखते हैं या थोड़ा सा उछलते हैं, पूरी धरती किसी स्पंज के गद्दे की तरह हिलने लगती है। ऐसा महसूस होता है जैसे आप जमीन पर नहीं, बल्कि पानी पर तैरती किसी चादर पर खड़े हों।

विशेषज्ञों के अनुसार, इसे वैज्ञानिक भाषा में 'क्वेकिंग बॉग' (Quaking Bog) कहा जाता है। जमीन के नीचे पानी का एक बड़ा सोते (Internal water body) होने और ऊपर वनस्पति व दलदली मिट्टी की एक मोटी लचीली परत होने के कारण यह 'बाउंस' करती है। हालांकि, शोधकर्ता आज भी इस गुत्थी को पूरी तरह सुलझाने में जुटे हैं कि इतनी ऊंचाई पर यह संरचना स्थायी रूप से कैसे बनी हुई है।

समुद्र तल से लगभग 3,300 फीट की ऊंचाई पर बसा मैनपाट अपनी ठंडी जलवायु और धुंध भरी पहाड़ियों के कारण पर्यटकों की पहली पसंद है।
पर्यटन के अन्य प्रमुख केंद्र:
मैनपाट की एक और खासियत यहां का तिब्बती समुदाय है। 1962 के आसपास यहां बड़ी संख्या में तिब्बती शरणार्थी बसे थे, जिसके बाद इसे 'मिनी तिब्बत' कहा जाने लगा। यहां के भव्य और शांत बौद्ध मठ आत्मिक शांति का अनुभव कराते हैं। स्थानीय बाजारों में तिब्बती ऊनी कपड़े और पारंपरिक व्यंजनों (जैसे मोमोज और थुपका) का स्वाद सैलानियों को खूब लुभाता है।

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यदि आप प्रकृति के इस करिश्मे को करीब से देखना चाहते हैं, तो नवंबर से जनवरी के बीच का समय सबसे उपयुक्त है। इन महीनों में यहां का तापमान काफी कम हो जाता है और चारों ओर हरियाली व कोहरे का जादुई नजारा देखने को मिलता है।
जलजली पॉइंट पर जाते समय आरामदायक जूते पहनें और उछलते वक्त सावधानी बरतें, क्योंकि अत्यधिक दबाव से जूते कीचड़ में फंस सकते हैं।