छत्तीसगढ़ के जनजाति गांव मृगाडांड में शराबबंदी, उल्लंघन किया तो 10 हजार रुपये जुर्माना
सरगुजा में स्थित विश्व की पहली रंगशाला रामगढ़ की तराई स्थित पंडो बाहुल्य ग्राम मृगाडांड ने सर्वसम्मति से पूर्ण शराबबंदी का फैसला लिया है। ग्रामीणों ने...और पढ़ें
Publish Date: Mon, 12 Oct 2026 01:39:54 PM (IST)Updated Date: Mon, 12 Oct 2026 01:48:36 PM (IST)
बैठक में उपस्थित ग्रामीण।- ग्रामीण नईदुनिया प्रतिनिधि,अंबिकापुर। ऐतिहासिक, पुरातात्विक और धार्मिक महत्व वाले रामगढ़ पहाड़ की तराई में बसा एक छोटा सा गांव आज पूरे छत्तीसगढ़ के लिए प्रेरणा बन गया है। विशेष पिछड़ी जनजाति पंडो बाहुल्य ग्राम मृगाडांड ने सर्वसम्मति से शराबबंदी का निर्णय लिया है। यह स्वप्रेरणा से लिया गया ऐसा निर्णय है, जो बताता है कि बदलाव कानून से नहीं, चेतना से आता है।
मृगाडांड, उदयपुर जनपद के ग्राम पंचायत सोनतराई का आश्रित ग्राम है, जहां विशेष संरक्षित जनजाति पंडो समुदाय की बहुलता है। कुछ दिन पहले ही लखनपुर जनपद की ग्राम पंचायत केवरी ने आपसी प्रेम, सद्भाव और शांति-सुरक्षा के लिए शराबबंदी का निर्णय लेकर उसे सख्ती से लागू किया था और प्रशासन के सामने खुद को शराबमुक्त पंचायत घोषित करने का दावा प्रस्तुत किया था। केवरी की इस पहल से प्रेरित होकर अब रामगढ़ की गोद में बसे मृगाडांड ने भी वही राह पकड़ी है।
यह निर्णय लिया गया
ग्रामीणों की बैठक में नशामुक्ति को लेकर भावुक अपीलें हुईं। महिलाओं ने कहा कि शराब ने घरों की शांति छीन ली है। इसके बाद सबकी सहमति से कड़े नियम बनाए गए।गांव में शराब बनाने पर 10,000 रुपये का जुर्माना लगेगा। शराब बनाते हुए पकड़वाने में सहयोग करने वाले को गांव की ओर से 5,000 रुपये का पुरस्कार दिया जाएगा।बाहर से शराब पीकर गांव में आने वाले व्यक्ति को समझाइश दी जाएगी और सुधार के लिए उसके परिवार को जागरूक करने के उद्देश्य से 3,000 रुपये का जुर्माना तय किया गया है।नियम तोड़ने पर सामाजिक कार्रवाई के साथ आवश्यकता पड़ने पर प्रशासन को सूचना भी दी जाएगी।
परंपरा का सम्मान, नशे का बहिष्कार
शासन की ओर से जनजातीय परिवारों को सामाजिक आयोजन में स्वयं के उपयोग के लिए पांच लीटर तक महुआ शराब बनाने की छूट है, लेकिन मृगाडांड के ग्रामीणों ने सामाजिक सद्भाव के लिए उस छूट से ऊपर उठकर संयम का मार्ग चुना है। ग्रामीणों का कहना है कि हम अपनी परंपरा का सम्मान करते हैं, लेकिन नशे को उत्सव नहीं बनने देंगे। गांव में शांति, बच्चों की शिक्षा और बेहतर वातावरण के लिए यह कदम जरूरी था।
बैठक में सर्वसम्मति से हुआ निर्णय
बैठक में गांव के सभी समाज के प्रमुखों सहित बड़ी संख्या में महिला-पुरुष मौजूद रहे। सभी ने हाथ उठाकर संकल्प लिया कि वे मृगाडांड को शराबमुक्त बनाकर रहेंगे।रामगढ़ की तराई से उठी यह चेतना की आवाज आज उदयपुर अंचल के लिए एक संदेश भी है कि यदि पंडो जैसे सरल आदिवासी समुदाय आत्मबल से शराब को ना कह सकते हैं, तो कोई भी गांव इस सामाजिक बुराई को हरा सकता है।
स्थान: यह भारत के छत्तीसगढ़ राज्य के सरगुजा जिले (उदयपुर विकासखंड) स्थित रामगढ़ की पहाड़ियों में स्थित है।
सर्वाधिक प्राचीन रंगशाला
गुफा का नाम: इसे सीता बेंगरा गुफा (Sitabengra Cave) के नाम से जाना जाता है।
ऐतिहासिक काल: पुरातत्वविदों के अनुसार यह रंगशाला लगभग तीसरी शताब्दी ईसा पूर्व (मौर्य काल) की मानी जाती है।
विशेष बनावट: इस गुफा को तराशकर अंदर सीढ़ीनुमा दर्शक दीर्घा (गैलरी) बनाई गई है, जहाँ दर्शक बैठकर नाटक या सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ देखते थे। इसमें कलाकारों के लिए मंच (स्टेज) और प्रवेश-निकास की व्यवस्था भी पत्थरों को काटकर बनाई गई है। इसकी बनावट इस प्रकार की गई थी कि ध्वनि गूंजे और पीछे बैठे दर्शकों तक स्पष्ट आवाज पहुंचे।
जोगीमारा गुफा से संबंध: सीता बेंगरा के ठीक समीप ही जोगीमारा गुफा स्थित है। जोगीमारा गुफा में मौर्यकालीन भित्तिचित्र और ब्राह्मी लिपि में अभिलेख मौजूद हैं, जिनमें नर्तकी (देवदासी) सुतनुका और मूर्तिकार देवदीन का उल्लेख मिलता है, जो इस रंगशाला की सांस्कृतिक पृष्ठभूमि को प्रमाणित करते हैं