ज्ञान गंगा : स्वयं को जानना ही सबसे बड़ा ज्ञान
हम बाहरी अनेक बातों को जानते हैं या जानने का प्रयत्न करते हैं, मगर यह भूल जाते हैं कि हम स्वयं क्या हैं?
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Publish Date: Tue, 04 Oct 2016 11:14:09 PM (IST)
Updated Date: Wed, 05 Oct 2016 12:30:49 AM (IST)

-पं श्रीराम शर्मा आचार्य
इस संसार में जानने योग्य अनेक बातें हैं। विद्या के अनेक क्षेत्र हैं। खोज के लिए, जानकारी प्राप्त करने के लिए अनेक मार्ग हैं। कई विज्ञान ऐसे हैं जिनकी बहुत कुछ जानकारी प्राप्त करना मनुष्य की स्वाभाविक वृत्ति है। क्यों? कैसे? कहां? कब? जैसे प्रश्न मनुष्य हर क्षेत्र के लिए करता है। इस जिज्ञासा भाव के कारण ही मनुष्य अब तक इतना ज्ञानी व साधन-संपन्न् बन पाया है। ज्ञान ही जीवन का प्रकाश स्तंभ है।
इसके बावजूद जानकारी की अनेक वस्तुओं में से 'अपने स्वयं की जानकारी होना" सर्वोपरि है। हम बाहरी अनेक बातों को जानते हैं या जानने का प्रयत्न करते हैं, मगर यह भूल जाते हैं कि हम स्वयं क्या हैं? अपने आपका ज्ञान प्राप्त किए बिना जीवन का क्रम बड़ा अनिश्चित और कंटकाकीर्ण होता है। अपने वास्तविक स्वरूप की जानकारी न होने के कारण मनुष्य न सोचने लायक बातें भी सोचता है और न करने लायक कार्य करता है। सच्ची सुख-शांति का राजमार्ग एक ही है और वह है 'आत्म-ज्ञान"। 'मैं क्या हूं?" इस प्रश्न का उत्तर शब्दों द्वारा नहीं वरन् साधना द्वारा हृदयंगम कराने का प्रयत्न हर मनुष्य को करना चाहिए। अध्यात्म मार्ग के पथिकों को स्वयं को जानने पर ही सबसे उपयोगी पथ मिल सकेगा।