
एजुकेशन डेस्क। इंदौर में नर्सिंग शिक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव हुआ है। जबलपुर आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय से लगभग दस साल पहले अलग हुए नर्सिंग कॉलेज अब दोबारा देवी अहिल्या विश्वविद्यालय (डीएवीवी) से जुड़ गए हैं। राज्य शासन से अनुमति मिलने के बाद विश्वविद्यालय आगामी शैक्षणिक सत्र से इन संस्थानों को संबद्धता प्रदान करेगा। इसके साथ ही परीक्षा संचालन और परिणाम जारी करने की जिम्मेदारी भी डीएवीवी के पास रहेगी।
उच्च शिक्षा विभाग के नए निर्देशों के अनुसार अब सभी नर्सिंग कॉलेजों को अपने जिले के विश्वविद्यालय से संबद्ध होना अनिवार्य किया गया है। इसी व्यवस्था के तहत इंदौर, धार और झाबुआ क्षेत्र के लगभग 25 नर्सिंग कॉलेजों ने डीएवीवी में आवेदन प्रस्तुत किए हैं।
विश्वविद्यालय प्रशासन ने अप्रैल और मई के दौरान संबंधित नर्सिंग कॉलेजों का निरीक्षण किया। कॉलेजों द्वारा आवश्यक दस्तावेजों के साथ राज्य शासन की अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) भी जमा करवाई गई है। विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार अगले कुछ दिनों में इन कॉलेजों को औपचारिक संबद्धता जारी कर दी जाएगी।
संबद्धता मिलने के बाद विश्वविद्यालय कॉलेजों की सूची उच्च शिक्षा विभाग को भेजेगा। अधिकारियों का कहना है कि जून महीने में नर्सिंग पाठ्यक्रमों के लिए ऑनलाइन काउंसलिंग प्रक्रिया आयोजित की जाएगी, जिसके बाद प्रवेश प्रक्रिया शुरू होगी।
वर्ष 2015-16 में राज्य शासन ने नर्सिंग और अन्य मेडिकल पाठ्यक्रमों को मध्य प्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय के अधीन कर दिया था। तब से नर्सिंग कॉलेजों की मान्यता, परीक्षा और संचालन की जिम्मेदारी वहीं से संचालित हो रही थी।
हालांकि पिछले कुछ वर्षों में छात्रवृत्ति और वित्तीय गड़बड़ियों से जुड़े कई मामले सामने आए। इसके अलावा परीक्षा और परिणाम समय पर घोषित नहीं होने से विद्यार्थियों को भी परेशानी का सामना करना पड़ा। कई बार छात्रों ने विरोध प्रदर्शन भी किए।
इन परिस्थितियों को देखते हुए शासन ने नर्सिंग कॉलेजों को दोबारा पारंपरिक विश्वविद्यालयों से जोड़ने का निर्णय लिया, ताकि स्थानीय स्तर पर बेहतर निगरानी, पारदर्शिता और शैक्षणिक व्यवस्था सुनिश्चित की जा सके।
डीएवीवी के डीसीडीसी डॉ. सचिन शर्मा ने बताया कि विश्वविद्यालय ने नर्सिंग पाठ्यक्रमों को फिर से संचालित करने की तैयारियां तेज कर दी हैं। बोर्ड ऑफ स्टडीज के गठन और डीन नियुक्ति की प्रक्रिया लगभग पूरी हो चुकी है। इसके अलावा परीक्षा नियम, पाठ्यक्रम और समय-सारिणी तैयार करने का काम भी तेजी से किया जा रहा है। विश्वविद्यालय ने मध्यप्रदेश नर्सिंग काउंसिल से संबंधित कॉलेजों की मान्यता और अन्य आवश्यक जानकारी भी मांगी है।
अधिकारियों का मानना है कि नई व्यवस्था लागू होने से नर्सिंग शिक्षा में पारदर्शिता बढ़ेगी और विद्यार्थियों को परीक्षा तथा परिणाम संबंधी समस्याओं से राहत मिलेगी।