HNLU रायपुर में एक वर्ष में बदल गई रजिस्ट्रार पद की योग्यता, भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता और नियमों के पालन पर उठ रहे सवाल
हिदायतुल्लाह राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय (एचएनएलयू) में रजिस्ट्रार के अहम पद पर भर्ती को लेकर अनियमितता सामने आई है।
Publish Date: Mon, 21 Sep 2026 12:58:57 PM (IST)Updated Date: Mon, 21 Sep 2026 01:01:06 PM (IST)
HighLights
- 2024 और 2025 की योग्यताओं में भारी अंतर
- क्या वैधानिक प्रक्रिया का पालन हुआ
- दस्तावेज सार्वजनिक क्यों नहीं
नईदुनिया प्रतिनिधि, रायपुर। हिदायतुल्लाह राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय (एचएनएलयू) में रजिस्ट्रार के अहम पद पर भर्ती को लेकर अनियमितता सामने आई है। एक साल के भीतर ही इस पद के लिए निर्धारित योग्यताओं में भारी बदलाव कर दिया गया है, जिससे भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता और नियमों के पालन पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
दिसंबर 2024 में जारी विज्ञापन में जहां मास्टर डिग्री और प्रशासनिक अनुभव को पर्याप्त माना गया था, वहीं नवंबर 2025 के नए विज्ञापन में मास्टर डिग्री का विकल्प हटाकर पीएचडी, शोध पत्र और शोध स्कोर जैसी अकादमिक शर्तों को अनिवार्य कर दिया गया है।
2024 और 2025 की योग्यताओं में भारी अंतर
2024 का विज्ञापन (26 दिसंबर): इसमें 55% अंकों के साथ मास्टर डिग्री, 15 वर्ष का असिस्टेंट प्रोफेसर का अनुभव या आठ वर्ष का डिप्टी रजिस्ट्रार का अनुभव मांगा गया था। अधिकतम आयु 60 वर्ष से कम निर्धारित की गई थी।
2025 का नया विज्ञापन (17 नवंबर)
अब पीएचडी डिग्री, न्यूनतम 10 शोध प्रकाशन, 120 का शोध स्कोर, 10 वर्ष का शिक्षण/शोध अनुभव और डॉक्टोरल अभ्यर्थी को गाइड करने का प्रमाण अनिवार्य कर दिया गया। इसके साथ ही नेशनल ला स्कूल में प्रशासनिक अनुभव को प्राथमिकता दी गई है। आयु को घटाकर प्राथमिकता के आधार पर 55 वर्ष से कम कर दिया गया।
अब उठ रहे हैं ये सवाल, बदलाव का आधार क्या है?
सबसे बड़ा सवाल यह है कि एक साल के भीतर इतनी महत्वपूर्ण योग्यताएं किस प्रस्ताव और किस नियम के तहत बदली गईं।
क्या वैधानिक प्रक्रिया का पालन हुआ
अगर योग्यताओं को लेकर स्टैच्यूट या रेगुलेशन में कोई संशोधन किया गया तो क्या इसके लिए एग्जीक्यूटिव काउंसिल से प्रस्ताव पास कराकर चांसलर की मंजूरी ली गई।
दस्तावेज सार्वजनिक क्यों नहीं
एचएनएलयू को 2025 की नई योग्यता तय करने संबंधी प्रस्ताव, एग्जीक्यूटिव काउंसिल की बैठक के एजेंडे और अगर कोई संशोधन हुआ है तो उसकी अधिसूचना को सार्वजनिक करना चाहिए। यूनिवर्सिटी को स्थिति स्पष्ट करनी चाहिये। रजिस्ट्रार विश्वविद्यालय का महत्वपूर्ण प्रशासनिक पद होता है।
ऐसे में भर्ती नियमों में इतने बड़े बदलाव का वैधानिक आधार स्पष्ट होना जरूरी है। यदि यह बदलाव नियमानुसार हुआ है तो विश्वविद्यालय प्रशासन को संबंधित दस्तावेज सार्वजनिक कर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
साथ ही यदि किसी आंतरिक अधिकारी ने इस पद के लिए आवेदन किया है तो चयन प्रक्रिया को निष्पक्ष रखने के लिए अपनाई गई व्यवस्था को भी सार्वजनिक किया जाना चाहिए।
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