भोपाल। आपराधिक पृष्ठभूमि वाले प्रत्याशियों को मतदाता न तो विधानसभा चुनाव में पसंद करते हैं और न ही लोकसभा चुनाव में। देश के 98 प्रतिशत मतदाताओं का मानना है कि ऐसे व्यक्तियों को संसद या विधानसभाओं में नहीं होना चाहिए। वहीं, 75 फीसदी मतदाताओं के लिए विधानसभा चुनाव में मुख्यमंत्री का चेहरा किसी प्रत्याशी को वोट करने का बड़ा कारण होता है। इसके बाद दल और सबसे अंत में प्रत्याशी का नंबर आता है। यानी मतदाता जिस व्यक्ति को अपना नुमाइंदा बनाकर भेजने के लिए वोट करते हैं, वह उसकी प्राथमिकता में तीसरे क्रम पर है। लोकसभा चुनाव से पहले यह खुलासा एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (एडीआर) ने पौने तीन लाख मतदाताओं के बीच कराए सर्वे के नतीजे के आधार पर किया है।

रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि मतदाताओं को नकदी, शराब और उपहार प्रभावित करते हैं। 41.34 फीसदी मतदाताओं की किसी प्रत्याशी विशेष के पक्ष में मतदान करने की बड़ी वजह नकदी, शराब और उपहार मिलना रहता है। सिर्फ 35 फीसदी मतदाताओं को यह पता होता है कि किसी भी प्रत्याशी के आपराधिक रिकॉर्ड की जानकारी पा सकते हैं। 35.89 प्रतिशत मतदाता इस आधार पर आपराधिक पृष्ठभूमि वाले प्रत्याशी को वोट देने की इच्छा रखते हैं, क्योंकि उसने पहले अच्छा काम किया है। जबकि 36.67 प्रतिशत मतदाताओं को लगता है कि वे आपराधिक पृष्ठभूमि वाले प्रत्याशियों को इसलिए मत देते हैं, क्योंकि उन्हें आपराधिक रिकॉर्ड की जानकारी ही नहीं होती ह

मप्र के मतदाताओं की प्राथमिकता में रोजगार के बेहतर मौके

एडीआर ने 2 लाख 76 हजार से मतदाताओं के बीच अक्टूबर से दिसंबर 2018 के बीच किए सर्वे में यह भी पता लगाया कि अखिल भारतीय स्तर पर मतदाताओं की प्राथमिकताएं क्या हैं और सरकार का प्रदर्शन कैसा रहा है। मध्यप्रदेश के मतदाताओं की बात की जाए तो इनकी प्राथमिकता में रोजगार के बेहतर अवसर सबसे महत्वपूर्ण हैं। देश के मतदाता की प्राथमिकता में रोजगार के बेहतर मौके, अस्पताल और स्वास्थ्य केंद्र, पेयजल, सड़क व सार्वजनिक परिवहन है। शीर्ष दस प्राथमिकताओं में कृषि से जुड़े मुद्दे भी हैं।

मतदाताओं के मूल्यांकन के हिसाब से सार्वजनिक भूमि, झीलों पर अतिक्रमण, आतंकवाद, नौकरी के लिए प्रशिक्षण, शक्तिशाली सेना, भ्रष्टाचार का खात्मा, खाद्यान्न् के कम मूल्य और खनन के मुद्दों पर सरकार का प्रदर्शन सबसे खराब रहा है।

मतदाताओं की प्रमुख प्राथमिकताएं

-रोजगार के बेहतर अवसर।

-बेहतर स्वास्थ्य सुविधा।

-पेयजल, अच्छी सड़क।

- बेहतर सार्वजनिक परिवहन।

- खेती के लिए पानी की उपलब्धता।

-कृषि ऋण की उपलब्धता।

- कृषि उत्पादकों के लिए अधिक मूल्य की प्राप्ति।

-बीज और खाद के लिए सबसिडी।

-बेहतर कानून व्यवस्था

हर सर्वे में... रोजगार और स्वास्थ्य सुविधा पहली प्राथमिकता

एडीआर ने अखिल भारतीय मध्यावधि सर्वेक्षण 2017 में किया था। इसमें और 2018 के सर्वे के तुलनात्मक विश्लेषण से पता चलता है कि रोजगार और स्वास्थ्य सुविधा मतदाताओं की शीर्ष दो प्राथमिकताएं हैं। पिछले सर्वे की तुलना में सरकार का प्रदर्शन नए सर्वे में बढ़ने की जगह घट गया है। 32 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेश में से 29 राज्यों के मतदाताओं ने उनकी प्राथमिकताओं पर सरकार के प्रदर्शन को औसत से कम रेटिंग दी है। मतदाताओं की दस प्रमुख प्राथमिकताओं में सरकार का प्रदर्शन औसत से भी कम रहा है।

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