Tanhaji Movie Review : भारतीय इतिहास पर हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में फिल्म बनाने वाले निर्देशकों में संजय लीला भंसाली और आशुतोष गोवारिकर का नाम ही ध्यान आता है। इन दोनों के अलावा तुम बहुत सोच-विचार के बाद शायद एक-दो नाम और निकल आए, इसकी भी कोई गारंटी नहीं। इस कंगाली का सबसे बड़ा कारण है कि ऐतिहासिक फिल्में बनाना नाको चने चबाने जैसा है। तगड़ी रिसर्च के बाद जी तोड़ मेहनत... फिर वह दुनिया खड़ी होती है जिसे फिल्म में भव्य पैमाने पर दिखाया जाता है। इस डर के कारण ही ऐतिहासिक फिल्में बनाने का जिम्मा कुछ ही निर्माता-निर्देशक ले पाते हैं। अब इसी धारा शामिल हुए निर्देशक ओम राउत। ओम ने अजय देवगन, सैफ अली खान और काजोल जैसे सितारों के साथ 'तान्हाजी' बनाई है।

छत्रपति शिवाजी महाराज के बचपन के दोस्त तान्हाजी के जीवन पर बनी फिल्म निर्देशक ओम राउत ने बढ़िया बनाई है, इसके लिए वो बधाई के हकदार हैं। अजय देवगन, सैफ अली खान और काजोल जैसे सितारों के अलावा सैकड़ों जूनियर आर्टिस्ट के साथ लाजवाब सेटस, स्पेशल इफेक्ट को कुशलता से हैंडल करना असाधारण काम है, लेकिन ओम ने सारे किले फतह किए। एक निर्देशक के तौर पर उन्हें पूरे नंबर दिए जा सकते हैं, वो युद्ध में रोमांचित करते हैं तो आखिरी सीन में इमोशनल कर देते हैं।

'तान्हाजी' के किरदार में अजय देवगन का अंदाज निराला है, जो पहले कभी नहीं दिखा। उनकी पहली फ्रेम से आखिरी तक अजय देवगन सिर्फ तानाजी नजर आते हैं। वही काजोल( सावित्री) की मौजूदगी हर सीन में चार चांद लगा देती है। छोटे से छोटा सीन भी काजोल के लिए काफी होता है, वैसे वो यहां ज्यादा देर के लिए नहीं हैं। गिनती के चार सीन उनके पास हैं।

'उदय भान' बने सैफ अली खान को देखना अच्छा लगता है। हर सीन में उनका कमीनापन उनके अद्भुत अभिनेता होने का प्रमाण है। छत्रपति शिवाजी महाराज के रोल में शरद केलकर भी प्रभाव छोड़ते हैं।

कुल मिलाकर कहा जाए तो Tanhaji एक भव्य और मनोरंजक फिल्म है। इसे देखते हुए गौरवशाली इतिहास का अहसास होता है और गर्व की अनुभूति होती है। इससे इतिहास के उन शूरवीरों की गौरव गाथा का पता चलता है जिनका जिक्र इतिहास के कम पन्नों पर है! इस भव्य और ऐतिहासिक लम्हे के गवाह बन कर आप खुश ही हो सकते हैं।

- पराग छापेकर

Posted By: Sudeep mishra

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