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अमिताभ बच्चन कभी मिस्र में थे बेहद लोकप्रिय, जब 1991 में काहिरा पहुंचे तो ‘नेशनल क्राइसिस’ हो गया

बच्चन की 1970 और 1980 के दशक की फिल्में अक्सर एक गुस्सैल, बड़े हीरो पर फोकस करती थीं जो अन्याय, करप्शन या ताकतवर विरोधियों से लड़ता था। एक्शन, इमोशन, ...और पढ़ें

By Digital DeskEdited By: Navodit Saktawat
Publish Date: Wed, 09 Sep 2026 04:13:10 PM (IST)Updated Date: Wed, 09 Sep 2026 04:21:21 PM (IST)
अमिताभ बच्चन कभी मिस्र में थे बेहद लोकप्रिय, जब 1991 में काहिरा पहुंचे तो ‘नेशनल क्राइसिस’ हो गया
अमिताभ बच्चन की फिल्‍म मर्द का एक दृश्‍य।

HighLights

  1. सबसे अनोखा चैप्टर तब आया जब बच्चन दिसंबर 1991 में मिस्र गए।
  2. वे काहिरा पहुंचे, तो एयरपोर्ट पर फैंस इतनी बड़ी संख्या में जमा हो गए।
  3. अधिकारी हैरान रह गए। बच्चन ने इस घटना को कई बार याद किया।

एंटरटेनमेंट डेस्‍क। अमिताभ बच्चन बॉलीवुड ही नहीं, दुनिया भर में मशहूर अभिनेता रहे हैं। एक समय था जब उनकी लोकप्रियता मिस्र में भी चरम पर थी। इसके चलते ही वहां पर 1987 में बॉलीवुड फिल्मों पर रोक लगा दी गई थी। इसके बाद जब वे 1991 में काहिरा पहुंचे, तो देश में एक तरह का ‘नेशनल क्राइसिस’ शुरू हो गया।

बच्चन के मिस्र में हिंदी सिनेमा का चेहरा बनने से बहुत पहले ही भारतीय फिल्मों को मिस्र में दर्शक मिल गए थे। हालांकि, 1980 के दशक तक, हिंदी फिल्मों की पॉपुलैरिटी मिस्र की घरेलू फिल्म इंडस्ट्री के लिए चिंता का विषय बन गई थी। इजिप्ट में सिनेमा पर एकेडमिक रिसर्च के मुताबिक, इंडियन फिल्मों के शो पर रोक लगाई गई थी, क्योंकि अधिकारी लोकल फिल्म इंडस्ट्री को बाहर से आए सिनेमा से बचाना चाहते थे।


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इसमें बच्चन की पॉपुलैरिटी का भी बड़ा हाथ था। उनकी फिल्मों, खासकर मर्द, ने इजिप्ट के दर्शकों के बीच एक कल्ट फॉलोइंग बना ली थी। बाद में बच्चन ने खुद इजिप्ट में मर्द के ज़बरदस्त रन को याद किया। 2015 के एक ब्लॉग पोस्ट में, उन्होंने लिखा था कि उन्हें बताया गया था कि 1985 की यह फिल्म इजिप्ट में दो साल तक चली थी, जबकि “विदेशी फिल्मों के शो पर सख्त नियम” थे।

फिल्म की पॉपुलैरिटी सिर्फ इजिप्ट के एलीट क्लास तक ही सीमित नहीं थी। एक्टर के फैंस के बारे में रिपोर्ट्स बताती हैं कि कैसे उनकी फिल्में और गाने वर्किंग क्लास के दर्शकों तक भी पहुंचे, तब भी जब सिनेमा और होम वीडियो तक पहुंच लिमिटेड थी।

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बच्चन की फिल्मों को रोक के बावजूद भी दर्शक मिले

  • रोकथाम का मतलब यह नहीं था कि इजिप्ट के दर्शकों ने इंडियन फिल्में देखना बंद कर दिया। रिपोर्ट्स में बताया गया है कि इंडियन फिल्में फॉर्मल थिएटर सिस्टम के बाहर भी दिखाई जा रही हैं, और बच्चन की फिल्में दर्शकों को खींचती रहीं।
  • एक खास तौर पर अनोखा उदाहरण मिस्र के फिल्ममेकर मोहम्मद खान की 1988 की फिल्म ज़ॉगेट रागोल मोहम से मिला।
  • मिस्र के सिनेमा की कहानियों में फिल्म में बच्चन के ‘गेराफ्तार’ के फुटेज का इस्तेमाल किया गया है, जो दिखाता है कि भारतीय सुपरस्टार मिस्र के दर्शकों के लिए कितने जाने-पहचाने हो गए थे।
  • ऐसी भी कहानियां थीं कि फैंस बच्चन की फिल्में और गाने सुनने या देखने के लिए कैफे में इकट्ठा होते थे। उनके गाने तब भी पॉपुलर हुए जब ज़्यादातर सुनने वाले हिंदी नहीं समझते थे।
  • यह सिर्फ फिल्म के शौकीनों के एक छोटे ग्रुप का आकर्षण नहीं था। बच्चन मिस्र के दर्शकों के एक बड़े हिस्से के लिए पहचाने जाने लगे थे।

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क्‍या था वह नेशनल क्राइसिस जैसा आलम

सबसे अनोखा चैप्टर तब आया जब बच्चन दिसंबर 1991 में मिस्र गए। जब ​​वे काहिरा पहुंचे, तो एयरपोर्ट पर फैंस इतनी बड़ी संख्या में जमा हो गए कि अधिकारी हैरान रह गए।

बच्चन ने बाद में इस घटना को कई बार याद किया। 1995 में इंडिया टुडे के साथ एक इंटरव्यू में, उन्होंने भीड़ को “बेकाबू” बताया और कहा कि यह एक “राष्ट्रीय संकट” था।

हालात इतने मुश्किल हो गए कि फैंस उनके करीब जाने के लिए कस्टम एरिया में घुस गए। उनकी इमिग्रेशन और कस्टम की फॉर्मैलिटीज़ नॉर्मली एयरपोर्ट पर पूरी नहीं हो पाईं और इसके बजाय उनके होटल में की गईं।

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सालों बाद, बच्चन ने अपने ब्लॉग पर उस एपिसोड को फिर से शेयर किया। 2015 की पोस्ट में, उन्होंने याद किया कि यह पहली बार था जब उन्होंने अपने होटल के कमरे में इमिग्रेशन, कस्टम और पासपोर्ट की फॉर्मैलिटीज़ होते हुए देखी थीं।

यह एपिसोड इसलिए खास था क्योंकि यह उस समय हुआ जब कोई इंस्टाग्राम, यूट्यूब या तुरंत ग्लोबल फैनडम नहीं था। बच्चन की इजिप्ट में फॉलोइंग काफी हद तक सिनेमा, टेलीविज़न, वर्ड ऑफ़ माउथ और बार-बार स्क्रीनिंग से बनी थी।

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बच्चन इजिप्ट में इतने पॉपुलर क्यों थे?

  • इसका कुछ जवाब उन फिल्मों में था जिन्होंने उन्हें सुपरस्टार बनाया।
  • बच्चन की 1970 और 1980 के दशक की फिल्में अक्सर एक गुस्सैल, बड़े हीरो पर फोकस करती थीं जो अन्याय, करप्शन या ताकतवर विरोधियों से लड़ता था।
  • एक्शन, इमोशन, म्यूजिक और मेलोड्रामा का कॉम्बिनेशन हैरानी की बात है कि भाषा की रुकावटों को पार कर गया।
  • इजिप्ट के दर्शकों को बच्चन की स्क्रीन पर्सनैलिटी को समझने के लिए हर हिंदी डायलॉग समझने की ज़रूरत नहीं थी।
  • उनकी इमेज भी अजीब तरह से पहचानी जाने लगी थी। कई दर्शकों के लिए, अमिताभ बच्चन का नाम ही एक खास तरह के इंडियन सिनेमा को दिखाने के लिए काफी था।
  • यह पॉपुलैरिटी विदेशी फिल्मों पर लगी रोक के बावजूद बनी रही।