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तूतक तूतक तूतिया ने झूमने पर मजबूर किया, मनोरंजन के साथ वीरता की कहानी समेटे है

समय के साथ गीत-संगीत में अपनी अलग पहचान बना ली। यही वजह है कि दशकों बाद भी यह नाम लोगों की जुबान पर बना हुआ है।

By Dheeraj BajpaiEdited By: Dheeraj kumar Bajpai
Publish Date: Tue, 30 Jun 2026 02:51:57 PM (IST)Updated Date: Tue, 30 Jun 2026 02:58:25 PM (IST)
तूतक तूतक तूतिया ने झूमने पर मजबूर किया, मनोरंजन के साथ वीरता की कहानी समेटे है
ये किस्से सिंधी और बलूच लोक-संस्कृति में गहराई से रचे-बसे हैं। सौजन्‍य सोशल मीडिया

HighLights

  1. 'जमालो' शब्द लोककथाओं और वीरता की कहानी से जुड़ा
  2. इतिहास का अनोखा संगम आज भी बढ़ा रहा है जिज्ञासा
  3. विदेशी शासन या हमलावरों के खिलाफ अपने कबीले की रक्षा की

धीरज बाजपेई, मनोरंजन डेस्‍क, नईदुनिया जबलपुर। एक गाना जिसने पूरी पीढ़ी को झूमने पर मजबूर कर दिया, लेकिन क्या आप जानते हैं कि 'जमालो' सिर्फ एक नाम नहीं, बल्कि इतिहास का एक जज़्बा भी है? 'तूतक तूतक तूतिया' में गूंजने वाला 'जमालो' शब्द लोककथाओं और वीरता की उस कहानी से जुड़ा माना जाता है।

'जमालो' को एक साहसी और देशभक्त शख्सियत से जोड़कर देखते हैं

दिलचस्प बात यह है कि कई इतिहासकार और लोककथा विशेषज्ञ 'जमालो' को एक साहसी और देशभक्त शख्सियत से जोड़कर देखते हैं। पॉप म्यूजिक की धुनों में मशहूर हुआ यह शब्द अपने पीछे संस्कृति, लोकपरंपरा और वीरता की ऐसी कहानी समेटे हुए है, जिसके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं। मनोरंजन के साथ इतिहास का यह अनोखा संगम आज भी लोगों की जिज्ञासा बढ़ा रहा है।


'तूतक तूतक तूतिया' जैसे लोकप्रिय गानों में भी आता है जिक्र

'जमालो' एक ऐतिहासिक और लोककथात्मक किरदार है, जिसका जिक्र 'तूतक तूतक तूतिया' जैसे लोकप्रिय गानों में भी आता है। कई इतिहासकार और लोककथा विशेषज्ञ 'जमालो' को एक साहसी और देशभक्त शख्सियत मानते हैं, जिसने विदेशी शासन या हमलावरों के खिलाफ अपने कबीले की रक्षा की।

सिंध के एक बहादुर सिपाही और कबीले के रक्षक थे

'जमालो' से जुड़ी ऐतिहासिक और लोककथात्मक मान्यताएँ कई रूपों में मिलती हैं। इतिहासकारों के अनुसार, ये किस्से सिंधी और बलूच लोक-संस्कृति में गहराई से रचे-बसे हैं। एक प्रचलित कथा के अनुसार, जमालो (पूरा नाम जमालो खोसो बलूच या जमालो शीदी) सिंध के एक बहादुर सिपाही और कबीले के रक्षक थे।

साहस के सम्मान में महिलाओं ने 'हो जमालो' लोकगीत गाए

बाहरी हमलावरों और मवेशी चोरों से डटकर मुकाबला किया और अपने लोगों की रक्षा की। युद्ध में उनकी विजय और साहस के सम्मान में महिलाओं ने 'हो जमालो' लोकगीत गाए।

दूसरी कहानी ब्रिटिश काल से जुड़ी है

माना जाता है कि सुक्कुर (सिंध) में जब अंग्रेजों द्वारा नया रेलवे पुल (लैंसडाउन ब्रिज) बनाया गया, तो उस पर ट्रेन चलाने का जोखिम कोई नहीं उठा रहा था। तब मृत्युदंड की सजा पाए जमालो शीदी ने स्वेच्छा से यह जोखिम उठाया। उनके साहस और बलिदान से प्रेरित होकर उन्हें रिहा कर दिया गया और उनकी पत्नी ने उनकी बहादुरी काजश्न मनाते हुए गीत की रचना की।

रक्षक और नायक के रूप में देखा जाता है जमालो

लोककथाओं में 'जमालो' को एक रक्षक और नायक के रूप में देखा जाता है, जो अपने प्राणों की बाजी लगाकर अपने वतन और संस्कृति के लिए खड़ा रहा। इस साहसी किरदार पर आधारित 'हो जमालो' पारंपरिक सिंधी नृत्य और संगीत का एक अभिन्न अंग बन चुका है, जो आज भी उत्सवों और त्योहारों पर पूरे जोश के साथ गाया और नाचा जाता है।

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