
एंटरटेनमेंट डेस्क। हिमेश रेशमिया ने खुलासा किया है कि खिलाड़ी 786 में 1 करोड़ रुपये एक्स्ट्रा लगे क्योंकि इसे डिजिटल के बजाय फिल्म पर शूट किया गया था। उन्होंने कहा कि “हमने बेवजह एक करोड़ ज़्यादा खर्च किए”।
हिमेश रेशमिया ने कोमल नाहटा से बात की और AI के बढ़ने और बदलते समय के साथ चलने की ज़रूरत के बारे में खुलकर बात की। हिमेश ने कहा, “AI म्यूज़िक इंडस्ट्री को बदल रहा है। आज, 7 लाख सिंगर हैं। कल, 50 लाख सिंगर हो सकते हैं। तो, ग्रोथ होगी लेकिन इसके साथ कुछ चुनौतियां भी आएंगी; यह इस बारे में होगा कि आप इसे कैसे रीइन्वेंट करते हैं, यह मायने रखेगा।”

रेशमिया ने आगे कहा, “हमने खिलाड़ी 786 (2012) फिल्म पर शूट की थी। उसी समय, एक फिल्म बन रही थी और उसे डिजिटल पर शूट किया गया था। उस समय यह बहुत बड़ी फिल्म थी। हमें एहसास हुआ कि हमने बेवजह एक करोड़ ज़्यादा खर्च कर दिए क्योंकि कोडक पर शूट किया था।
हमको लगता था कि ‘फिल्म ही सही है; डिजिटल गलत हैं’। आज, सब कुछ डिजिटल पर शूट हो रहा है। इसलिए, तरक्की होगी। इसी तरह, AI भी हमारी ज़िंदगी का हिस्सा बन जाएगा। यह ज़रूरी है कि हम इसका इस्तेमाल अपनी बेहतरी के लिए करें। मुझे नहीं लगता कि AI दर्शकों के साथ इमोशन और इमोशनल कनेक्शन के साथ न्याय कर पाएगा। उसके लिए, इंसानी दिमाग ज़रूरी होगा।”

जब उनसे पूछा गया कि क्या वह AI का इस्तेमाल करते हैं, तो हिमेश ने जवाब दिया, “मेरे म्यूज़िक प्रोड्यूसर्स ने कभी कुछ AI का इस्तेमाल कर लिया, तो कर लिया। हालाँकि, AI हमें स्क्रिप्ट और पोस्टर और कॉस्ट्यूम डिज़ाइन के लिए रेफरेंस पाने में मदद करता है। यह मोशन पोस्टर बनाने में भी मदद करता है। अगर लोगों को लगता है कि AI इंसानों की जगह नहीं लेगा, तो मेरे हिसाब से वे गलत हैं। लेकिन इससे हमें भी फ़ायदा होगा।”

हिमेश रेशमिया ने बताया, “मुझे याद है कि ‘ओढ़ ली चुनरिया’ गाना 2-इंच (2-इंच टेप की बात) पर रिकॉर्ड किया गया था। फिर जब हमने एनालॉग पर गाना रिकॉर्ड करना शुरू किया, तो हमने सोचा कि गाना ‘पतला’ हो गया है। मैंने मिक्सिंग के दौरान पतलेपन को ठीक करने में 3 दिन लगाए। जब आज मैं वो गाना सुनता हूँ, मुझे कोई फर्क ही नहीं लगता। बेशक फर्क है, लेकिन यह बहुत कम है। हालांकि, प्रोग्रेस को रोका नहीं जा सकता। यह होना ही है।”