
धीरज कुमार बाजपेई, मनोरंजन डेस्क, नईदुनिया जबलपुर। 1956 में रिलीज हुई फिल्म परिवार के गाने कुएं में कूद के मर जाना, यार तुम शादी मत करना में किशोर कुमार ने बिना तकनीक के अकेले 21 अलग-अलग आवाजें दो सेकेंड रुक रुककर निकाली थीं।
70 साल पुराने आइकॉनिक गाना याद होगा जिसमें किशोर कुमार ने बच्चे, बुजुर्ग और महिला की आवाजों से सजे इस अनोखे गाने ने खूब लोकप्रियता हासिल की।
मध्य प्रदेश का एक बड़ा शहर होने के कारण जबलपुर में प्रसिद्ध गायक किशोर कुमार के संगीत प्रेमियों और सांस्कृतिक संस्थाओं द्वारा उनके स्मरण में लगातार कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।
सांस्कृतिक और संगीत आयोजन जबलपुर में किशोर दा की याद में और "ये शाम मस्तानी" जैसे संगीतमय कार्यक्रम समय-समय पर आयोजित होते हैं। इन आयोजनों में स्थानीय और बाहरी कलाकार उनके सदाबहार गीत गाकर उन्हें श्रद्धांजलि देते हैं।
जबलपुर में किशोर कुमार की याद में और संगीत के प्रति दीवानगी के कारण लगातार कई बड़े आयोजन किए जाते हैं। जबलपुर में संगीत कार्यक्रम और सांस्कृतिक गतिविधियां होती हैं।
यह जबलपुर का एक बेहद लोकप्रिय और भव्य संगीत कार्यक्रम है, जिसका आयोजन संस्था द्वारा किया जाता है। इसमें शहर और बाहर के नामी कलाकार किशोर दा के सदाबहार नगमे गाकर समां बांधते हैं।
जबलपुर की प्रसिद्ध साहित्यिक और सांस्कृतिक संस्था 'प्रसंग' के तत्वावधान में समय-समय पर किशोर कुमार के गाए गीतों की संगीतमय महफिल सजाई जाती है। इस संस्था द्वारा अब तक किशोर दा की याद में 400 से अधिक सफल संगीतमय कार्यक्रम आयोजित किए जा चुके हैं।
अन्य आगामी बड़े संगीत कार्यक्रम किशोर कुमार के दौर और 90 के दशक के गानों को याद करने के लिए जबलपुर के मुख्य ऑडिटोरियम में अक्सर बड़े कॉन्सर्ट होते हैं।
6 अगस्त को शाम 6:00 बजे से मानस भवन में एक ग्रैंड म्यूजिकल इवेंट आयोजित किया जा रहा है, जिसमें 'इंडियन आइडल' फेम सिंगर्स लाइव परफॉर्म करेंगे।
मध्य प्रदेश के खंडवा में 4 अगस्त 1929 को जन्मे किशोर कुमार को 1948 में पहला मौका मिला जब रिलीज फिल्म 'जिद्दी' में देव आनंद के लिए गाया था।
किशोर कुमार के 1951 में पहली रूमा गुहा ठाकुरता से की थी। 1960 में दूसरी मधुबाला से, 1976 में शादी योगिता बाली और 1980 में चौथी शादी लीना चंद्रावरकर से की थी। पहली पत्नी से अमित कुमार और चौथी पत्नी से सुमित कुमार का जन्म हुआ।
बड़े भाई अशोक कुमार के जन्मदिन पर 13 अक्टूबर 1987 को किशोर कुमार ने दुनिया को अलविदा कह दिया। इसके बाद अशोक कुमार ने अपना जन्मदिन कभी नहीं मनाया।
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