
नवोदित सक्तावत, इंदौर। जानी मानी गायिका कृष्णा मुखर्जी का 22 सितंबर को निधन हो गया। वे 75 वर्ष की थीं। उनकी पहचान अभिनेत्री रानी मुखर्जी की मां के रूप में भी है लेकिन उनका स्वयं का अच्छा खासा वजूद रहा है। आज हम आपको उनका एक रोचक किस्सा सुनाते हैं।
बात 1978 की है। महानतम गायक मोहम्मद रफी साहब का यूके में एक शो चल रहा था। इसकी अवधि कितनी देर की रही होगी यह तो पता नहीं है लेकिन यू-ट्यूब पर इस कांसर्ट का जो ऑडियो उपलब्ध है वह करीब सवा घंटे का है। शो में रफी साहब के साथ कृष्णा मुखर्जी ने युगल गीत गाए थे।
वे उस समय संगीत जगत में नई थीं। संयोग से इसी वर्ष रानी मुखर्जी का भी जन्म हूुआ था। बहरहाल, इस कार्यक्रम में रफी साहब ने अपने कई हिट फिल्मी गीतों की प्रस्तुति दी थी। शो का आखिरी गीत फिल्म तीसरी मंजिल का था।
गीत के बोल थे, 'आजा आजा मैं हूं प्यार तेरा' इस गीत को फिल्म में आशा भोसले ने गाया था। आरडी बर्मन द्वारा संगीतबद्ध किया गया यह गीत गाने में कठिन इसलिए है क्योंकि इसमें सांसों पर बहुत अधिक नियंत्रण रखना होता है और ऐसा करते हुए सुर को साध पाना और भी कठिन काम होता है। साथ ही यह भी ध्यान रखना होता है कि सांस ना उखड़ जाए।

खैर, मंच पर दोनों गायकों ने गाना शुरू किया। जब कृष्णा की बारी आई तो उन्होंने 'आजा आजा' को ज़रा लंबा खींच दिया। इस पर रफी साहब ने चुटकी। उन्होंने गाना बीच में रोककर मराठी शब्द का इस्तेमाल करते हुए कहा, अरे रे रे रे रे रे, बस बस बस बस। इतना जास्ती देर तक! यह सुनकर दर्शक झूठ उठे। लेकिन रफी साहब तो केवल मस्ती मज़ाक कर रहे थे।
उन्होंने तपाक से संभाला, बुलंद आवाज़ में गाया, आजा आजा मैं हूं प्यार तेरा। शो के दौरान हुआ ये रोचक वाकया उन दिनों चर्चित हुआ था। नब्बे के दशक में जब इसके कैसेट्स उपलब्ध हुए तब रफी के प्रशंसक, दीवाने केवल इस पार्ट को सुनने के लिए ही पूरा कार्यक्रम सुनते थे और इस वाकये को बार-बार रिवाइंड करते सुनते थे।