
सूरत। किसान के आठ साल के बेटे को रात में सोने के दौरान सांप ने काट लिया था। अस्पताल नदी के दूसरी तरफ था। सारी परिस्थितियां विपरीत थीं। रात का समय था, नदी पूरे उफान पर थी, एक भी नाव गांव में नहीं थी। मगर, किसान पिता मोहन ने हार नहीं मानी। उसने टायर के ट्यूब में हवा भरकर बेटे रोहित को उसमें लिटाया और 90 मिनट तक जद्दोजेहद करते हुए नदी पार की।
बेटे के पैर में सांप के काटने के बाद मोहन ने ग्रामीणों को जगाया और उन्हों 108 पर फोन करते पिंपरी गांव में एक एम्बुलेंस तैयार रखने का अनुरोध किया। जैसे ही वह नदी के पार पहुंचा एंबुलेंस दोनों को लेकर अहवा सिविल अस्पताल पहुंच गई। मगर, डॉक्टरों ने कहा कि बच्चे को लाने में काफी देर हो चुकी है। वह जीवित नहीं है।
मोहन की सारी मेहनत और सपने टूट गए। विडंबना यह है कि खापरी नदी करीब-करीब पूरे साल सूखी ही रहती है और उसे पार करने में बमुश्किल 10 मिनट लगते हैं। हालांकि, हालिया बारिश से इस नदी में बाढ़ जैसी स्थिति बन गई थी। लिहाजा मोहन ने इसे पार करने में डेढ़ घंटे लग गए।
रोहित को सोमवार की रात करीब 1 बजे सांप ने काटा था। अहवा सिविल अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. रश्मीकांत कोक्नी ने कहा कि बच्चे को सुबह 2.30 बजे अस्पताल में लागा गया था। वह जवाब नहीं दे रहा था। हमने तुरंत इंट्रावेनस इंफ्यूजन के जरिये एंटी-वेनम (जहर को मारने वाली) दवा दी। मगर, जब उसने कोई प्रतिक्रिया नहीं की, तो हमने उसे आर्टिफिशिएल रेस्पिरेशन में रखा।
मगर, हमारे सभी कोशिश बेकार हो गईं। हमने पाया कि बच्चे के शरीर में फैला जहर न्यूरोटॉक्सिक था, आमतौर पर कोबरा सांप में पाया जाता था। यदि एंटी-वेनम दवा 40 मिनट के भीतर दी गई होती, तो बच्चे के जीवित रहने की संभावना अधिक होती है। बच्चे को अस्पताल में लाने में देरी हुई और इसकी वजह से उसके आंतरिक अंगों ने काम करना बंद कर दिया था।
डांग्स में कोबरा और सामान्य क्रेट सांप बड़ी संख्या में पाए जाते हैं और वे दोनों ही काफी जहरीले होते हैं। डांग्स जिला कलेक्टर बी कुमार ने कहा कि सांप काटने के कारण मौत की यह पहली ऐसी घटना है। दावादाद गांव में 25 परिवार रहते हैं और मानसून दौरान ग्रामीणों के लिए किसी भी तरह के काम के लिए पिंपरी या अहवा पहुंचना मुश्किल हो जाता है।
पूरे जिले में जंगल है, लिहाजा सांप काटने की घटनाएं यहां आम हैं। जिला स्वास्थ्य विभाग के सूत्रों के मुताबिक, इस साल मानसून में सांप के काटने की 42 घटनाओं की सूचना मिली है। इनमें से अधिकांश लोगों का इलाज या तो अस्पताल में या 108 आपातकालीन सेवाओं में किया गया था।